{"_id":"61098a878ebc3eaab513e3cf","slug":"patients-wandering-for-treatment-for-three-hours-due-to-workers-strike-jind-news-rtk6198925111","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्मचारियों की हड़ताल के कारण तीन घंटे तक इलाज के लिए भटकते रहे मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण तीन घंटे तक इलाज के लिए भटकते रहे मरीज
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल की पंजीकरण खिड़की पर लोगों की लगी भीड़। संवाद
- फोटो : Jind
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वास्थ्य विभाग कर्मचारी तालमेल कमेटी, स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी यूनियन व सर्व कर्मचारी संघ के आह्वान पर मंगलवार को नागरिक अस्पताल जींद में तीन घंटे तक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित रहीं। इस दौरान न तो किसी को किसी को टीका लगा और नहीं किसी मरीज का पंजीकरण हुआ। दवाई भी नहीं मिली।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि आउटसोर्स एजेंसी ने हटाए गए कर्मचारियों को वापस नहीं लिया तो 10 अगस्त को पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। इसके अलावा आउटसोर्स एजेंसी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच प्रशासन को करनी चाहिए।
सुबह 8 बजे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग के मुख्य गेट पर जमा हुए और आउटसोर्स एजेंसी, सिविल सर्जन तथा जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचे। 10 बजे तक सभी कर्मचारी यहां सिविल सर्जन कार्यालय पर प्रदर्शन में शामिल रहे। इसके बाद कर्मचारियों ने अपने-अपने ऑफिस में जाकर कामकाज संभाला। नागरिक अस्पताल का कार्य लगभग 11 बजे जाकर सुचारु रूप से चला। 10 बजे वैक्सीन लगाने का कार्य शुरू हुआ। इस दौरान पीपी सेंटर के बाहर कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई। काफी लोग वैक्सीन नहीं लगने के कारण लौट गए। पंजीकरण खिड़की बंद होने के कारण साढ़े 10 बजे तक मरीज इधर-उधर भटकते रहे। ओपीडी में चिकित्सक को जरूर बैठे, लेकिन पंजीकरण नहीं होने के कारण कोई भी मरीज नहीं देखा गया। इसी प्रकार दवाई वितरण खिड़की भी पूरी तरह से बंद रही।
विज्ञापन
पैसे लेकर लगाए जा रहे कर्मचारी
सर्व कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष रामफल दलाल व तालमेल कमेटी के राज्य सलाहकार राजबीर बेरवाल ने कहा कि आउटसोर्स ठेकेदार पैसे लेकर कर्मचारियों को नौकरी पर रख रहा है। 43 पुराने कर्मचारियों को हटा दिया गया तथा 60 के स्थान व पद बदल दिए गए। यदि आउटसोर्स एजेंसी ने सभी कर्मचारियों को नौकरी पर नहीं रखा व उनको उनके मूल स्थान व पद पर नहीं रखा तो 10 अगस्त को पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। कर्मचारी नेताओं ने आउटसोर्स एजेंसी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग भी की।
कर्मचारी नेता एवं आउटसोर्स एजेंसी सुपरवाइजर के बीच हुई खींचतान
धरना समाप्त होने के बाद कर्मचारी जब अपने काम पर लौटे तो एजेंसी सुपरवाइजर ने उनको आंदोलन में शामिल नहीं होने की नसीहत दी। स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान सोनू बूरा ने सुपरवाइजर का विरोध करते हुए कहा कि वह इस प्रकार कर्मचारियों को प्रताड़ित नहीं कर सकते। इसके बाद दोनों के बीच काफी बहस हुई। अस्पताल चौकी प्रभारी एएसआई नफे सिंह ने उन्हें शांत करवाया। सोनू बूरा ने कहा कि कर्मचारियों को किसी भी सूरत में प्रताड़ित नहीं करने दिया जाएगा।
