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कल से हड़ताल पर निजी स्कूल
jind/bureau
Updated Wed, 04 May 2016 11:58 PM IST
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अब तक सरकार और निजी स्कूलों के गले की फांस बना नियम 134ए अब निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भी आफत बन गया है। नियम 134 ए के तहत पिछले तीन साल से निजी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की फीस सरकार द्वारा नहीं देने के विरोध में निजी स्कूलों ने छह मई से जिले भर में हड़ताल करने का फैसला कर लिया है।
बुधवार देर शाम हुई निजी स्कूल संचालकों की मीटिंग में इस पर सहमति बनी। दरअसल प्रदेश में बने नियम 134 ए के तहत निजी स्कूलों को दस प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान है। इस मामले में अदालत का आदेश है कि जिन गरीब बच्चों को निजी स्कूल मुफ्त शिक्षा देगा, उसकी फीस सरकार द्वारा भरी जानी चाहिए। ऐसे में जिले में पिछले तीन साल से करीब दो हजार विद्यार्थी निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा पा रहे हैं।
अब निजी स्कूल संचालक प्रति विद्यार्थी प्रति माह 2300 रुपये की मांग कर रहे हैं। निजी स्कूलों का कहना है कि इतने ही पैसे सरकार सरकारी स्कूलों में एक विद्यार्थी पर खर्च कर रही है। यह पैसे सरकार द्वारा निजी स्कूलों को दिए जाने चाहिए।
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सरकार से हो चुकी है कई बार बातचीत, कोई समाधान नहीं
सरकार से इस विषय पर कई बार बातचीत हो चुकी है। मांग मानने के बाद भी सरकार मुकर जाती है। ऐसे में निजी स्कूल संचालकों के पास हड़ताल के अलावा कोई और चारा नहीं है। अब छह मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा रही है।
नरेश बराड़, जिलाध्यक्ष निजी स्कूल संघ।
शनिवार को बनेगी रणनीति
नियम 134 ए के तहत विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने के लिए आंदोलन कर रहे स्वास्थ्य शिक्षा संगठन की जिलाध्यक्ष आशा गोयत के अनुसार इस मामले पर शनिवार को भिवानी में प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं की मीटिंग बुलाई गई है। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
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बुधवार देर शाम हुई निजी स्कूल संचालकों की मीटिंग में इस पर सहमति बनी। दरअसल प्रदेश में बने नियम 134 ए के तहत निजी स्कूलों को दस प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान है। इस मामले में अदालत का आदेश है कि जिन गरीब बच्चों को निजी स्कूल मुफ्त शिक्षा देगा, उसकी फीस सरकार द्वारा भरी जानी चाहिए। ऐसे में जिले में पिछले तीन साल से करीब दो हजार विद्यार्थी निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा पा रहे हैं।
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अब निजी स्कूल संचालक प्रति विद्यार्थी प्रति माह 2300 रुपये की मांग कर रहे हैं। निजी स्कूलों का कहना है कि इतने ही पैसे सरकार सरकारी स्कूलों में एक विद्यार्थी पर खर्च कर रही है। यह पैसे सरकार द्वारा निजी स्कूलों को दिए जाने चाहिए।
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सरकार से हो चुकी है कई बार बातचीत, कोई समाधान नहीं
सरकार से इस विषय पर कई बार बातचीत हो चुकी है। मांग मानने के बाद भी सरकार मुकर जाती है। ऐसे में निजी स्कूल संचालकों के पास हड़ताल के अलावा कोई और चारा नहीं है। अब छह मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा रही है।
नरेश बराड़, जिलाध्यक्ष निजी स्कूल संघ।
शनिवार को बनेगी रणनीति
नियम 134 ए के तहत विद्यार्थियों को दाखिला दिलवाने के लिए आंदोलन कर रहे स्वास्थ्य शिक्षा संगठन की जिलाध्यक्ष आशा गोयत के अनुसार इस मामले पर शनिवार को भिवानी में प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं की मीटिंग बुलाई गई है। इसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।