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तीन दिन से चल रही बारिश ने किसानों की बढाई चिंता, फसलों के खराब होने का डर

Sat, 24 Sep 2022 01:51 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 24 Sep 2022 01:51 AM IST
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Roads submerged due to rain, fear of damage to crops
जींद। जिले में चार दिन से चल रही बारिश से शहर में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान और कपास की फसल को नुकसान की आशंका बन गई है। बेल वाली सब्जियों में भी नुकसान का डर सता रहा है।
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लगातार बारिश के चलते अधिकतम तथा न्यूनतम तापमान में तीन से छह डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है। वीरवार को अधिकतम तापमान 26 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 23 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम में शत प्रतिशत आद्रता दर्ज की गई, जबकि हवा की गति 13 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों के दौरान बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान जिले में हुई औसतन 16.85 एमएम बारिश पिछले 24 घंटों के दौरान जिले में मानसून की सक्रियता के चलते
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जुलाना में हुई सबसे अधिक बारिश
जींद । मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जींद में 21 एमएम, नरवाना में 27 एमएम, सफीदों में सात एमएम, जुलाना में 41 एमएम, उचाना में तीन एमएम, पिल्लूखेडा में छह एमएम, अलेवा में 13 एमएम बारिश दर्ज की गई है। शुक्रवार को सुबह आठ बजे से लेकर शाम के चार बजे तक जींद में 11 एमएम, सफीदों में पांच, जुलाना में 20 एमएम, पिल्लूखेडा में चार, अलेवा में पांच एमएम बारिश दर्ज हुई है।
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शहर में इन स्थानों पर हुआ जलभराव
नरवाना रोड, पटियाला चौक, पुरानी सब्जी मंडी, बत्तख चौक, एसडी स्कूल, रानी तालाब, पुरानी अनाज मंडी रोड समेत शहर की पॉश बस्ती स्कीम नंबर पांच, छह, अर्बन एस्टेट, हाउसिंग बोर्ड, डिफेंस कालोनी में बरसाती पानी जमा हो गया। टूटे हुए भिवानी रोड तथा पुरानी अनाज मंडी रोड पर आवागमन भी प्रभावित हुआ।
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बेमौसम बारिश से फसलों पर मं डराया खतरा
मानसून की सक्रियता के चलते पिछले तीन दिनों से बूंदाबांदी तथा बारिश हो रही है। जिले में लगभग 65 हजार नरमा की फसल लगाई थी। मानसून सीजन के दौरान अच्छी बारिश होने के चलते कपास की फसल लगभग पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर है। बाजरे का रकबा बढ़ा और 20 हजार हेक्टेयर तक जा पहुंचा। अब बाजरा की फसल पकी तो बेमौसमी बारिश ने परेशानी को बढ़ा दिया है। पछेते बाजरा में बुर आया हुआ है जो बारिश से धुल गया, जो बाजरा पक चुका है, उसका बारिश से दाना काला होगा और भाव नहीं मिलेगा।
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तिरपाल ढककर बचा रहे धान की फसल
मंडी में आढ़तियों की हड़ताल के चलते अगेती किस्म की धान की खरीददारी नहीं हो रही। जिसके चलते अब बारिश के मौसम में किसानों को मंडी में डाली गई धान के खराब होने का डर बना हुआ है। मंडी में आई धान को किसानों ने तिरपाल ढक्कर बिगने से बचाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। हालांकि शहर की मंडी में इस समय 500 किंव्टल के आसपास धान कई दुकानों पर आई हुई है।

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ज्यादा बारिश हुई तो फसलों को नुकसान
कृषि विशेषज्ञ डा. यशपाल मलिक ने बताया कि कपास तथा बाजरा के लिए बारिश नुकसानदायक है। धान की फसल में झुलसा रोग दिखाई देने लगा था। बूंदाबांदी से उसमें राहत मिलेगी। बूंदाबांदी के साथ हवा की गति तेज होने के चलते धान की फसल पसर गई है, वहां बालियां खाली हो जाएंगी। अगर बारिश तेज होती है तो धान के लिए भी नुकसानदायक होगी। धान फसल पकाव की तरफ जा रही है। जहां बाजरा काटा जा चुका है वहां पर सरसों के लिए जमीन को तैयार किया जा सकता है। 26 सितंबर तक मौसम परिवर्तनशील रहेगा। आकाश में बादल छाये रहने के साथ हलकी से मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वह मौसम को देखते हुए फसलों में सिंचाई तथा स्प्रे से परेहज करें।
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