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कुछ कार्य प्रभावित हुआ। लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक असर नहीं हुआ। कर्मचारियों से अपील करके उन्हें काम पर बुला लिया गया था। 25 जून को भी अस्पताल में हड़ताल की गई थी। उस समय मामला निपट गया था, लेकिन अब फिर से हड़ताल कर दी गई। इस बारे में स्वास्थ्य निदेशालय को अवगत करवा दिया गया है। -डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन।
विज्ञापन
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यदि आउटसोर्स एजेंसी ने हटाए गए कर्मचारियों को वापस नहीं लिया तो 10 अगस्त को पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। इसके अलावा आउटसोर्स एजेंसी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच प्रशासन को करनी चाहिए।
विज्ञापन
सुबह 8 बजे स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग के मुख्य गेट पर जमा हुए और आउटसोर्स एजेंसी, सिविल सर्जन तथा जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद कर्मचारी प्रदर्शन करते हुए सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचे। 10 बजे तक सभी कर्मचारी यहां सिविल सर्जन कार्यालय पर प्रदर्शन में शामिल रहे। इसके बाद कर्मचारियों ने अपने-अपने ऑफिस में जाकर कामकाज संभाला। नागरिक अस्पताल का कार्य लगभग 11 बजे जाकर सुचारु रूप से चला। 10 बजे वैक्सीन लगाने का कार्य शुरू हुआ। इस दौरान पीपी सेंटर के बाहर कोरोना वैक्सीन लगवाने वाले लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई। काफी लोग वैक्सीन नहीं लगने के कारण लौट गए। पंजीकरण खिड़की बंद होने के कारण साढ़े 10 बजे तक मरीज इधर-उधर भटकते रहे। ओपीडी में चिकित्सक को जरूर बैठे, लेकिन पंजीकरण नहीं होने के कारण कोई भी मरीज नहीं देखा गया। इसी प्रकार दवाई वितरण खिड़की भी पूरी तरह से बंद रही।
विज्ञापन
पैसे लेकर लगाए जा रहे कर्मचारी
सर्व कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष रामफल दलाल व तालमेल कमेटी के राज्य सलाहकार राजबीर बेरवाल ने कहा कि आउटसोर्स ठेकेदार पैसे लेकर कर्मचारियों को नौकरी पर रख रहा है। 43 पुराने कर्मचारियों को हटा दिया गया तथा 60 के स्थान व पद बदल दिए गए। यदि आउटसोर्स एजेंसी ने सभी कर्मचारियों को नौकरी पर नहीं रखा व उनको उनके मूल स्थान व पद पर नहीं रखा तो 10 अगस्त को पूरे जिले में स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। कर्मचारी नेताओं ने आउटसोर्स एजेंसी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग भी की।
कर्मचारी नेता एवं आउटसोर्स एजेंसी सुपरवाइजर के बीच हुई खींचतान
धरना समाप्त होने के बाद कर्मचारी जब अपने काम पर लौटे तो एजेंसी सुपरवाइजर ने उनको आंदोलन में शामिल नहीं होने की नसीहत दी। स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान सोनू बूरा ने सुपरवाइजर का विरोध करते हुए कहा कि वह इस प्रकार कर्मचारियों को प्रताड़ित नहीं कर सकते। इसके बाद दोनों के बीच काफी बहस हुई। अस्पताल चौकी प्रभारी एएसआई नफे सिंह ने उन्हें शांत करवाया। सोनू बूरा ने कहा कि कर्मचारियों को किसी भी सूरत में प्रताड़ित नहीं करने दिया जाएगा।
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कुछ कार्य प्रभावित हुआ। लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक असर नहीं हुआ। कर्मचारियों से अपील करके उन्हें काम पर बुला लिया गया था। 25 जून को भी अस्पताल में हड़ताल की गई थी। उस समय मामला निपट गया था, लेकिन अब फिर से हड़ताल कर दी गई। इस बारे में स्वास्थ्य निदेशालय को अवगत करवा दिया गया है। -डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन।