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क्रांतिकारी युवक संगठन ने शिक्षा विभाग की ट्रांसफर और चिराग योजना का किया विरोध
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विरोध प्रदर्शन करते विद्यार्थी। संवाद।
- फोटो : Jind
नरवाना। क्रांतिकारी युवा संगठन के बैनर तले युवाओं, छात्रों व अभिभावकों ने सरकार पर सरकारी स्कूलों को बंद करने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए विश्वकर्मा चौक पर प्रदर्शन किया। इसके बाद एसडीएम कार्यालय तक शिक्षामंत्री की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकाली और पुतला दहन करके एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
छात्र नेता रोहित ने कहा कि 105 स्कूलों को मर्ज करने व चिराग योजना के तहत सरकार सरकारी स्कूलों को बंद करने की योजना को सिरे चढ़ा रही है। सरकारी स्कूलों को बंद करने का सब से ज्यादा खमियाजा गरीब परिवार के छात्रों को भुगतना पड़ेगा। सरकार कम संख्या के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद करती जा रही है। जहां इस नीति से बहुसंख्यक आबादी शिक्षा से वंचित होती चली जाएगी, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य देखने वाले युवाओं के लिए भी सरकारी रोजगार के अवसर कम होंगे।
छात्र राकेश ने कहा कि सरकार का कहना है कि इन स्कूलों में छात्र संख्या कम है। इसलिए इनको बंद किया जा रहा है लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही कि सरकारी स्कूलों में दिन प्रतिदिन छात्रों की संख्या कम होने के पीछे क्या कारण हैं। छात्र सौरव ने कहा कि सरकार ने खुद मानसून सत्र में स्वीकार किया है कि सरकारी स्कूलों में लगभग 35 हजार शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। अगर स्कूलों में टीचर नहीं होंगे तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे। संगठन मांग करता है कि सभी के लिए एक समान शिक्षा अधिनियम पास किया जाए। स्कूलों के प्रति सरकार गंभीरता से काम करे। चिराग योजना और तबादला नीति के तहत जारी की जा रही जनविरोधी नीतियों को रद्द किया जाए।
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इस मौके पर रोहित, सौरव, सन्नी, रामू, राकेश, साहिल, राजू, सुनील, होशियार सिंह, वीरेंद, परवीन, दिनेश, राहुल, अजय, सुशील पूनिया, विक्रम, कोमल, रोजी, ज्योति, पूनम, अंजली मौजूद रहे।
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छात्र नेता रोहित ने कहा कि 105 स्कूलों को मर्ज करने व चिराग योजना के तहत सरकार सरकारी स्कूलों को बंद करने की योजना को सिरे चढ़ा रही है। सरकारी स्कूलों को बंद करने का सब से ज्यादा खमियाजा गरीब परिवार के छात्रों को भुगतना पड़ेगा। सरकार कम संख्या के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद करती जा रही है। जहां इस नीति से बहुसंख्यक आबादी शिक्षा से वंचित होती चली जाएगी, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा के क्षेत्र में अपना भविष्य देखने वाले युवाओं के लिए भी सरकारी रोजगार के अवसर कम होंगे।
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छात्र राकेश ने कहा कि सरकार का कहना है कि इन स्कूलों में छात्र संख्या कम है। इसलिए इनको बंद किया जा रहा है लेकिन सरकार इस पर कोई ध्यान नहीं दे रही कि सरकारी स्कूलों में दिन प्रतिदिन छात्रों की संख्या कम होने के पीछे क्या कारण हैं। छात्र सौरव ने कहा कि सरकार ने खुद मानसून सत्र में स्वीकार किया है कि सरकारी स्कूलों में लगभग 35 हजार शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। अगर स्कूलों में टीचर नहीं होंगे तो बच्चे कैसे पढ़ेंगे। संगठन मांग करता है कि सभी के लिए एक समान शिक्षा अधिनियम पास किया जाए। स्कूलों के प्रति सरकार गंभीरता से काम करे। चिराग योजना और तबादला नीति के तहत जारी की जा रही जनविरोधी नीतियों को रद्द किया जाए।
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इस मौके पर रोहित, सौरव, सन्नी, रामू, राकेश, साहिल, राजू, सुनील, होशियार सिंह, वीरेंद, परवीन, दिनेश, राहुल, अजय, सुशील पूनिया, विक्रम, कोमल, रोजी, ज्योति, पूनम, अंजली मौजूद रहे।