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Jind News: मुख्यमंत्री के आगमन से पहले पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया
Thu, 19 Feb 2026 12:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 19 Feb 2026 12:09 AM IST
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18जेएनडी04-मुख्यमंत्री का विरोध करने वाले युवकों को हिरासत में लेने छात्तर गांव पहुंची पुलिस। स
जींद। पुलिस ने छात्तर गांव के युवक सुशील और अमरदीप को मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने उनके मोबाइल फोन भी बंद करवा दिए हैं।
छात्तर गांव के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने तीन दिन पहले फैसला लिया था कि वह उचाना में होने वाली विकास रैली को लेकर मुख्यमंत्री का विरोध करेंगे। वह पांच साल से गांव में मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उनको प्रशासन भी सहयोग नहीं कर रहा है क्योंकि उनका साल 2021 में उनका गांव के ही सामान्य वर्ग के लोगों के साथ झगड़ा हो गया था। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली थी।
आरोप लगाया कि इस मामले के बाद उनका गांव से बहिष्कार कर दिया गया था। अब वह आरोपी लोग उनसे झगड़े के मामले में समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। इन मामलों में अभी तक सभी आरोपियों को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। समझौते से मना करने पर उनके मोहल्ले में न तो बिजली ट्रांसफार्मर रखने दिया जा रहा है और न ही पेयजल मुहैया हो पा रहा है। उनके मोहल्ले में आठ-दस दिनों में सप्लाई आती है।
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पानी खत्म होने पर उन्हें खेतों से लाना पड़ता है। उन्हें बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजने में भी डर लगा रहता है। नवंबर 2025 में एसडीएम दलजीत सिंह के नेतृत्व में बिजली निगम के अधिकारी व कर्मचारी पहुंचे थे। उन्होंने जैसे ही ट्रांसफार्मर रखने की प्रक्रिया शुरू की तो वहां गांव के ही कुछ लोग आ गए थे जिन्होंने वहां ट्रांसफार्मर रखने पर एतराज जताया। उनका कहना था कि यहां पर ट्रांसफार्मर नहीं लगने दिया जाएगा। अनुसूचित जाति के लोगों का आरोप था कि गांव के कुछ दबंग लोगों के कारण उनको बिजली मुहैया नहीं हो पा रही है क्योंकि वहां से लाइन आती है।
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छात्तर गांव के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने तीन दिन पहले फैसला लिया था कि वह उचाना में होने वाली विकास रैली को लेकर मुख्यमंत्री का विरोध करेंगे। वह पांच साल से गांव में मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उनको प्रशासन भी सहयोग नहीं कर रहा है क्योंकि उनका साल 2021 में उनका गांव के ही सामान्य वर्ग के लोगों के साथ झगड़ा हो गया था। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली थी।
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आरोप लगाया कि इस मामले के बाद उनका गांव से बहिष्कार कर दिया गया था। अब वह आरोपी लोग उनसे झगड़े के मामले में समझौता करने का दबाव बना रहे हैं। इन मामलों में अभी तक सभी आरोपियों को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है। समझौते से मना करने पर उनके मोहल्ले में न तो बिजली ट्रांसफार्मर रखने दिया जा रहा है और न ही पेयजल मुहैया हो पा रहा है। उनके मोहल्ले में आठ-दस दिनों में सप्लाई आती है।
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पानी खत्म होने पर उन्हें खेतों से लाना पड़ता है। उन्हें बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कूल भेजने में भी डर लगा रहता है। नवंबर 2025 में एसडीएम दलजीत सिंह के नेतृत्व में बिजली निगम के अधिकारी व कर्मचारी पहुंचे थे। उन्होंने जैसे ही ट्रांसफार्मर रखने की प्रक्रिया शुरू की तो वहां गांव के ही कुछ लोग आ गए थे जिन्होंने वहां ट्रांसफार्मर रखने पर एतराज जताया। उनका कहना था कि यहां पर ट्रांसफार्मर नहीं लगने दिया जाएगा। अनुसूचित जाति के लोगों का आरोप था कि गांव के कुछ दबंग लोगों के कारण उनको बिजली मुहैया नहीं हो पा रही है क्योंकि वहां से लाइन आती है।