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पुराने किले पर शाही परिवार और प्रशासन आमने-सामने
जींद/ अमर उजाला, ब्यूरो
Updated Sun, 28 Feb 2016 12:06 AM IST
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जींद रियासत के भारत में विलय होने के करीब 70 साल बाद शाही संपत्ति को लेकर शाही परिवार और प्रशासन आमने सामने आ गए हैं। ताजा विवाद करीब साढ़े सात एकड़ पुराने किले की जमीन को लेकर उपजा है। शाही परिवार के लोगों ने कुछ दिन पहले यहां निर्माण कार्य शुरू किया था, लेकिन प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर रुकवा दिया। अब प्रशासन अपने स्तर पर किले के जमीन की निशानदेही कर रहा है। वहीं शाही परिवार के लोग अब इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना चुके हैं।
पुराना किला जींद रियासत की पहचान रहा है। आजादी से पहले तक किले के अंदर और आसपास ही शहर सिमटा हुआ था। जींद रियासत का शाही परिवार अब हांसी ब्रांच नहर के पास रह रहा है।
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शाही परिवार ने करीब साढ़े सात एकड़ पुराने किले की जमीन पर दावा ठोंकते हुए वहां निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं होने दिया। इसके बाद प्रशासनिक अमला हरकत में है और पुराने किले की जमीन के लिए योजना बना रहा है। आजादी के बाद संयुक्त पंजाब के समय पुराने किलो को जेल के तौर पर भी प्रयोग किया गया।
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आधी जमीन पर कब्जा
पुराने किले की आधी से अधिक जमीन पर कब्जा हो चुका है। सरकारी रिकार्ड के अनुसार किले की जमीन 61 कनाल है, जबकि फिलहाल यहां करीब साढ़े तीन एकड़ (28 कनाल) जमीन ही खाली है। ऐसे में किले की आधी से अधिक जमीन पर कब्जा हो चुका है। नगरपरिषद ने इस जमीन पर निशानदेही का काम पूरा कर इसका नक्शा भी बना लिया है।
24 साल पहले दी जमीन
किसी जमाने में रियासत की जमीन रही करीब 24 साल पहले प्रदेश सरकार ने अलग-अलग विभागों को दे दी थी। इसमें पुराना किला नगर सुधार मंडल को दिया गया। अब नगर सुधार मंडल का विलय सरकार ने नगरपरिषद में कर दिया है। रानीतालाब स्थित दूसरा किला हुडा को दिया गया, यहां हुडा ने दीवानखाना मार्केट बनाई है। इसके साथ लगती जमीन काफी पहले ही स्वामी शालिंग धर्माथ अस्पताल को दे दी थी और कुछ जमीन पर पालिका बाजार बनाया गया है। इस सारी जमीन पर राजा के समय रणबीर सिंह अस्पताल होता था।
पार्क बनाने की योजना
दरअसल पुराना किला शहर के बीचोंबीच और करीब 100 फुट की ऊंचाई पर है। ऐसे में यहां अन्य किसी निर्माण की संभावना प्रशासन को नजर नहीं आ रही, ऐसे में यहां पार्क बनाने की योजना तैयार की गई है। हालांकि इस योजना को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
सरकारी है जमीन
यह जमीन सरकारी है। पूरा क्षेत्र सरकार के अधीन है। यहां प्रशासन ने निशानदेही करा दी है। जमीन शाही परिवार को देने का फैसला सरकार कर सकती है, प्रशासन नहीं।
रामफल कटारिया, तहसीलदार, जींद।
हमारी पुस्तैनी जमीन है
किले की जमीन हमारी पुस्तैनी जमीन है। इस पर शाही परिवार का हक बनता है। हमें प्रशासन ने वहां काम करने से रोक दिया, अब इसके कागज निकलवाए जा रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
रानी इंद्रजीत