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जिले में फूड सेफ्टी एक्ट का नहीं हो रहा पालन
jind
Updated Thu, 22 Sep 2016 12:48 AM IST
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शहर के गोहाना रोड पर स्थित करियाणा की दुकानें।
- फोटो : bureau
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जिले में खाद्य वस्तुओं की बिक्री करने वाले दुकानदार फूड सेफ्टी एक्ट के प्रति जागरूक नहीं हैं। इसके चलते जिले में फूड सेफ्टी एक्ट की पालना नहीं हो रही है। यह इसी का परिणाम है कि जिले में लगभग पांच हजार के करीब खाद्य वस्तुओं के दुकानदारों में से महज 250 दुकानदारों ने ही भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का रजिस्ट्रेशन करवा रखा है। इससे स्वास्थ्य विभाग मिलावट खोरों पर नकेल नहीं लगा पा रहा है। जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के ही खाद्य वस्तुओं की ज्यादातर दुकानें चल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार जो भी दुकानदार खाने-पीने की वस्तुओं की बिक्री करता है, उन सभी के लिए दुकान का रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। नियम के अनुसार रेहड़ी पर खाद्य वस्तुओं की बिक्री करने वाले रेहड़ी चालकों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जनवरी से जुलाई माह तक 48 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से सात सैंपल फेल पाए गए हैं। इसमें से पांच सैंपलों की अभी जांच चल रही है। इनमें से पांच दुकानदारों को एडीसी द्वारा जुर्माना भी किया जा चुका है।
कैसे लगे मिलाटवी सामान पर रोक
जिले में मिलावटखोरी नहीं रुकने का एक कारण यह भी है कि विभाग के पास मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए अधिकारी ही नहीं हैं। एक अधिकारी के कंधे पर दो-दो जिलों का भार है। जींद जिले के खाद्य नियंत्रक अधिकारी के पास जींद के अलावा करनाल जिले की जिम्मेदारी भी है। एक साथ दो-दो जिले का कार्यभार होने के कारण अधिकारी सही तरीके से अपना काम नहीं कर पाता है। दो-दो जिलों को संभालने के साथ-साथ खाद्य नियंत्रक अधिकारी को कोर्ट में चल रहे मुकदमों की सुनवाई के लिए भी जाना पड़ता है।
क्यों जरूरी है रजिस्ट्रेशन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) पर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। एफएसएसएआई पर रजिस्ट्रेशन करवाने का उद्देश्य यह है कि यहां पर रजिस्ट्रेशन होने से विभाग को इस बात की जानकारी मिल जाती है कि जिले में कहां-कहां और किन-किन दुकानों पर खाद्य वस्तुओं की बिक्री हो रही है। ताकि विभाग की टीम समय-समय पर जाकर इन दुकानों का निरीक्षण कर सकें और दुकानों में होने वाली मिलावटखोरी को रोक सके। रजिस्ट्रेशन नहीं होने से जिले में चल रही खाद्य वस्तुओं की दुकानों के बारे में विभाग को जानकारी नहीं मिल पाती है।
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रजिस्ट्रेशन करवाने की यह है प्रक्रिया
खाद्य वस्तुओं की बिक्री का काम करने वाला कोई भी दुकानदार एफएसएसएआई की साइट पर जाकर ऑन लाइन ए फार्म भरकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकता है। रजिस्ट्रेशन करवाने का वार्षिक शुल्क महज 100 रुपये है। 100 रुपये का यह शुल्क ई-चालान से बैंक में जमा होता है। सालाना 12 लाख रुपये तक की बिक्री करने वाले दुकानदार यहां अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। एक साल में 12 लाख से अधिक की बिक्री करने वाले दुकानदार को दुकान चलाने के लिए विभाग से लाइसेंस लेना होता है। इस केटेगरी में डिस्ट्रीब्यूटर, रिटेलर, सप्लायरों को शामिल किया गया है। इनको लाइसेंस के लिए प्रति वर्ष दो हजार रुपये की फीस देनी होती है। इसके अलावा प्रतिदिन एक मीट्रिक टन का उत्पादन करने वाले मैन्यूफैक्चरर को एक साल का तीन हजार रुपये, इससे अधिक उत्पादन करने वाले को प्रति वर्ष का पांच हजार रुपये प्रति वर्ष का शुल्क देना होता है। प्रति दिन दो मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन करने वाले मैन्यूफैक्चरर को सेंटर से लाइसेंस लेना होता है।
छह साल तक हो सकती है सजा
जांच के दौरान सैंपल के असुरक्षित पाए जाने पर छह माह से छह साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा किसी खाद्य वस्तु के खाने से मौत होने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। वहीं खाद्य पदार्थों के मानकों पर खरा नहीं पाए जाने पर एडीसी द्वारा पांच लाख रुपये और मिस ब्रांडेड मिलने पर दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
