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वैध कॉलोनियों से मूलभूल सुविधाएं गायब

Thu, 21 Jul 2016 12:01 AM IST
jin
jin Updated Thu, 21 Jul 2016 12:01 AM IST
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no fundamental facilities jind
ओमनगर की कच्ची गली। - फोटो : bureau
बेहतर जीवनशैली और सुविधाओं के लिए गांवों से शहरों की बाहरी कॉलोनियों में बसे लोगों को वर्षों बाद भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। शहर के चारों ओर बसी 61 कॉलोनियों को नियमित हुए दो साल बीत जाने के बाद भी लोग पेयजल, सीवरेज और बिजली की व्यवस्था से महरूम हैं। प्रदेश सरकार ने 15 जनवरी 2014 को शहर की 61 कॉलोनियों को अवैध से वैध घोषित कर दिया था। इसके बाद लोगों को यहां जीवन स्तर सुधरने की उम्मीद थी, लेकिन दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उम्मीद विकास की हकीकत में नहीं बदल सकी हैं। ऐसे में इन कॉलोनियों में रहने वाले करीब एक लाख लोगों को नारकीय जीवन जीना पड़ रहा है।
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ये कॉलोनियां हुईं वैध
15 जनवरी 2014 को प्रदेश सरकार ने शहर की अजमेर बस्ती, आश्रम बस्ती, बसंत बिहार, भगत सिंह कॉलोनी, भगवान नगर, भटनागर कॉलोनी, भूपेंद्र नगर, भूपेंद्र नगर एक्सटेंशन, बूढा बाबा बस्ती, चाबरी कॉलोनी, चंद्रलोक कॉलोनी, चंद्रलोक कॉलोनी-दो, दया बस्ती, दुर्गा कॉलोनी, एकता नगर, कोर्ट के पीछे एम्पलाइज कॉलोनी, गोहाना रोड पर एम्पलाइज कॉलोनी, गीता कॉलोनी, गुप्ता कॉलोनी अमरहेड़ी रोड, हनुमान नगर, हरि नगर, हरिजन कॉलोनी, जैन नगर एक्टेंशन, कंबोज नगर, खेम नगर एक्सटेंशन, कृष्णा कॉलोनी, मॉडल टाऊन, नेताजी कॉलोनी, न्यू कृष्णा कॉलोनी रोहतक रोड, ओम नगर, पंचपीर कॉलोनी, पटेल नगर एक्सटेंशन, प्रेम नगर कैथल रोड, रघु नगर, रूप नगर, सैनीपुर कॉलोनी, स्कूल बस्ती, शर्मा नगर, शीतपुरी कॉलोनी, शिव कॉलोनी, शीतलपुरी कॉलोनी नरवाना रोड, विजय नगर, विजय नगर एक्सटेंशन, विश्वकर्मा कॉलोनी आरा रोड, विश्वकर्मा कॉलोनी रोहतक रोड शामिल हैं।
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30 साल से रह रहे हैं लोग
इनमें से कई कॉलोनियों में तो पिछले 30 साल से लोग रह रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली है। लोगों का कहना है कि पहले प्रशासन अवैध कॉलोनी कहकर कोई सुविधा नहीं दे रहा था, लेकिन अब कॉलोनी वैध होने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
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दूर-दूर से आ रही है बिजली
अवैध रहते ही हालांकि इन कॉलोनियों में बिजली निगम ने बिजली मीटर को लगा दिए, लेकिन बिजली के खंभों का आज भी इंतजार है। अब लोग दूर-दूर से लकड़ियों की बलियों के सहारे बिजली की तारें लाई गई हैं।

सबमर्सिबल का सहारा
कॉलोनी में पेयजल से लेकर बिजली तक की समस्या है। न सीवरेज लाइन है और न ही पक्की गलियां हैं। ऐसे में बारिश होने पर लोगों को आने-जाने में भी दिक्कत होती है। कुछ प्रभावशाली लोगों की गलियां ही पक्की हो पाई हैं।
- विजय, विश्वकर्मा कॉलोनी


नारकीय जीवन
प्रशासन की अनदेखी के चलते जीवन नारकीय हो गया है। कॉलोनी में कोई भी मूलभूत सुविधा नहीं है। ऐसे में लोगों को काफी परेशानी होती है। सीवरेज लाइन नहीं होने से बारिश के मौसम में काफी दिक्कत होती।
- विनोद सैनी, शीतलपुरी कॉलोनी

मिट्टी में दफन हैं करोड़ों रुपये
न्यू कृष्णा कॉलोनी में प्रशासन द्वारा सीवरेज लाइन डाली गई है, लेकिन दो साल से यह चालू नहीं हो पा रही है। इससे करोड़ों रुपये मिट्टी में दफन हैं। वहीं पेयजल की लाइन अभी तक नहीं डली है। कॉलोनी में बिजली के खंभे तो लगा दिए हैं, लेकिन इन पर तार नहीं डाली गई हैं। गलियां कच्ची हैं। तुरंत कॉलोनी की स्थिति सुधारने की जरूरत है।
- रमेश शर्मा, न्यू कृष्णा कॉलोनी

बनाई है योजना
नियमित हुई कॉलोनियों में विकास की योजना बनाई गई है। इस पर काम शुरू करने के लिए बजट का इंतजार है। फिर भी कॉलोनियों से जलभराव जैसी समस्या से निजात दिलवाने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने काम शुरू कर दिया है। पेयजल की लाइन के लिए दर्जन भर से अधिक कॉलोनियों का बजट आ चुका है। इन पर काम शुरू किया जाएगा।

- जगदेव मोर, एसडीओ जन स्वास्थ्य विभाग

शहर की नई वैध कॉलोनियों के विकास का जिम्मा नगर परिषद का होता है। नगर परिषद से यदि इन कॉलोनियों में बिजली सप्लाई का पत्र आएगा तो इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
- दलजीत सिंह, एसई बिजली निगम


 
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