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मेरी फसल-मेरा ब्योरा में पटवारी ने बाजरे को बदलकर किया धान
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तहसील कार्यालय में पहुंचे झमोला के किसान। संवाद
- फोटो : Jind
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जुलाना। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पटवारी ने झमोला गांव के किसानों के बाजरे की जगह धान की फसल दिखा दिया। जिससे किसानों को सरकार की भावांतर योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इससे उनको आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों ने आरोप लगाया है कि पटवारी ने मिलीभगत करके ऐसा किया है। उन्होंने तहसीलदार को शिकायत दी है।
किसान मोती, सूरजभान, सतपाल, जयबीर, संदीप, बलवान व राजकुमार ने बताया कि उन्होंने गांव के सीएससी सेंटर और मार्केट कमेटी में बाजरे का पंजीकरण मेरी फसल- मेरा ब्योरा पर करवाया था। गांव के कुल 215 एकड़ का पंजीकरण बाजरे का किया गया था, लेकिन पटवारी ने उसे बदलकर धान कर दिया। किसानों ने नायब तहसीलदार को इस मामले में शिकायत सौंपी और संज्ञान लेने की गुहार लगाई। किसानों ने मांग की है कि उनकी फसल के पंजीकरण को फिर से बाजरे में तबदील किया जाए और उन्हें भावांतर के रूप में मिलने वाले 650 रुपये दिलवाए जाएं।
नायब तहसीलदार जुलाना नवनीत कुमार ने कहा कि झमोला गांव के किसान पंजीकरण की समस्या को लेकर मिले हैं। मौके पर जाकर मुआयना किया जाएगा, जिसके बाद किसानों की समस्या का समाधान किया जाएगा।
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किसान मोती, सूरजभान, सतपाल, जयबीर, संदीप, बलवान व राजकुमार ने बताया कि उन्होंने गांव के सीएससी सेंटर और मार्केट कमेटी में बाजरे का पंजीकरण मेरी फसल- मेरा ब्योरा पर करवाया था। गांव के कुल 215 एकड़ का पंजीकरण बाजरे का किया गया था, लेकिन पटवारी ने उसे बदलकर धान कर दिया। किसानों ने नायब तहसीलदार को इस मामले में शिकायत सौंपी और संज्ञान लेने की गुहार लगाई। किसानों ने मांग की है कि उनकी फसल के पंजीकरण को फिर से बाजरे में तबदील किया जाए और उन्हें भावांतर के रूप में मिलने वाले 650 रुपये दिलवाए जाएं।
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नायब तहसीलदार जुलाना नवनीत कुमार ने कहा कि झमोला गांव के किसान पंजीकरण की समस्या को लेकर मिले हैं। मौके पर जाकर मुआयना किया जाएगा, जिसके बाद किसानों की समस्या का समाधान किया जाएगा।
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