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Jind News: डिपो में बसों की कमी के कारण बिगड़ी रोडवेज की व्यवस्था
Tue, 22 Apr 2025 01:32 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 22 Apr 2025 01:32 AM IST
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20जेएनडी17-बस स्टैंड परिसर में बैठे यात्री। संवाद
- फोटो : samvad
जींद। डिपो में बसों की कमी के कारण रोडवेज की व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ गई है। इसका असर लंबे रूटों के साथ-साथ लोकल पर भी पड़ रहा है। शहर में मुख्य समस्या सिटी बस बंद होने व बसों के बाइपास से गुजरने पर बनी। इसके कारण शहर के अंदर से आवागमन करने वाले हजारों विद्यार्थियों व अन्य यात्रियों पर पड़ रहा है। इनको घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
डिपो के टाटा से अनुबंध होने के कारण राज्य परिवहन ने पिछले साल डिपो की अशोक लेलैंड बीएस मॉडल-4 की 15 बस पलवल और 15 बस नूंह भेज दी थी। वहीं, सोनीपत से टाटा की बीएस-3 मॉडल की 12 बस जींद डिपो में शामिल की जानी थी, लेकिन उन बसों का लाइफ टाइम कम होने के कारण जींद डिपो ने इन 12 बसों को लेने से मना कर दिया था। ऐसे में डिपो में 30 बसों की कमी हो गई है। बसों की कमी के कारण 14 बस डबल चक्कर मार रही हैं। इस कारण बसों की मरम्मत को लेकर पर्याप्त समय नहीं मिल पाता और पांच से 7 बस मरम्मत के लिए हर समय खड़ी रहती हैं। ऐसे में रोहतक, भिवानी, कैथल व हिसार जैसे रूट पर पहले की अपेक्षा कम बस चल रही हैं। इस समय डिपो में 158 बस ऑनरूट हैं, जिसमें किलोमीटर स्कीम की 37 बस शामिल हैं। बसों की कमी के चलते सिटी बस सर्विस पर भी पड़ा है, जिस कारण इस बस को बंद कर दिया गया है और अन्य रूट पर चलाया जा रहा है। इस कारण शहर में आने वाले विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर में ऑटो और ई रिक्शा की दो अलग-अलग यूनियन है, जिसमें से एक यूनियन ने शहर में अगल-अलग दूरी के हिसाब से 10 और 20 रुपये किराया और दूसरी यूनियन ने 20 रुपये किराया निर्धारित कर रखा है। ऐसे में ऑटो चालकों और ई रिक्शा चालकों के साथ यात्रियों के झगड़ा होने की संभावना रहती है।
बसों की कमी के कारण यात्री हो रहे परेशान
सिटी बस सर्विस में अलग-अलग दूरी के हिसाब से 10, 15 और 20 रुपये किराया था। पिछले डेढ़ साल में डिपो में 100 से ज्यादा नई बस शामिल हुई थी। इसमें कुछ बसें अशोक लेलैंड की भेजी गई थी। राज्य परिवहन के अतिरिक्त निदेशक नेे सभी महाप्रबंधक के साथ बैठक कर चालक और परिचालकों के स्टाफ की कमी या अधिकता के चलते बसों को दूसरे डिपो में स्थानांतरित करने बारे विचार विमर्श किया था। इसमें डिपो की अशोक लेलैंड की 30 बस दूसरे डिपो में भेजे जाने और बदले में टाटा की 12 बस शामिल करने का निर्णय लिया गया था। सोनीपत से आने वाली 12 बस जींद डिपो में अभी तक नहीं आई हैं। ऐसे में बसों की कमी के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जींद डिपो से बस दूसरे डिपो में भेजे जाने को लेकर पहले की अपेक्षा बसों की संख्या कम हो गई है। ऐसे में परिवहन विभाग को चाहिए कि डिपो में बसों की संख्या बढ़ाई जाए और कर्मचारियों की स्थाई भर्ती की जाए। इससे युवाओं को स्थाई रोजगार मिल सके और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।
