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Jind News: घिमाना खेल नर्सरी में दौड़ रही खेल प्रतिभाओं की नई पौध
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06जेएनडी27: घिमाना गांव के स्कूल में खो-खो में पसीना बहाते खिलाड़ी। संवाद
जींद। कभी जिस गांव के बच्चों को खो-खो के खेल के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी उसी गांव के मैदान में अब रोजाना 52 बच्चों की रफ्तार और फुर्ती देखने को मिल रही है। पांच महीने पहले शुरू हुई खो-खो खेल नर्सरी ने घिमाना गांव के बच्चों के लिए खेल की नई राह खोल दी है।
शहीद आशीष कुमार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के मैदान में सुबह-शाम बच्चे पसीना बहाकर खेल की बारीकियां सीख रहे हैं। नौ से 13 वर्ष की उम्र के ये बच्चे अब केवल खेल सीख ही नहीं रहे बल्कि मैदान पर अपनी प्रतिभा की झलक भी दिखाने लगे हैं। खेल नर्सरी शुरू होने के बाद गांव में खो-खो को लेकर बच्चों का उत्साह लगातार बढ़ा है।
खेल नर्सरी मैदान पर खुद अपनी पहचान बना चुकी ममता तीन सीनियर स्टेट अवॉर्ड जीत चुकी हैं। इसके अलावा नॉर्थ जोन ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में उन्होंने तीन कांस्य पदक भी अपने नाम किए हैं। अब अपने इसी खेल अनुभव को वह ग्रामीण बच्चों की प्रतिभा निखारने में लगा रही हैं। उनका सपना है कि घिमाना जैसे ग्रामीण क्षेत्र से ऐसे खिलाड़ी तैयार हों जो आगे चलकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाएं और गांव का नाम रोशन करें।
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32 लड़के और 20 लड़कियां ले रहीं प्रशिक्षण
नर्सरी में इस समय 32 लड़के और 20 लड़कियां नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही हैं। बच्चों के लिए सुबह और शाम अभ्यास सत्र आयोजित किए जाते हैं। प्रतिदिन करीब पांच घंटे मैदान पर उन्हें खो-खो की तकनीक के साथ गति, फुर्ती, टीमवर्क और खेल अनुशासन का प्रशिक्षण दिया जाता है। शुरुआत में खेल से अनजान रहने वाले बच्चों में अब इतना उत्साह है कि वे नियमित रूप से मैदान पहुंच रहे हैं और अभ्यास के दौरान एक-दूसरे को कड़ी चुनौती भी दे रहे हैं।
गांव से निकल सकती हैं नई खेल प्रतिभाएं
नर्सरी शुरू होने से बच्चों को गांव में ही खेल का प्रशिक्षण मिलने लगा है। इससे अभिभावकों को भी बच्चों को खेलों से जोड़ने का अवसर मिला है। ममता का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें सही दिशा और नियमित प्रशिक्षण देने की है। लगातार अभ्यास से बच्चों की प्रतिभा को निखारकर उन्हें प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा। नर्सरी के माध्यम से गांव से खो-खो के अच्छे खिलाड़ी तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
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शहीद आशीष कुमार राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के मैदान में सुबह-शाम बच्चे पसीना बहाकर खेल की बारीकियां सीख रहे हैं। नौ से 13 वर्ष की उम्र के ये बच्चे अब केवल खेल सीख ही नहीं रहे बल्कि मैदान पर अपनी प्रतिभा की झलक भी दिखाने लगे हैं। खेल नर्सरी शुरू होने के बाद गांव में खो-खो को लेकर बच्चों का उत्साह लगातार बढ़ा है।
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खेल नर्सरी मैदान पर खुद अपनी पहचान बना चुकी ममता तीन सीनियर स्टेट अवॉर्ड जीत चुकी हैं। इसके अलावा नॉर्थ जोन ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में उन्होंने तीन कांस्य पदक भी अपने नाम किए हैं। अब अपने इसी खेल अनुभव को वह ग्रामीण बच्चों की प्रतिभा निखारने में लगा रही हैं। उनका सपना है कि घिमाना जैसे ग्रामीण क्षेत्र से ऐसे खिलाड़ी तैयार हों जो आगे चलकर जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाएं और गांव का नाम रोशन करें।
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32 लड़के और 20 लड़कियां ले रहीं प्रशिक्षण
नर्सरी में इस समय 32 लड़के और 20 लड़कियां नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही हैं। बच्चों के लिए सुबह और शाम अभ्यास सत्र आयोजित किए जाते हैं। प्रतिदिन करीब पांच घंटे मैदान पर उन्हें खो-खो की तकनीक के साथ गति, फुर्ती, टीमवर्क और खेल अनुशासन का प्रशिक्षण दिया जाता है। शुरुआत में खेल से अनजान रहने वाले बच्चों में अब इतना उत्साह है कि वे नियमित रूप से मैदान पहुंच रहे हैं और अभ्यास के दौरान एक-दूसरे को कड़ी चुनौती भी दे रहे हैं।
गांव से निकल सकती हैं नई खेल प्रतिभाएं
नर्सरी शुरू होने से बच्चों को गांव में ही खेल का प्रशिक्षण मिलने लगा है। इससे अभिभावकों को भी बच्चों को खेलों से जोड़ने का अवसर मिला है। ममता का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें सही दिशा और नियमित प्रशिक्षण देने की है। लगातार अभ्यास से बच्चों की प्रतिभा को निखारकर उन्हें प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा। नर्सरी के माध्यम से गांव से खो-खो के अच्छे खिलाड़ी तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

06जेएनडी27: घिमाना गांव के स्कूल में खो-खो में पसीना बहाते खिलाड़ी। संवाद