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रिमांड के दौरान कानूनी सहायता आरोपी का अधिकार: सीजीएम

Thu, 26 May 2022 12:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 26 May 2022 12:00 AM IST
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Right of accused to legal aid during remand: CGM
जींद। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं विधिक सेवा प्राधिकरण की जिला सचिव रेखा ने बताया कि रिमांड के दौरान आरोपी को कानूनी सहायता उसका अधिकार है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि मजिस्ट्रेट का कर्तव्य है कि आरोपी को पहले आरोप के बारे में पूरी तरह से अवगत कराया जाए। कानूनी परामर्श द्वारा उसका बचाव करना उसका अधिकार है। यदि उसके पास वकील करने का कोई साधन नहीं है तो राज्य खर्च पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से वकील मुहैया करवाया जाएगा।
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उन्होंने बुधवार को जारी विज्ञप्ति में कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सभी न्यायालयों और आवश्यकता अनुसार कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में रिमांड अधिवक्ताओं की नियुक्ति करता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यह सुनिश्चित करता है कि ड्यूटी अधिवक्ता रिमांड कार्रवाई में शामिल होंगे। सीजेएम रेखा ने बताया कि पुलिस गिरफ्तार व्यक्ति को रिमांड अधिवक्ता के बारे में सूचित करें जो प्रत्येक न्यायालय में नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि रिमांड से पहले अगर पैनल अधिवक्ता अभियुक्त से बातचीत करने का इच्छुक है तो इसके लिए न्यायालय से अनुमति लें। कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सक्षम अगर किसी व्यक्ति को पेश किया जाता है तो ऐसे व्यक्ति द्वारा कानूनी सहायता की जरूरत होने पर अधिवक्ता उसका प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व करें।
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