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अब फिंगर प्रिंट के आधार पर ही बनेंगे गोल्डन कार्ड
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आयुष्मान योजना के तहत अब लाभार्थियों को पूरी जांच के बाद ही बॉयोमीट्रिक कार्ड जारी किए जाएंगे। इससे फर्जी लोगों पर रोक लगेगी और जरूरतमंद लोग ही योजना का लाभ उठा सकेंगे।
सितंबर 2018 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई भारत आयुष्मान योजना के तहत जिले में दो लाख 75 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने थे। इस कार्ड की मदद से जरूरतमंद व्यक्ति योजना के तहत पैनल पर लिए गए अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक बीमारी का इलाज मुफ्त करवा सकता है। ऐेसे में कुछ लोग फर्जी कार्ड बनवाकर योजना का लाभ उठाना चाहते थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी शिकायत मिली तो इस पर संज्ञान लेते हुए विभाग ने फिंगर प्रिंट के आधार पर गोल्डन कार्ड बनाने का फैसला लिया। शुरूआत में फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गेाल्डन कार्ड बनाए जाते थे। इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता था और लोगों को कागजी कार्रवाई में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता था। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा लोगों की समस्या को दूर करने के लिए व कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना के तहत जोड़ने के लिए फिंगर प्रिंट के आधार पर गोल्डन कार्ड बनाना बंद कर दिया था। इस दौरान कार्ड बनाने में तेजी जरूर लाई, लेकिन कुछ शरारती तत्व नकली दस्तावेजों की सहायता से कार्ड बनवाने की कोशिश मेें थे। इसके चलते जरूरतमंद लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायत दी। लोगों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने फिर से फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अब तक 350 लोगों ने उठाया योजना का लाभ
शुरूआत में इस योजना के तहत केवल नागरिक अस्पताल जींद में ही इलाज होता था। इसमें अच्छी सुविधाओं व डॉक्टरों की कमी के चलते प्राइवेट अस्पतालों को भी जोड़ा जाना शुरू किया गया। अब इस योजना के तहत पांच प्राइवेट अस्पताल व नौ सरकारी अस्पताल पैनल के तहत जोड़े जा चुके हैं। वहीं 350 लोगों ने इलाज करवाकर योजना के तहत स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया।
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फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। इससे फर्जी लोगों पर रोक लगेगी और जरूरतमंद लोगों को इसका फायदा मिलेगा। पहले फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गोल्डन कार्ड बनाए जाते थे, लेकिन इसे बंद कर दिया गया था। इस दौरान लोग फर्जी कागजात लेकर गोल्डन कार्ड बनाने की कोशिश कर रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए अब फिर से फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे।
-विवेक कुमार, मैनेजर आयुष्मान भारत योजना जींद।
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सितंबर 2018 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई भारत आयुष्मान योजना के तहत जिले में दो लाख 75 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए जाने थे। इस कार्ड की मदद से जरूरतमंद व्यक्ति योजना के तहत पैनल पर लिए गए अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक बीमारी का इलाज मुफ्त करवा सकता है। ऐेसे में कुछ लोग फर्जी कार्ड बनवाकर योजना का लाभ उठाना चाहते थे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इसकी शिकायत मिली तो इस पर संज्ञान लेते हुए विभाग ने फिंगर प्रिंट के आधार पर गोल्डन कार्ड बनाने का फैसला लिया। शुरूआत में फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गेाल्डन कार्ड बनाए जाते थे। इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता था और लोगों को कागजी कार्रवाई में ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता था। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा लोगों की समस्या को दूर करने के लिए व कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस योजना के तहत जोड़ने के लिए फिंगर प्रिंट के आधार पर गोल्डन कार्ड बनाना बंद कर दिया था। इस दौरान कार्ड बनाने में तेजी जरूर लाई, लेकिन कुछ शरारती तत्व नकली दस्तावेजों की सहायता से कार्ड बनवाने की कोशिश मेें थे। इसके चलते जरूरतमंद लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को शिकायत दी। लोगों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने फिर से फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गोल्डन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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अब तक 350 लोगों ने उठाया योजना का लाभ
शुरूआत में इस योजना के तहत केवल नागरिक अस्पताल जींद में ही इलाज होता था। इसमें अच्छी सुविधाओं व डॉक्टरों की कमी के चलते प्राइवेट अस्पतालों को भी जोड़ा जाना शुरू किया गया। अब इस योजना के तहत पांच प्राइवेट अस्पताल व नौ सरकारी अस्पताल पैनल के तहत जोड़े जा चुके हैं। वहीं 350 लोगों ने इलाज करवाकर योजना के तहत स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया।
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फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे। इससे फर्जी लोगों पर रोक लगेगी और जरूरतमंद लोगों को इसका फायदा मिलेगा। पहले फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गोल्डन कार्ड बनाए जाते थे, लेकिन इसे बंद कर दिया गया था। इस दौरान लोग फर्जी कागजात लेकर गोल्डन कार्ड बनाने की कोशिश कर रहे थे। इस पर रोक लगाने के लिए अब फिर से फिंगर प्रिंट के आधार पर ही गोल्डन कार्ड बनाए जाएंगे।
-विवेक कुमार, मैनेजर आयुष्मान भारत योजना जींद।