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Jind News: मंडियों में धान की खरीद सुस्त, किसानों के 132 करोड़ के धान में से 34 करोड़ का ही भुगतान

Mon, 19 Oct 2026 12:10 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 12:10 AM IST
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Paddy procurement in mandis is slow, with farmers receiving payments for only Rs 34 crore out of Rs 132 crore worth of paddy.
18जेएनडी02: नरवाना मंडी में उठान नहीं होने के कारण लगे धान के ढेर। संवाद
जींद। जिले की अनाज मंडियों में धान की खरीद और उठान की धीमी रफ्तार किसानों के लिए परेशानी बनी हुई है। किसान कई दिनों से फसल बेचने के इंतजार में मंडियों में बैठे हैं। कहीं धान में नमी बताकर तो कहीं अन्य कारणों से खरीद नहीं हो पा रही है। इससे किसानों की आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।
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मंडियों में अब तक 9 लाख 97 हजार 70 क्विंटल पीआर धान पहुंच चुका है लेकिन इसमें से 5 लाख 37 हजार 470 क्विंटल की ही बिक्री हो पाई है। वहीं, धान बेच चुके किसान भुगतान के इंतजार में हैं। अब तक 34 करोड़ रुपये ही किसानों के खातों में पहुंचे हैं, जबकि खरीदे गए धान के एवज में करीब 132.27 करोड़ रुपये का भुगतान होना बाकी है। खरीद और भुगतान की धीमी रफ्तार के चलते किसानों को अपनी फसल की रकम के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। भुगतान के आंकड़ों के अनुसार, 6020 किसानों का धान बिका है लेकिन इनमें से 1631 किसानों को ही भुगतान मिला है।
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धान की सरकारी खरीद में देरी के बाद उठान की रफ्तार भी नाममात्र रहने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। खरीद एजेंसियों की सुस्ती का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। फसल बिकने के बाद भी किसानों को अपनी मेहनत की कमाई खाते में आने के लिए 15 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, जिन किसानों की फसल अब तक नहीं बिकी है, उनकी चिंता अलग है। मंडियों में धान की बोरियों के ढेर बढ़ने के साथ जगह की समस्या भी गहराने लगी है।
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नौ लाख क्विंटल से अधिक धान पहुंचा, आधा भी नहीं बिका
जिले में अब तक 12,617 किसान धान लेकर मंडियों में पहुंच चुके हैं। इनमें से 7,733 किसानों के 6 लाख 56 हजार 700 क्विंटल धान की नीलामी हुई, जबकि 6,020 किसानों के 5 लाख 37 हजार 470 क्विंटल धान की बिक्री हो सकी। इस तरह मंडियों में पहुंची कुल फसल का करीब 54 प्रतिशत ही बिक पाया है। शेष धान की खरीद का इंतजार है। इस बार पीआर धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। ऐसे में खरीद में देरी का असर सीधे किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।

उठान धीमा, भुगतान के लिए भी इंतजार
मंडियों में खरीद के बाद धान का उठान भी धीमी गति से हो रहा है। अब तक केवल 2 लाख 55 हजार 130 क्विंटल धान का उठान हुआ है। इससे मंडियों में बोरियों के ढेर बढ़ रहे हैं और जगह की समस्या गहराने लगी है। भुगतान के आंकड़ों के अनुसार, जिन किसानों का धान बिक चुका है, उनमें से 1,631 किसानों को ही अब तक राशि मिली है। किसानों को फसल बिकने के बाद भी भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

पिल्लूखेड़ा, नगूरां और अलेवा में ज्यादा परेशानी
जिले की पिल्लूखेड़ा मंडी में किसानों को खरीद प्रक्रिया में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगूरां और अलेवा मंडियों में भी हालात ठीक नहीं हैं। नगूरां मंडी में शनिवार शाम धान की खरीद नहीं होने से नाराज किसानों ने जाम लगाकर विरोध जताया। किसानों का कहना है कि कहीं नमी तो कहीं अन्य कारण बताकर खरीद में देरी की जा रही है। इससे मंडियों में कई दिनों से फसल लेकर बैठे किसानों की परेशानी बढ़ रही है।
तीन दिन पहले पूरी हुई मिलर्स की व्यवस्था
वहीं धान के उठान में देरी का मुख्य कारण मंडियों में समय पर मिलर्स का नहीं मिलना रहा। स्थिति यह रही कि तीन दिन पहले ही मंडियों में मिलर्स की व्यवस्था पूरी हो पाई जिसके चलते धान का उठान प्रभावित हुआ।

वर्जन
जिले की मंडियों में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जा रही। अब तक किसानों के खातों में 34 करोड़ रुपये डाले जा चुके हैं और कुछ राशि भुगतान प्रक्रिया में है। उठान व खरीद में प्रतिदिन तेजी करवाई जा रही है ताकि किसानों को धान का भुगतान समय पर दिया जा सके। -राजेश आर्य, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक जींद।
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