रामराये खेड़ा म्है इबकै होगी आपणी पंचायत
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400 वोटरों वाले खेड़ा रामराये गांव को अबकी बार अपनी पंचायत मिलने जा रही है। अभी तक खेड़ा तथा रामराये दोनों गांवों की एक ही पंचायत थी। अलग से पंचायत बनने के बाद जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या 300 से बढ़कर 301 पर पहुंच जाएगी। वहीं, गांव की अलग पंचायत बनने से खेड़ा गांव के ग्रामीणों को भी गांव में विकास की उम्मीद बंधी है। पहली बार बनने वाली पंचायत को लेकर खेड़ा गांव के ग्रामीण भी उत्साहित हैं। इस बार गांव की अलग से पंचायत बनने के कारण ज्यादातर ग्रामीण सर्वसम्मति से सरपंच बनाने के पक्ष में हैं। इसके चलते अभी तक गांव से दो ही उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दर्ज करवाए हैं। इनमें एक उम्मीदवार 60 वर्षीय रामरति उर्फ राममूर्ति तथा दूसरा उम्मीदवार 36 वर्षीय सुखजिंद्र हैं। रामरति उर्फ राममूर्ति ने दसवीं तक की पढ़ाई की हुई है, वहीं 36 वर्षीय सुखजिंद्र बीए की पढ़ाई करने के बाद अपना ट्रांसपोर्ट का काम करता है। पूरे गांव से अभी तक दो ही उम्मीदवारों द्वारा नामांकन किए जाने से ग्रामीणों को सर्वसम्मति की ही उम्मीद बंधी हुई है।
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ब्लॉक समिति सदस्य रह चुकी है रामरति
60 वर्षीय रामरति उर्फ राममूर्ति ने 1970-71 में रोहतक के आर्य स्कूल से दसवीं की पढ़ाई पूरी की थी। रामरति के दो बेटे तथा एक बेटी है। एक बेटा खेतीबाड़ी का कार्य करता है तो दूसरा बेटा पंचकूला में जिला नगर योजनाकार (डीटीपी) कार्यालय में नौकरी करता है। वहीं, बेटी खाद्य एवं पूर्ति विभाग जींद में कार्यरत है। सरपंच की उम्मीदवार राममूर्ति इससे पहले ब्लॉक समिति की सदस्य रह चुकी है। वहीं रामरति के पति स्वर्गीय धूपसिंह नौगामा के प्रधान रह चुके हैं। रामरति का कहना है कि इस बार पहली बार गांव की अलग से पंचायत बन रही है। इसके चलते ग्रामीण सर्वसम्मति से सरपंच बनाने के पक्ष में हैं।
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मतदान से चुना जाएगा सरपंच
सरपंच पद के उम्मीदवार सुखजिंद्र का कहना है कि पहली बार उनके गांव की अलग से पंचायत बनने जा रही है। इसलिए वह मतदान से सरपंच चुनने के पक्ष में हैं। सुखजिंद्र का कहना है कि मतदाताओं को मतदान से पहली बार अपने गांव के लिए सरपंच चुनने से एक अलग से खुशी का एहसास होगा। सुखजिंद्र ने कहा कि यदि वह गांव के मुखिया बनते हैं तो ग्रामीणों के साथ तालमेल से गांव के विकास के लिए कदम उठाए जाएंगे।
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गांव के विकास में आएगी गति
पहले खेड़ा तथा रामराये की एक ही पंचायत होती थी। दोनों गांव की एक पंचायत होने के कारण उनके गांव में विकास कार्य नहीं हो पाते थे। इसलिए उनका गांव विकास के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। अब गांव की अलग से पंचायत बनने से गांव के विकास को गति मिलेगी।
भरत सिंह, ग्रामीण
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ग्रामीणों को मिलेंगी मूलभूत सुविधाएं
पहली बार गांव की अलग से पंचायत बनने जा रही है। इससे ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। गांव की अलग से पंचायत बनने से ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी और इससे गांव का विकास होगा। ग्रामीणों को सरपंच से संबंधित अपने छोटे-छोटे कामों के लिए दूसरे गांव नहीं जाना पड़ेगा।
रामस्वरूप, ग्रामीण
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गांव की समस्याओं का होगा समाधान
दूसरे गांव का सरपंच हमारे गांव के विकास की तरफ ध्यान नहीं देता था। अपने गांव का सरपंच बनने से गांव की समस्याओं का समाधान होगा। पहली बार गांव की अलग से पंचायत बनने जा रही है। इसलिए ग्रामीणों को चाहिए कि सर्वसम्मति से सरपंच का चुनाव किया जाना चाहिए।
चतर सिंह, ग्रामीण।
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सर्वसम्मति से होना चाहिए सरपंच का चुनाव
रामराये खेड़ा गांव की पहली बार अलग से पंचायत बनने से गांव में खुशी का माहौल है। गांव के हर गली व नुक्कड़ पर चुनाव की चर्चा चल रही हैं। गांव के सर्वजनिक स्थान पर हुक्का गुड़गुड़ा रहे ग्रामीण चतर सिंह, रामस्वरूप, सतपाल, भरत सिंह, महेंद्र, दलबीर, उदय सिंह, फतेह सिंह ने कहा कि पहली बार गांव की पंचायत बनने जा रही है। इसलिए सर्वसम्मति से ही सरपंच का चयन किया जाना चाहिए, इसके बाद सरकार से मिलने वाली आर्थिक राशि को गांव के विकास पर खर्च किया जा सके।
फोटो कैप्शन
23जेएनडी 24 : गांव में हुक्का गुड़गुड़ाते समय चुनावी चर्चा करते ग्रामीण।
23जेएनडी 25 : सरपंच पद की उम्मीदवार रामरति उर्फ राममूर्ति।
23जेएनडी 26 : ग्रामीण भरत सिंह का फोटो।
23जेएनडी 27 : ग्रामीण रामस्वरूप का फोटो।
23जेएनडी 28 : ग्रामीण चतर सिंह का फोटो।