-- संदीप रंगा, राज्य उपप्रधान हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ
अभी कोई नई बस नहीं आई है। जितनी भी बस हैं, उन्हें यात्रियों की सुविधा अनुसार बसों का संचालन किया जा रहा है। अगर यात्री मांग करेंगे तो सिटी बस सर्विस को दोबारा से शुरू किया जा सकता है।
-- राहुल जैन, रोडवेज महाप्रबंधक जींद डिपो।
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डिपो के टाटा से अनुबंध होने के कारण राज्य परिवहन ने पिछले साल डिपो की अशोक लेलैंड बीएस मॉडल-4 की 15 बस पलवल और 15 बस नूंह भेज दी थी। वहीं, सोनीपत से टाटा की बीएस-3 मॉडल की 12 बस जींद डिपो में शामिल की जानी थी, लेकिन उन बसों का लाइफ टाइम कम होने के कारण जींद डिपो ने इन 12 बसों को लेने से मना कर दिया था। ऐसे में डिपो में 30 बसों की कमी हो गई है। बसों की कमी के कारण 14 बस डबल चक्कर मार रही हैं। इस कारण बसों की मरम्मत को लेकर पर्याप्त समय नहीं मिल पाता और पांच से 7 बस मरम्मत के लिए हर समय खड़ी रहती हैं। ऐसे में रोहतक, भिवानी, कैथल व हिसार जैसे रूट पर पहले की अपेक्षा कम बस चल रही हैं। इस समय डिपो में 158 बस ऑनरूट हैं, जिसमें किलोमीटर स्कीम की 37 बस शामिल हैं। बसों की कमी के चलते सिटी बस सर्विस पर भी पड़ा है, जिस कारण इस बस को बंद कर दिया गया है और अन्य रूट पर चलाया जा रहा है। इस कारण शहर में आने वाले विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर में ऑटो और ई रिक्शा की दो अलग-अलग यूनियन है, जिसमें से एक यूनियन ने शहर में अगल-अलग दूरी के हिसाब से 10 और 20 रुपये किराया और दूसरी यूनियन ने 20 रुपये किराया निर्धारित कर रखा है। ऐसे में ऑटो चालकों और ई रिक्शा चालकों के साथ यात्रियों के झगड़ा होने की संभावना रहती है।
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बसों की कमी के कारण यात्री हो रहे परेशान
सिटी बस सर्विस में अलग-अलग दूरी के हिसाब से 10, 15 और 20 रुपये किराया था। पिछले डेढ़ साल में डिपो में 100 से ज्यादा नई बस शामिल हुई थी। इसमें कुछ बसें अशोक लेलैंड की भेजी गई थी। राज्य परिवहन के अतिरिक्त निदेशक नेे सभी महाप्रबंधक के साथ बैठक कर चालक और परिचालकों के स्टाफ की कमी या अधिकता के चलते बसों को दूसरे डिपो में स्थानांतरित करने बारे विचार विमर्श किया था। इसमें डिपो की अशोक लेलैंड की 30 बस दूसरे डिपो में भेजे जाने और बदले में टाटा की 12 बस शामिल करने का निर्णय लिया गया था। सोनीपत से आने वाली 12 बस जींद डिपो में अभी तक नहीं आई हैं। ऐसे में बसों की कमी के चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जींद डिपो से बस दूसरे डिपो में भेजे जाने को लेकर पहले की अपेक्षा बसों की संख्या कम हो गई है। ऐसे में परिवहन विभाग को चाहिए कि डिपो में बसों की संख्या बढ़ाई जाए और कर्मचारियों की स्थाई भर्ती की जाए। इससे युवाओं को स्थाई रोजगार मिल सके और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके।
अभी कोई नई बस नहीं आई है। जितनी भी बस हैं, उन्हें यात्रियों की सुविधा अनुसार बसों का संचालन किया जा रहा है। अगर यात्री मांग करेंगे तो सिटी बस सर्विस को दोबारा से शुरू किया जा सकता है।

20जेएनडी17-बस स्टैंड परिसर में बैठे यात्री। संवाद- फोटो : samvad