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Jind News: महर्षि दयानंद के आदर्शों से संभव है राष्ट्र निर्माण
Thu, 12 Feb 2026 11:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 12 Feb 2026 11:35 PM IST
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12जेएनडी31: कुलसचिव वक्ता काे महर्षि दयानंद की फोटो देते हए। स्रोत विवि
जींद। चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में वीरवार को आर्य समाज के संस्थापक और महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने नमन किया।
कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि उन्होंने वेदों की ओर लौटो का मंत्र देकर भारतीय समाज को अज्ञानता के अंधकार से बाहर निकाला। प्रो. सैनी ने कहा कि महर्षि दयानंद केवल एक धार्मिक सुधारक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए जाति प्रथा और अंधविश्वास जैसी कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने कहा कि महर्षि दयानंद का मानना था कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है जो समाज को कुरीतियों से मुक्त कर सकती है। उन्होंने युवाओं से महर्षि के साहस और सत्यनिष्ठा को आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित विचार गोष्ठी में वैदिक पुनर्जागरण और महर्षि के संघर्षपूर्ण जीवन पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में, उपस्थित सभी जनों ने महर्षि दयानंद के दिखाए मार्ग पर चलने और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। पूरा परिसर वैदिक मंत्रोच्चारण और सामाजिक चेतना के स्वरों से गुंजायमान रहा।
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कुलपति प्रो. राम पाल सैनी ने कहा कि उन्होंने वेदों की ओर लौटो का मंत्र देकर भारतीय समाज को अज्ञानता के अंधकार से बाहर निकाला। प्रो. सैनी ने कहा कि महर्षि दयानंद केवल एक धार्मिक सुधारक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक क्रांति के अग्रदूत थे। उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए जाति प्रथा और अंधविश्वास जैसी कुरीतियों पर कड़ा प्रहार किया। कुलसचिव डॉ. राजेश बंसल ने कहा कि महर्षि दयानंद का मानना था कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है जो समाज को कुरीतियों से मुक्त कर सकती है। उन्होंने युवाओं से महर्षि के साहस और सत्यनिष्ठा को आत्मसात करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान आयोजित विचार गोष्ठी में वैदिक पुनर्जागरण और महर्षि के संघर्षपूर्ण जीवन पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में, उपस्थित सभी जनों ने महर्षि दयानंद के दिखाए मार्ग पर चलने और नैतिक मूल्यों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। पूरा परिसर वैदिक मंत्रोच्चारण और सामाजिक चेतना के स्वरों से गुंजायमान रहा।
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