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उत्तर-पश्चिमी हवा से तापमान में आएगी गिरावट

Mon, 19 Dec 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद Updated Mon, 19 Dec 2016 12:32 AM IST
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North-western wind will fall in temperature, agriculture, jind news
दिल्ली-कालका शताब्दी चालीस मिनट लेट
आगामी कुछ दिनों तक उत्तरी-पश्चिमी हवा चलने के कारण तापमान में गिरावट आएगी। उत्तरी-पश्चिमी हवा के प्रभाव के कारण अभी आगामी कुछ दिनों तक बारिश की उम्मीद नहीं है। इसलिए किसानों को गेहूं व सरसों की फसल की तरफ विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जिन किसानों ने अभी तक गेहूं की बिजाई नहीं की है, वे गेहूं की पछेती किस्मों की बिजाई कर सकते हैं। हालांकि जिले में ज्यादातर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई का काम पूरा हो चुका है। जिले में दो लाख 15 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई होती है। इस समय जिले में महज 10 हजार हेक्टेयर में बिजाई बाकी है।
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गेहूं की इन पछेती किस्मों की कर सकते हैं बिजाई
जिन किसानों ने अभी तक गेहूं की बिजाई नहीं की है, वे किसान गेहूं की पछेती किस्मों की बिजाई कर सकते हैं। इन किस्मों में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की पीबीडब्ल्यू 373, 590 व 550 है। दिल्ली पूसा की एचडी 2894 व 2851, करनाल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की डीबीडब्ल्यू 16 तथा हिसार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी की डब्ल्यूएच 1024 किस्म की बिजाई कर सकते हैं। गेहूं की बिजाई करते समय किसान 50 किलो डीएपी तथा 50 किलो यूरिया खाद डालें। वहीं, 25 प्रतिशत बीज की मात्रा में बढ़ोतरी करें। एक एकड़ में 40 किलो की बजाय अब 55 से 60 किलो बीज डालें, ताकि फसल का फुटाव सही हो सके। 
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इस तरह करें फसल की देखभाल
इस समय किसानों को गेहूं तथा सरसों की फसल की विशेष देखभाल की जरूरत है। धान वाले क्षेत्र में किसान 25 से 30 दिन बाद पहला पानी लगाएं। वहीं बाजरा व कपास वाले क्षेत्र में 20 से 25 दिन बाद पहला पानी लगाएं। जिस क्षेत्र की मिट्टी भारी (डाकर) है, उस क्षेत्र में पहला पानी लगाने से पहले 20 किलो यूरिया डालें और जिस क्षेत्र की मिट्टी रेतिली है, वहां पहले पानी के चार-पांच दिन बाद 20 किलो यूरिया फसल को दें। यदि हो सके तो पहला पानी लगाने से पहले ढाई किलो यूरिया, ढाई किलो डीएपी व आधा किलो जिंक (21 प्रतिशत वाली) का 100 लीटर पानी में घोल तैयार कर एक एकड़ में छिड़काव करें, ताकि फसल को पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मिल सकें। 
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इस तरह करें खरपतवार से फसल का बचाव
जिला कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि गेहूं की बिजाई के 35 से 40 दिन बाद गेहूं की फसल में खरपतवार के बढ़ने की संभावना काफी ज्यादा हो जाती है। इन दिनों मौसम खरपतवार के अनुकूल होता है। इसलिए गेहूं की फसल को खरपतवार से बचाने के लिए किसान केवल विभाग द्वारा सिफारिश वाले खरपतवार नाशी का प्रयोग करें। वहीं खरपतवार नाशी का प्रयोग करते समय फ्लैटफेन या कट नोजल का प्रयोग करें। पॉवर स्प्रे की बजाए हाथ वाली टंकी से ही स्प्रे करें।


अभी तीन-चार दिन उत्तरी-पश्चिमी हवा चलेगी और तापमान में गिरावट आएगी। अभी बारिश की कोई संभावना नहीं है। इसलिए किसानों को गेहूं की फसल की देखभाल की विशेष जरूरत है। जिन किसानों की फसल की बिजाई को 20-22 दिन का समय हो गया है, वह किसान फसल में पानी लगा दें। ताकि फसल पर मौसम की वजह से किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े। तीन-चार दिन बाद मौसम में परिवर्तन की संभावना है।
डॉ. एमएल खिचड़, मौसम विशेषज्ञ, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार
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