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उद्घाटन के 27 दिन बाद भी फ्लोराइड लैब की सुविधा नहीं
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31 मई को लैब का उद्घाटन करते एसीएस राजीव अरोड़ा का फाइल फोटो। संवाद।
- फोटो : Jind
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जींद। नागरिक अस्पताल में उद्घाटन के 27 दिन बाद भी फ्लोराइड लैब शुरू नहीं हो पाई है। स्वास्थ्य विभाग ने लैब के बिना शुरू करवाए ही इसका उद्घाटन करवा दिया। अभी तक इस लैब के सभी उपकरण नहीं मिल पाए हैं। पिछले बजट में कुछ उपकरण मिले थे, लेकिन इस बजट में जो उपकरण मिलने थे, वह दस से 15 दिन में मिल पाएंगे, इसके बाद ही यह लैब शुरू हो पाएगी। चार लाख सात हजार रुपये से स्वास्थ्य विभाग ने लैब के उपकरण खरीदे थे। कुछ और उपकरण अभी बाकी हैं। इनके मिलने के बाद ही लैब शुरू हो पाएगी।
जिले के कई गांवों में पीने का स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है। काफी गांवों में लोग भूमिगत पानी पीते हैं। इस पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। इसके अलावा शहर में भी जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेलों के माध्यम से भूमिगत पानी की सप्लाई करता है। आज तक इस पानी की जांच नहीं हुई है। इसके कारण यह पता नहीं लगाया जा सका है कि इसमें फ्लोराइड की मात्रा कितनी है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग ने नागरिक अस्पताल में फ्लोराइड की जांच करने के लिए लैब स्थापित करने की ओर कदम बढ़ाया है। 31 मई को स्वास्थ्य विभाग के एसीएस राजीव अरोड़ जब नागरिक अस्पताल में दौरे के लिए पहुंचे तो स्वास्थ्य विभाग ने लैब शुरू होने से पहले ही इसका उद्घाटन करवा दिया, लेकिन आज तक यह लैब शुरू नहीं हो पाई है।
पानी में फ्लोराइड अधिक होने के ये हैं नुकसान
यदि पीने के पानी में फ्लोराइड अधिक है तो शरीर को काफी नुकसान होता है। अधिक फ्लोराइड गर्दन, पीठ, कंधे, घुटनों के जोड़ों और हड्डियों को प्रभावित करता है। कैंसर, स्मरण शक्ति कमजोर होना, गुर्दे की बीमारी व बांझपन जैसी समस्या भी इससे हो सकती है। विदेशों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर तक सामान्य मानी जाती है, जबकि भारत में यह दर 1.0 मिलीग्राम निर्धारित है।
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फ्लोराइड लैब दस से 15 दिन में शुरू हो जाएगी। कुछ सामान अभी बाकी है, जो दो-चार दिन में मिल जाएगा। उसके बाद इंजीनियर आकर लैब के सभी उपकरणों को सैट करके इसका डेमो देगा। इसके अलावा नागरिक अस्पताल का एक दल कुछ जिलों में चल रही फ्लोराइड लैब में जाकर कार्य को देखेगा। अगले सप्ताह कुछ चिकित्सकों की लैब के लिए ट्रेनिंग होगी।
--डॉ. रमेश पांचाल, डिप्टी सिविल सर्जन।
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जिले के कई गांवों में पीने का स्वच्छ पेयजल उपलब्ध नहीं है। काफी गांवों में लोग भूमिगत पानी पीते हैं। इस पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक है। इसके अलावा शहर में भी जनस्वास्थ्य विभाग ट्यूबवेलों के माध्यम से भूमिगत पानी की सप्लाई करता है। आज तक इस पानी की जांच नहीं हुई है। इसके कारण यह पता नहीं लगाया जा सका है कि इसमें फ्लोराइड की मात्रा कितनी है। इसी कारण स्वास्थ्य विभाग ने नागरिक अस्पताल में फ्लोराइड की जांच करने के लिए लैब स्थापित करने की ओर कदम बढ़ाया है। 31 मई को स्वास्थ्य विभाग के एसीएस राजीव अरोड़ जब नागरिक अस्पताल में दौरे के लिए पहुंचे तो स्वास्थ्य विभाग ने लैब शुरू होने से पहले ही इसका उद्घाटन करवा दिया, लेकिन आज तक यह लैब शुरू नहीं हो पाई है।
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पानी में फ्लोराइड अधिक होने के ये हैं नुकसान
यदि पीने के पानी में फ्लोराइड अधिक है तो शरीर को काफी नुकसान होता है। अधिक फ्लोराइड गर्दन, पीठ, कंधे, घुटनों के जोड़ों और हड्डियों को प्रभावित करता है। कैंसर, स्मरण शक्ति कमजोर होना, गुर्दे की बीमारी व बांझपन जैसी समस्या भी इससे हो सकती है। विदेशों में पानी में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर तक सामान्य मानी जाती है, जबकि भारत में यह दर 1.0 मिलीग्राम निर्धारित है।
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फ्लोराइड लैब दस से 15 दिन में शुरू हो जाएगी। कुछ सामान अभी बाकी है, जो दो-चार दिन में मिल जाएगा। उसके बाद इंजीनियर आकर लैब के सभी उपकरणों को सैट करके इसका डेमो देगा। इसके अलावा नागरिक अस्पताल का एक दल कुछ जिलों में चल रही फ्लोराइड लैब में जाकर कार्य को देखेगा। अगले सप्ताह कुछ चिकित्सकों की लैब के लिए ट्रेनिंग होगी।
--डॉ. रमेश पांचाल, डिप्टी सिविल सर्जन।