खाद्य वस्तुओं की बिक्री करने वाले दुकानदारों को अपना रजिस्ट्रेशन अवश्य करवाना चाहिए। दुकानदार के साथ-साथ रेहड़ी पर खाद्य वस्तुएं बेचने वाले रेहड़ी चालक के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। जो दुकानदार अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएगा उसको विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे। यदि नोटिस मिलने के बाद भी कोई दुकानदार अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाता तो उस दुकानदार का चालान किया जाएगा।
- ओम कुमार, खाद्य निरीक्षण अधिकारी
नागरिक अस्पताल, जींद
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कैसे लगे मिलाटवी सामान पर रोक
जिले में मिलावटखोरी नहीं रुकने का एक कारण यह भी है कि विभाग के पास मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए अधिकारी ही नहीं हैं। एक अधिकारी के कंधे पर दो-दो जिलों का भार है। जींद जिले के खाद्य नियंत्रक अधिकारी के पास जींद के अलावा करनाल जिले की जिम्मेदारी भी है। एक साथ दो-दो जिले का कार्यभार होने के कारण अधिकारी सही तरीके से अपना काम नहीं कर पाता है। दो-दो जिलों को संभालने के साथ-साथ खाद्य नियंत्रक अधिकारी को कोर्ट में चल रहे मुकदमों की सुनवाई के लिए भी जाना पड़ता है।
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क्यों जरूरी है रजिस्ट्रेशन
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) पर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। एफएसएसएआई पर रजिस्ट्रेशन करवाने का उद्देश्य यह है कि यहां पर रजिस्ट्रेशन होने से विभाग को इस बात की जानकारी मिल जाती है कि जिले में कहां-कहां और किन-किन दुकानों पर खाद्य वस्तुओं की बिक्री हो रही है। ताकि विभाग की टीम समय-समय पर जाकर इन दुकानों का निरीक्षण कर सकें और दुकानों में होने वाली मिलावटखोरी को रोक सके। रजिस्ट्रेशन नहीं होने से जिले में चल रही खाद्य वस्तुओं की दुकानों के बारे में विभाग को जानकारी नहीं मिल पाती है।
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रजिस्ट्रेशन करवाने की यह है प्रक्रिया
खाद्य वस्तुओं की बिक्री का काम करने वाला कोई भी दुकानदार एफएसएसएआई की साइट पर जाकर ऑन लाइन ए फार्म भरकर अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकता है। रजिस्ट्रेशन करवाने का वार्षिक शुल्क महज 100 रुपये है। 100 रुपये का यह शुल्क ई-चालान से बैंक में जमा होता है। सालाना 12 लाख रुपये तक की बिक्री करने वाले दुकानदार यहां अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। एक साल में 12 लाख से अधिक की बिक्री करने वाले दुकानदार को दुकान चलाने के लिए विभाग से लाइसेंस लेना होता है। इस केटेगरी में डिस्ट्रीब्यूटर, रिटेलर, सप्लायरों को शामिल किया गया है। इनको लाइसेंस के लिए प्रति वर्ष दो हजार रुपये की फीस देनी होती है। इसके अलावा प्रतिदिन एक मीट्रिक टन का उत्पादन करने वाले मैन्यूफैक्चरर को एक साल का तीन हजार रुपये, इससे अधिक उत्पादन करने वाले को प्रति वर्ष का पांच हजार रुपये प्रति वर्ष का शुल्क देना होता है। प्रति दिन दो मीट्रिक टन से अधिक का उत्पादन करने वाले मैन्यूफैक्चरर को सेंटर से लाइसेंस लेना होता है।
छह साल तक हो सकती है सजा
जांच के दौरान सैंपल के असुरक्षित पाए जाने पर छह माह से छह साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा किसी खाद्य वस्तु के खाने से मौत होने पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। वहीं खाद्य पदार्थों के मानकों पर खरा नहीं पाए जाने पर एडीसी द्वारा पांच लाख रुपये और मिस ब्रांडेड मिलने पर दो लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
खाद्य वस्तुओं की बिक्री करने वाले दुकानदारों को अपना रजिस्ट्रेशन अवश्य करवाना चाहिए। दुकानदार के साथ-साथ रेहड़ी पर खाद्य वस्तुएं बेचने वाले रेहड़ी चालक के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। जो दुकानदार अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएगा उसको विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे। यदि नोटिस मिलने के बाद भी कोई दुकानदार अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाता तो उस दुकानदार का चालान किया जाएगा।
- ओम कुमार, खाद्य निरीक्षण अधिकारी
नागरिक अस्पताल, जींद