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Mon, 03 Oct 2022 01:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 03 Oct 2022 01:48 AM IST
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Radhana's farmer Naresh grew four feet long charioteer of millet
संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। गांव रधाना के पूर्व सरपंच नरेश चहल के खेतों में खड़ी बाजरे की फसल की चर्चा आज पूरे हरियाणा में है। इसकी वजह है फसल की सरटी (सिट्टे) की तीन से चार फीट की लंबाई। सरटी की इस आश्चर्यजनक लंबाई के कारण ही नरेश चहल के पास फसल पकने से पहले ही इसके खरीददारों की मांग आ गई है।
सामान्य तौर पर बाजरे की सरटी की लंबाई एक फीट तक ही होती है, लेकिन तीन से चार फीट की लंबाई होने की वजह से उसकी फसल देखने के लिए दूर दूर से किसान आते हैं। कुछ तो वीडियो कॉल कर भी लोग बाजरे की सरटी देख रहे हैं। नरेश चहल ने बताया कि बाजरे का यह बीज उसे राजस्थान के जोधपुर से मिला था। उसका दोस्त कोच अजीत जोधपुर में रहता है। उसने नरेश को बाजरे की चार से पांच फीट तक की लंबी सरटी का फोटो भेजा था और बताया कि उसके यहां एक किसान के खेत में बाजरे की फसल में यह सरटी लगी हुई है। नरेश ने उसकी भेजी फोटो पर विश्वास नहीं किया। इसके बाद कोच अजीत ने उस किसान के खेत में जाकर वीडियो कॉल कर नरेश को बाजरे की फसल दिखाई। इसके बाद ही नरेश को विश्वास हुआ और बाजरे का बीज लेने की इच्छा जताई। उस किसान ने दो हजार रुपये प्रति किलो बीज नरेश को दिया। नरेश ने इस खरीफ सीजन में एक एकड़ में इस बाजरे के बीज की बिजाई की। खेत में बीज अंकुरित होने के कुछ दिनों बाद करीब पांच कनाल के बाजरे के पौधों को भेड़ खा गई। अब उसके खेत में तीन कनाल में बाजरे की फसल है। नरेश का दावा है कि जितनी लंबी सरटी आई हुई है उससे तीन कनाल में ही आठ से 10 क्विंटल बाजरे का उत्पादन होने की संभावना है।
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समय पर नहीं कर पाया सिंचाई
नरेश चहल ने बताया कि इस बार वह कुछ कार्यों में इतना व्यस्त रहा कि बाजरे की फसल में समय पर सिंचाई नहीं कर पाया और न ही समय पर खाद डाल पाया। यदि वह समय पर सिंचाई व खाद डालता तो बाजरे की फसल और भी अधिक हो सकती थी।
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कंपनियों से भी आ रहे फोन
फिलहाल नरेश चहल ने बाजरे की कटाई नहीं की है। अभी से उसके पास बीज कंपनियों की तरफ से भी फोन आ रहे हैं और मुंह मांगे दाम देने को तैयार हैं। नरेश ने बताया कि उसने कंपनियों की बजाय किसानों को इसका बीज देने का फैसला किया है। नरेश को यह पता नहीं कि उसे बाजरे की किस्म क्या है। जिस किसान से उसने यह बीज लिया था उसे भी इसकी किस्म का पता नहीं। कृषि अधिकारी भी कह रहे हैं कि अगर बीज हाइब्रिड होता तो दोबारा बिजाई करने पर यह अंकुरित नहीं होता या सरटी इतनी लंबी नहीं होती। इसकी लंबाई ज्यादा होने के चलते कुछ लोग इसे 5जी का नाम भी ले रहे हैं। अगले साल वह धान की खेती छोड़ अपने सारे खेत में बाजरे की ही खेती करेगा।
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