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खाली सीटों का ब्योरा नहीं देने पर 228 स्कूलों को नोटिस
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Fri, 14 Apr 2017 12:16 AM IST
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नियम 134-ए के तहत स्कूलों में गरीब विद्यार्थियों को दाखिले के लिए निजी स्कूलों द्वारा विभाग को रिपोर्ट नहीं देने पर जिले के 228 स्कूल को शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी किया है। विभाग ने स्कूलों को जारी नोटिस में कहा कि गया कि बहुत से स्कूलों ने सीटों की रिपोर्ट तो दे दी है, लेकिन वह सही नहीं दी है। विद्यार्थियों की संख्या से हिसाब से नियम 134-ए के तहत ज्यादा सीटें बनती हैं, लेकिन निजी स्कूलों ने विभाग में गलत सूचना देकर गुमराह करने का प्रयास किया है। इसलिए इन सभी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग की ओर से जारी नोटिस में शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों के नाम भी शामिल हैं।
हालांकि, अधिकतर नोटिस ग्रामीण क्षेत्रों में खुले स्कूलों को जारी हुए हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार, जिले में लगभग 750 निजी स्कूल हैं और प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या भी ठीकठाक है। विभाग ने सभी प्राइवेट स्कूलों को पहले नोटिस जारी करके आदेश दिए थे कि उनकी स्कूल में कितने विद्यार्थी हैं, इनकी सही रिपोर्ट खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा कराई जाए। इसके अलावा स्कूल में पढ़ने वाले हर विद्यार्थी का शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल एमआईएस पर दर्ज किया जाए, क्योंकि विभाग के पास जमा विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से नियम 134-ए के तहत दस प्रतिशत गरीब परिवार के विद्यार्थियों को दाखिला देना है। आदेश के बावजूद जिले के 228 स्कूलों ने रिपोर्ट खंड शिक्षा कार्यालय में दर्ज नहीं कराई। कुछ स्कूलों ने रिपोर्ट तो दर्ज करवाई, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या सही नहीं दर्शाई है। इससे विभाग ने अब इन सभी स्कूलों को नोटिस जारी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
विभाग की तरफ से नोटिस जारी करने की फिलहाल उनको जानकारी नहीं है। वीरवार को अवकाश होने के कारण फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है। अगर विभाग की तरफ से यह नोटिस जारी किया गया है तो उसे जल्द ही अमल में लाया जाएगा।
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- वंदना गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी, जींद
सीएम को सौंपा ज्ञापन
दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन की जिला प्रधान सुमन श्योराण ने वीरवार को जाट धर्मशाला में सीएम मनोहर लाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें गरीब बच्चों को नियम 134-ए में हो रही परेशानियों से अवगत कराया गया। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि जो बच्चे पूर्व में जिस स्कूल में पढ़ते हैं, उनको नियम 134-ए के तहत वहीं पर दाखिला दिलाया जाए। आम बच्चा 33 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल में प्रवेश ले सकता है तो नियम 134-ए के विद्यार्थियों को 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की शर्त बेमानी है। जो निजी स्कूल रिक्त सीट का ब्योरा नहीं दे रहे हैं, वहां बच्चों के हिसाब से दस प्रतिशत सीट रिक्त मानी जाएं।
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हालांकि, अधिकतर नोटिस ग्रामीण क्षेत्रों में खुले स्कूलों को जारी हुए हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार, जिले में लगभग 750 निजी स्कूल हैं और प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या भी ठीकठाक है। विभाग ने सभी प्राइवेट स्कूलों को पहले नोटिस जारी करके आदेश दिए थे कि उनकी स्कूल में कितने विद्यार्थी हैं, इनकी सही रिपोर्ट खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जमा कराई जाए। इसके अलावा स्कूल में पढ़ने वाले हर विद्यार्थी का शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल एमआईएस पर दर्ज किया जाए, क्योंकि विभाग के पास जमा विद्यार्थियों की संख्या के हिसाब से नियम 134-ए के तहत दस प्रतिशत गरीब परिवार के विद्यार्थियों को दाखिला देना है। आदेश के बावजूद जिले के 228 स्कूलों ने रिपोर्ट खंड शिक्षा कार्यालय में दर्ज नहीं कराई। कुछ स्कूलों ने रिपोर्ट तो दर्ज करवाई, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या सही नहीं दर्शाई है। इससे विभाग ने अब इन सभी स्कूलों को नोटिस जारी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
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विभाग की तरफ से नोटिस जारी करने की फिलहाल उनको जानकारी नहीं है। वीरवार को अवकाश होने के कारण फिलहाल इसकी जानकारी नहीं है। अगर विभाग की तरफ से यह नोटिस जारी किया गया है तो उसे जल्द ही अमल में लाया जाएगा।
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- वंदना गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी, जींद
सीएम को सौंपा ज्ञापन
दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन की जिला प्रधान सुमन श्योराण ने वीरवार को जाट धर्मशाला में सीएम मनोहर लाल को ज्ञापन सौंपा। इसमें गरीब बच्चों को नियम 134-ए में हो रही परेशानियों से अवगत कराया गया। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि जो बच्चे पूर्व में जिस स्कूल में पढ़ते हैं, उनको नियम 134-ए के तहत वहीं पर दाखिला दिलाया जाए। आम बच्चा 33 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल में प्रवेश ले सकता है तो नियम 134-ए के विद्यार्थियों को 55 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की शर्त बेमानी है। जो निजी स्कूल रिक्त सीट का ब्योरा नहीं दे रहे हैं, वहां बच्चों के हिसाब से दस प्रतिशत सीट रिक्त मानी जाएं।