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एनएचएम भर्ती का परिणाम जारी होने से पहले ही हो गई थी मेरिट लिस्ट व्हाट्सएप पर आउट
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नागरिक अस्पताल में एनएचएम की जिस भर्ती पर विवाद हुआ, उसकी मेरिट लिस्ट परिणाम जारी होने से पहले ही व्हाट्सएप पर आउट कर दी गई थी। तत्कालीन सिविल सर्जन ने एक विभागीय कमेटी को इसकी जांच सौंपी थी। जांच टीम ने इसमें कंप्यूटर सहायक गौरव सहगल, लेखा सहायक राजेश की संलिप्तता पाई थी। इसके बाद सिविल सर्जन ने आठ मई को डीआईजी कार्यालय को पत्र भेजकर दोनों के खिलाफ गोपनीय रिकॉर्ड की फोटो बनाकर वायरल करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी। पुलिस ने इस मामले की अब अपने स्तर पर जांच शुरू की है।
डीआईजी कार्यालय को आठ मई को लिखे पत्र में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाटान ने कहा था कि एनएचएम में कुछ पदों के लिए 17 मार्च को लिखित परीक्षा हुई थी। इस भर्ती का परिणाम जारी नहीं हुआ था, लेकिन मेरिट सूची परिणाम से पहले ही व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दी गई थी, जिसकी वजह से लिस्ट लीक हो गई। इसकी जांच के लिए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान, डॉ. अरुण कुमार की कमेटी गठित की थी। कमेटी ने जांच की तो सामने आया कि लेखा सहायक राजेश ने कंप्यूटर सहायक गौरव सहगल के निजी नंबर पर मेरिट लिस्ट को भेज दिया। इसके बाद गौरव सहगल ने इस लिस्ट को व्हाट्सएप के एक ग्रुप पर वायरल कर दिया। वायरल करने के कुछ देर बाद उसको वहां से हटा लिया गया। जांच कमेटी ने लेखा सहायक राजेश, कंप्यूटर सहायक गौरव सहगल के अलावा एनएचएम डीपीएम रेनू मिढ़ा के भी बयान दर्ज किए थे। कमेटी ने अपनी जांच में लिखा कि गौरव सहगल व राजेश की इस मामले में सीधी संलिप्तता है, जबकि डीपीएम की भूमिका पर संदेह है। रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन सिविल सर्जन ने उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की पुलिस को सिफारिश की थी।
180 लोग जुड़े हैं ग्रुप से
विभागीय जांच में सामने आया कि लेखा सहायक राजेश ने कंप्यूटर सहायक गौरव सहगल के नंबर पर लिस्ट डाली। इसके बाद गौरव सहगल ने इस लिस्ट को टीम एसकेएस ग्रुप पर डाल दिया। इस ग्रुप में 180 लोग जुड़े हुए हैं। बाद में इस लिस्ट को गौरव सहगल ने ग्रुप से डिलीट कर दिया।
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दिए थे जांच के आदेश
लिस्ट लीक होने के बाद इस भर्ती पर सवाल उठने शुरू हुए थे। लिस्ट देखने के बाद कुछ लोगों ने मेरिट लिस्ट में शामिल लोगों के चयन का दावा करने लगे थे। तत्कालीन सिविल सर्जन को जब पता चला कि परिणाम घोषित होने से पहले ही मेरिट लिस्ट में शामिल लोग दावे कर रहे हैं तो उन्हें शक हुआ और उन्होंने जांच के आदेश दिए थे।
रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा
पूरा मामला अभी ध्यान में नहीं है। मामले में जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसके बाद ही इसमें कुछ कहा जा सकता है।
अश्विन शैणवी, डीआईजी, जींद
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डीआईजी कार्यालय को आठ मई को लिखे पत्र में तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. जयभगवान जाटान ने कहा था कि एनएचएम में कुछ पदों के लिए 17 मार्च को लिखित परीक्षा हुई थी। इस भर्ती का परिणाम जारी नहीं हुआ था, लेकिन मेरिट सूची परिणाम से पहले ही व्हाट्सएप ग्रुप पर डाल दी गई थी, जिसकी वजह से लिस्ट लीक हो गई। इसकी जांच के लिए डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. जेके मान, डॉ. अरुण कुमार की कमेटी गठित की थी। कमेटी ने जांच की तो सामने आया कि लेखा सहायक राजेश ने कंप्यूटर सहायक गौरव सहगल के निजी नंबर पर मेरिट लिस्ट को भेज दिया। इसके बाद गौरव सहगल ने इस लिस्ट को व्हाट्सएप के एक ग्रुप पर वायरल कर दिया। वायरल करने के कुछ देर बाद उसको वहां से हटा लिया गया। जांच कमेटी ने लेखा सहायक राजेश, कंप्यूटर सहायक गौरव सहगल के अलावा एनएचएम डीपीएम रेनू मिढ़ा के भी बयान दर्ज किए थे। कमेटी ने अपनी जांच में लिखा कि गौरव सहगल व राजेश की इस मामले में सीधी संलिप्तता है, जबकि डीपीएम की भूमिका पर संदेह है। रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन सिविल सर्जन ने उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की पुलिस को सिफारिश की थी।
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180 लोग जुड़े हैं ग्रुप से
विभागीय जांच में सामने आया कि लेखा सहायक राजेश ने कंप्यूटर सहायक गौरव सहगल के नंबर पर लिस्ट डाली। इसके बाद गौरव सहगल ने इस लिस्ट को टीम एसकेएस ग्रुप पर डाल दिया। इस ग्रुप में 180 लोग जुड़े हुए हैं। बाद में इस लिस्ट को गौरव सहगल ने ग्रुप से डिलीट कर दिया।
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दिए थे जांच के आदेश
लिस्ट लीक होने के बाद इस भर्ती पर सवाल उठने शुरू हुए थे। लिस्ट देखने के बाद कुछ लोगों ने मेरिट लिस्ट में शामिल लोगों के चयन का दावा करने लगे थे। तत्कालीन सिविल सर्जन को जब पता चला कि परिणाम घोषित होने से पहले ही मेरिट लिस्ट में शामिल लोग दावे कर रहे हैं तो उन्हें शक हुआ और उन्होंने जांच के आदेश दिए थे।
रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा
पूरा मामला अभी ध्यान में नहीं है। मामले में जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसके बाद ही इसमें कुछ कहा जा सकता है।
अश्विन शैणवी, डीआईजी, जींद