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Jind News: 90 दिन बाद भी गेहूं की आढ़त का भुगतान न होने पर आढ़तियों का प्रदर्शन
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01: अपनी मांगों को लेकर लघु सचिवालय में ज्ञापन सौंपने के लिए जाते हुए आढ़ती संगठन के पदाधिकारी ज
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जींद। हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के आह्वान पर करीब 90 दिन बाद भी आढ़त का पूरा भुगतान न होने और 2.5 प्रतिशत आढ़त समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को जिलेभर के आढ़तियों ने प्रदर्शन किया।
हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के आह्वान पर जिला प्रधान वेदपाल भनवाला की अध्यक्षता में आढ़ती लघु सचिवालय के गोहाना मोड़ पर एकत्रित हुए और उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। आढ़तियों ने मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप कौशिक को ज्ञापन सौंपकर लंबित भुगतान सहित सभी मांगों के जल्द समाधान की मांग की।
आढ़तियों ने कहा कि गेहूं खरीद वर्ष 2026-27 समाप्त हुए करीब 90 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक गेहूं की आढ़त का पूरा भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार से लंबित भुगतान जल्द करवाने की मांग की। साथ ही गेहूं और धान की आढ़त को 2.5 प्रतिशत के हिसाब से देने की मांग उठाई। आढ़तियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण इस वर्ष गेहूं की आढ़त में उन्हें करीब 75 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
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एसोसिएशन ने मांग की कि सभी फसलों की सरकारी खरीद आढ़तियों के माध्यम से करवाई जाए और 2.5 प्रतिशत की दर से आढ़त का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की ओर से जारी लाइसेंस को जीएसटी की तर्ज पर आजीवन जारी करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। आढ़तियों ने कहा कि इस संबंध में सरकार के साथ पहले सहमति बन चुकी है, लेकिन फैसला लागू नहीं हुआ।
बाजार फीस व एचआरडीएफ की दरें घटाने की मांग
ज्ञापन में फसल की मशीन से सफाई की मजदूरी को आई-फार्म में शामिल करने, लोडिंग मजदूरी को वास्तविक बाजार दरों के आधार पर निर्धारित करने, मंडियों में तौल व्यवस्था की जांच का अधिकार केवल अधिकृत अधिकारियों तक सीमित रखने और दुकानों से संबंधित रजिस्ट्री की व्यवस्था को स्पष्ट करने की मांग की गई। साथ ही बाजार कमेटी की संपत्तियों की रजिस्ट्री की सूचना डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड में दर्ज करने और नए मालिक का इंतकाल स्वत: दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई।
बाजार फीस ज्यादा होने से उद्योग प्रभावित
आढ़तियों ने ई-नाम-2 में किसानों की अनावश्यक पंजीकरण प्रक्रिया समाप्त कर इसे केवल सरकारी खरीद तक सीमित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बाजार फीस और एचआरडीएफ की दरें अन्य राज्यों की तुलना में अधिक होने से कृषि आधारित उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए इन दरों को तर्कसंगत किया जाए ताकि उद्योगों का पलायन रुके और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। एसोसिएशन ने सरकार से प्रतिनिधिमंडल के साथ जल्द बैठक कर सभी समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
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हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के आह्वान पर जिला प्रधान वेदपाल भनवाला की अध्यक्षता में आढ़ती लघु सचिवालय के गोहाना मोड़ पर एकत्रित हुए और उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। आढ़तियों ने मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त उपायुक्त प्रदीप कौशिक को ज्ञापन सौंपकर लंबित भुगतान सहित सभी मांगों के जल्द समाधान की मांग की।
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आढ़तियों ने कहा कि गेहूं खरीद वर्ष 2026-27 समाप्त हुए करीब 90 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक गेहूं की आढ़त का पूरा भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने सरकार से लंबित भुगतान जल्द करवाने की मांग की। साथ ही गेहूं और धान की आढ़त को 2.5 प्रतिशत के हिसाब से देने की मांग उठाई। आढ़तियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था के कारण इस वर्ष गेहूं की आढ़त में उन्हें करीब 75 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।
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एसोसिएशन ने मांग की कि सभी फसलों की सरकारी खरीद आढ़तियों के माध्यम से करवाई जाए और 2.5 प्रतिशत की दर से आढ़त का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की ओर से जारी लाइसेंस को जीएसटी की तर्ज पर आजीवन जारी करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई। आढ़तियों ने कहा कि इस संबंध में सरकार के साथ पहले सहमति बन चुकी है, लेकिन फैसला लागू नहीं हुआ।
बाजार फीस व एचआरडीएफ की दरें घटाने की मांग
ज्ञापन में फसल की मशीन से सफाई की मजदूरी को आई-फार्म में शामिल करने, लोडिंग मजदूरी को वास्तविक बाजार दरों के आधार पर निर्धारित करने, मंडियों में तौल व्यवस्था की जांच का अधिकार केवल अधिकृत अधिकारियों तक सीमित रखने और दुकानों से संबंधित रजिस्ट्री की व्यवस्था को स्पष्ट करने की मांग की गई। साथ ही बाजार कमेटी की संपत्तियों की रजिस्ट्री की सूचना डिजिटल माध्यम से रिकॉर्ड में दर्ज करने और नए मालिक का इंतकाल स्वत: दर्ज करने की व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई।
बाजार फीस ज्यादा होने से उद्योग प्रभावित
आढ़तियों ने ई-नाम-2 में किसानों की अनावश्यक पंजीकरण प्रक्रिया समाप्त कर इसे केवल सरकारी खरीद तक सीमित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बाजार फीस और एचआरडीएफ की दरें अन्य राज्यों की तुलना में अधिक होने से कृषि आधारित उद्योग प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए इन दरों को तर्कसंगत किया जाए ताकि उद्योगों का पलायन रुके और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। एसोसिएशन ने सरकार से प्रतिनिधिमंडल के साथ जल्द बैठक कर सभी समस्याओं का समाधान करने की मांग की।