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नर्सिंग कॉलेज को नहीं मिला अपना भवन, निर्माण के लिए आई दस करोड़ की ग्रांट लैप्स

Sat, 26 Dec 2020 11:38 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2020 11:38 PM IST
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Nursing college did not get its own building, grant laps of ten crore for construction
जींद। सफीदों के राजकीय कॉलेज में चल रहे नर्सिंग कॉलेज को में दो साल बाद भी अपना भवन नहीं मिला है। भवन निर्माण के लिए आए 10 करोड़ रुपये समय पर खर्च नहीं होने के कारण लैप्स हो गए। कॉलेज बनाने के लिए चार एकड़ भूमि खाली पड़ी है। अधिकारियों की ढिलाई के कारण छात्राओं को दो साल से न छात्रवृत्ति मिली है और न ही अन्य सुविधाएं।
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याद रहे कि 21 अक्तूबर 2018 को जींद में मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने सफीदों में नर्सिंग कॉलेज बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए दस करोड़ रुपये की राशि की भी घोषणा की थी। 15 नवंबर 2018 को सफीदों के राजकीय महिला कॉलेज में नर्सिंग कॉलेज के लिए कक्षाएं भी लगानी शुरू कर दी थी। कॉलेज में बीएससी की 60, जीएनएम की 60 और एएनएम की 60 सीटों पर ऑनलाइन दाखिला हुआ। 11 फरवरी 2019 को मुख्यमंत्री ने सफीदों पहुंचकर नर्सिंग कॉलेज का शिलान्यास किया था, लेकिन आज तक भवन बनाने के नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी जा सकती। अधिकारियों के आपसी तालमेल की कमी और राजनेताओं की कमजोरी पैरवी के कारण बिल्डिंग के लिए टेंडर तक नहीं हो पाए।
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मुख्यमंत्री के धरे रह गए अरमान
मुख्यमंत्री ने 11 फरवरी 2019 नर्सिंग कॉलेज का शिलान्यास करते हुए कहा था कि यह कॉलेज पूरे हरियाणा में एक मॉडल के रूप में विकसित होगा। इसी कॉलेज की तर्ज पर प्रदेश के अन्य जिलों में नर्सिंग कॉलेज स्थापित होंगे लेकिन पूरे प्रदेश के साथ-साथ देश में ऐसा नर्सिंग कॉलेज नहीं होगा। लेकिन मुख्यमंत्री के इन अरमानों पर पानी फिर गया।
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हॉस्टल का किराया और छात्रवृत्ति तक नहीं मिली
छात्राओं को फिलहाल पीडीएम कॉलेज में अस्थायी हॉस्टल अलॉट किया गया है। इस हॉस्टल का किराया और अन्य सुविधाओं का खर्च सरकार को देना था, लेकिन आज तक सरकार की तरफ से कोई पैसा नहीं भेजा गया। छात्राओं को खुद 900 रुपये प्रतिमाह किराया अपनी जेब से देना पड़ रहा है। इसके अलावा छात्राओं को मिलने वाली छात्रवृत्ति भी नहीं मिली है।
तीन दिन बाद होनी है परीक्षाएं
छात्राओं की पूरे वर्ष कक्षाएं नहीं लगी। अब 29 दिसंबर से एएनएम, जीएनएम व बीएससी की परीक्षाएं होनी हैं। नर्सिंग छात्राओं को सरकार के नियम अनुसार तीन महीने की कक्षाओं के बाद मेडिकल ट्रेनिंग के लिए भेजना होता है लेकिन आज तक न तो कक्षाएं लगी और न ही ट्रेनिंग के लिए छात्राओं को कहीं भेजा गया।

चंडीगढ़ में बैठे एक बड़े अधिकारी के कारण नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। अधिकारी सफीदों में नर्सिंग कॉलेज नहीं खुलवाना चाहता है। इस कारण कॉलेज से संबंधित सभी प्रकार की फाइल अटकी पड़ी है। वह नर्सिंग कॉलेज के मामले में 100 बार चंडीगढ़ के चक्कर काट चुके हैं।
- टीसी गर्ग, आईपी कन्या सोसायटी। (नर्सिंग कॉलेज के लिए बनाई सोसायटी के मुख्य सदस्य)
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