{"_id":"5e9dcee48ebc3ed5ab1f1da1","slug":"muslim-family-has-been-following-hindu-tradition-for-twenty-years-jind-news-rtk551658163","type":"story","status":"publish","title_hn":"बीस साल से हिंदू रीति रिवाज को अपना रहा है मुस्लिम परिवार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बीस साल से हिंदू रीति रिवाज को अपना रहा है मुस्लिम परिवार
विज्ञापन
निक्काराम के निधन के बाद घर पर शोक जताते परिवार के सदस्य।
- फोटो : Jind
पिछले 20 साल से हिंदू रीति रिवाजों का पालन कर रहे दनौदा गांव के छह परिवारों ने अब हिंदू धर्म में आस्था जताई है। दो दिन पहले परिवार में एक बुजुर्ग निक्काराम का निधन होने पर उसके शव को दफनाने के बजाय दाह संस्कार किया था। इन्हीं परिवार से रमेश कुमार ने बताया कि उन्होंने कभी भी कोई धार्मिक कार्य मुस्लिम रीति रिवाज से नहीं किया है। इतना ही नहीं परिवार में उनका एक भाई प्रवीण आरएसएस से संबंध रखता है और कावड़ भी लाता है। अब गांव के छह परिवारों के 35 सदस्यों ने अपनी इच्छा से पूर्ण रूप हिंदू धर्म में आस्था जताई है। यह लोग इसे अपनी घर वापसी बता रहे हैं।
रमेश कुमार के अनुसार वे डूम जाति से संबंध रखते हैं और उनके परिवारों में पिछले 20 साल से सभी हिंदू त्योहार मा रहे हैं। रमेश कुमार के अनुसार औरंगजेब के समय उनके पूर्वज हिंदू थे और मुस्लिम धर्म अपनाया था।
छह महीने पहले करवाया था हवन
रमेश कुमार के अनुसार उन्होंने छह महीने पहले मकान बनाया था। तब भी घर में हवन करवाया था। अब कोरोना के चलते गांव में लगने वाले ठीकरी पहरे व नाके पर सरपंच को बोलकर खुद हवन करवाया। इतना ही नहीं गांव में होने वाले सभी धार्मिक कार्यक्रमों में वे शिरकत करते हैं। रमेश कुमार के अनुसार एक साथ डूम जाति के छह परिवार रहते हैं। इनमें से चार के यहां मंदिर बने हुए हैं। इन परिवारों में 35 सदस्य हैं। सभी के नाम हिंदू धर्म के हैं।
विज्ञापन
जमात में गए लोगों से हुई निराशा
रमेश ने कहा कि आज पूरे विश्व के साथ साथ देश भी कोरोना वायरस से जूझ रहा है। बचाव के लिए लॉक डाउन लगाया गया है तो कुछ लोगों देश के मुखिया के आदेशों को दरकिनार करके जमात में बैठे और हजारों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। ऐसा करना मानव धर्म के खिलाफ है।
सभी सदस्यों ने मर्जी से लिया फैसला
जब इस संबंध में गांव के सरपंच पुरुषोत्तम शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मनीर डूम के परिवार के सदस्यों ने बिना किसी दबाव और अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपना सकता है। इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं, बल्कि समस्त गांव इनके इस फैसले का सम्मान करता है।
विज्ञापन
रमेश कुमार के अनुसार वे डूम जाति से संबंध रखते हैं और उनके परिवारों में पिछले 20 साल से सभी हिंदू त्योहार मा रहे हैं। रमेश कुमार के अनुसार औरंगजेब के समय उनके पूर्वज हिंदू थे और मुस्लिम धर्म अपनाया था।
विज्ञापन
छह महीने पहले करवाया था हवन
रमेश कुमार के अनुसार उन्होंने छह महीने पहले मकान बनाया था। तब भी घर में हवन करवाया था। अब कोरोना के चलते गांव में लगने वाले ठीकरी पहरे व नाके पर सरपंच को बोलकर खुद हवन करवाया। इतना ही नहीं गांव में होने वाले सभी धार्मिक कार्यक्रमों में वे शिरकत करते हैं। रमेश कुमार के अनुसार एक साथ डूम जाति के छह परिवार रहते हैं। इनमें से चार के यहां मंदिर बने हुए हैं। इन परिवारों में 35 सदस्य हैं। सभी के नाम हिंदू धर्म के हैं।
विज्ञापन
जमात में गए लोगों से हुई निराशा
रमेश ने कहा कि आज पूरे विश्व के साथ साथ देश भी कोरोना वायरस से जूझ रहा है। बचाव के लिए लॉक डाउन लगाया गया है तो कुछ लोगों देश के मुखिया के आदेशों को दरकिनार करके जमात में बैठे और हजारों लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया। ऐसा करना मानव धर्म के खिलाफ है।
सभी सदस्यों ने मर्जी से लिया फैसला
जब इस संबंध में गांव के सरपंच पुरुषोत्तम शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मनीर डूम के परिवार के सदस्यों ने बिना किसी दबाव और अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी की है। संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपना सकता है। इसमें किसी को कोई आपत्ति भी नहीं, बल्कि समस्त गांव इनके इस फैसले का सम्मान करता है।