{"_id":"6a2074548f267c35d50a2058","slug":"on-the-spot-settlement-of-a-case-at-the-lok-adalat-jind-news-c-199-1-sroh1009-154479-2026-06-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: लोक अदालत में एक मामले का मौके पर निपटारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: लोक अदालत में एक मामले का मौके पर निपटारा
विज्ञापन
03जेएनडी03: जेल में बंदियों को कानूनी सहायता के बारे में जागरूक करते हुए प्राधिकरण सचिव अमित सि
- फोटो : लापता युवक आरिश। स्रोत परिजन
जींद। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पूनम सुनेजा के निर्देशानुसार बुधवार को जिला कारागार में जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में विचाराधीन एक मामले का मौके पर ही निपटारा किया गया।
प्राधिकरण सचिव अमित सिहाग ने बताया कि मामले में विचाराधीन बंदी को अंडरगोन अवधि का लाभ प्रदान करते हुए आदेश दिए गए कि यदि उसके विरुद्ध कोई अन्य मामला लंबित नहीं है तो उसे रिहा किया जाए। लोक अदालत के दौरान अमित सिहाग ने जेल में बंद कैदियों और हवालातियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बंदियों को निशुल्क कानूनी सहायता, अपील के अधिकार और विधिक सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि जिन बंदियों के पास अपने मामले की पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध नहीं है। वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने जेल प्रशासन को महिला बंदियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, कानूनी परामर्श, बेहतर रहन-सहन तथा खान-पान संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। अमित सिहाग ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर कोई भी व्यक्ति घर बैठे कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है। इस अवसर पर जेल अधीक्षक दीपक शर्मा, न्याय रक्षक नंद मोहन शर्मा, अनिल जैन मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्राधिकरण सचिव अमित सिहाग ने बताया कि मामले में विचाराधीन बंदी को अंडरगोन अवधि का लाभ प्रदान करते हुए आदेश दिए गए कि यदि उसके विरुद्ध कोई अन्य मामला लंबित नहीं है तो उसे रिहा किया जाए। लोक अदालत के दौरान अमित सिहाग ने जेल में बंद कैदियों और हवालातियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने बंदियों को निशुल्क कानूनी सहायता, अपील के अधिकार और विधिक सेवाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जिन बंदियों के पास अपने मामले की पैरवी के लिए अधिवक्ता उपलब्ध नहीं है। वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने जेल प्रशासन को महिला बंदियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, कानूनी परामर्श, बेहतर रहन-सहन तथा खान-पान संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। अमित सिहाग ने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सहायता हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर कोई भी व्यक्ति घर बैठे कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है। इस अवसर पर जेल अधीक्षक दीपक शर्मा, न्याय रक्षक नंद मोहन शर्मा, अनिल जैन मौजूद रहे।
विज्ञापन