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सतगुरु ही दिखाते हैं कल्याण का मार्ग : सतगुरु कंवर साहेब
Mon, 11 Mar 2024 12:29 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 11 Mar 2024 12:29 AM IST
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जींद। हमने ये दुर्लभ तन पाया है। इसको भक्ति करके ही हम सार्थक बना सकते हैं। भक्ति भी केवल गुरु की क्योंकि सतगुरु ही हमें कल्याण का मार्ग सुझा सकते हैं। आज की पीढ़ी को व्यसनों का रोग है और ये रोग छूत के समान है। यदि हमारी संतान ही बिगड़ गई तो क्या लाभ हमारी इंसानियत का। जिस संतान के लिए हम न जाने क्या-क्या कष्ट उठाते हैं, कितने मंदिरों, डेरों में माथा टेकते हैं, वही संतान पथभ्रष्ट हो जाती है तो मां-बाप का सबकुछ लुट जाता है। यह विचार परम संत सतगुरु कंवर साहेब महाराज ने जींद के भिवानी रोड पर स्थित बीबीपुर गांव में स्थित राधास्वामी आश्रम के नए भवन में व्यक्त किए।
हुजूर कंवर साहेब ने फरमाया कि वह स्थान बहुत पवित्र होता है जहां सत्संग होता है। एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक बार प्रभु महादेव और माता पार्वती भ्रमण पर थे। रास्ते में एक खंडहर सी भूमि को देखकर महादेव ने शीश नवाया। पार्वती माता ने आश्चर्य से पूछा तो उन्होंने बताया कि इस भूमि पर कभी एक महापुरुष ने अपने चरण रखे थे और परमात्मा के नाम का गुणगान हुआ था। संतों का सत्संग हुआ था। वो भूमि सबसे पवित्र है, जहां संतों का सत्संग होता है। सत्संग परमात्मा के नाम का गुणगान है।
उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के लिए सत्संग और भी ज्यादा आवश्यक है। सत्संग का मार्ग कल्याण और परोपकार का मार्ग है। इस पर चलकर इंसान न केवल अपने आचरण में सुधार करता है, बल्कि अपने कर्मों को सुधार कर अपना नसीब भी बना लेता है। उन्होंने कहा कि संतों का सत्संग हर जीव के कल्याण के लिए होता है।
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निर्भय निराकार बनाती है भक्ति
हजूर साहेब ने कहा कि भक्ति वो प्रसाद है जिसे देकर आप आने वाली पीढ़ी का भी कल्याण कर जाते हैं। भक्ति आप को निर्भय, निराकार बनाती है। भक्ति आप को जन्म-मरण से छुटकारा दिलाती है। जिसने आप को पैदा किया है वो आपके चुगे दाने का भी प्रबंध करेगा। यदि अच्छा जीवन पाकर भी अच्छा नहीं करोगे तो आप अपने भविष्य में कांटे ही बो रहे हो।
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हुजूर कंवर साहेब ने फरमाया कि वह स्थान बहुत पवित्र होता है जहां सत्संग होता है। एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक बार प्रभु महादेव और माता पार्वती भ्रमण पर थे। रास्ते में एक खंडहर सी भूमि को देखकर महादेव ने शीश नवाया। पार्वती माता ने आश्चर्य से पूछा तो उन्होंने बताया कि इस भूमि पर कभी एक महापुरुष ने अपने चरण रखे थे और परमात्मा के नाम का गुणगान हुआ था। संतों का सत्संग हुआ था। वो भूमि सबसे पवित्र है, जहां संतों का सत्संग होता है। सत्संग परमात्मा के नाम का गुणगान है।
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उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के लिए सत्संग और भी ज्यादा आवश्यक है। सत्संग का मार्ग कल्याण और परोपकार का मार्ग है। इस पर चलकर इंसान न केवल अपने आचरण में सुधार करता है, बल्कि अपने कर्मों को सुधार कर अपना नसीब भी बना लेता है। उन्होंने कहा कि संतों का सत्संग हर जीव के कल्याण के लिए होता है।
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निर्भय निराकार बनाती है भक्ति
हजूर साहेब ने कहा कि भक्ति वो प्रसाद है जिसे देकर आप आने वाली पीढ़ी का भी कल्याण कर जाते हैं। भक्ति आप को निर्भय, निराकार बनाती है। भक्ति आप को जन्म-मरण से छुटकारा दिलाती है। जिसने आप को पैदा किया है वो आपके चुगे दाने का भी प्रबंध करेगा। यदि अच्छा जीवन पाकर भी अच्छा नहीं करोगे तो आप अपने भविष्य में कांटे ही बो रहे हो।