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Jind News: अब नागरिक अस्पताल में होगी एमआरआई जांच, रोहतक, हिसार और खानपुर नहीं जाना पड़ेगा
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25जेएनडी10: नागरिक अस्पताल में एमआईआर के लिए चयनित भवन का फोटो। संवाद
जींद। नागरिक अस्पताल में अब एमआरआई सुविधा जल्द शुरू होने की उम्मीद जगी है। अस्पताल प्रशासन ने एमआरआई मशीन स्थापित करने के लिए सखी केंद्र में जगह उपलब्ध कराने की सहमति दे दी है। मशीन को शिफ्ट करने के लिए मुख्यालय की ओर से मांगी गई जगह की रिपोर्ट भी तैयार कर भेजी जा चुकी है।
अब अस्पताल में एमआरआई सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। एमआरआई सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को जांच के लिए रोहतक, हिसार और खानपुर मेडिकल कॉलेज सहित अन्य जिलों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
अभी गंभीर बीमारियों और चिकित्सकों की सलाह पर एमआरआई जांच की जरूरत पड़ने पर मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर किया जाता है। कई मरीज निजी अस्पतालों में जांच करवाने के लिए मजबूर होते हैं, जहां एमआरआई की फीस काफी अधिक होती है। इसके अलावा दूसरे शहरों में आने-जाने, रहने और उपचार से जुड़े अतिरिक्त खर्च का बोझ भी मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ता है।
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नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन होती है 1800 मरीजों की ओपीडी
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1800 मरीजों की ओपीडी होती है। बड़ी संख्या में मरीजों को अलग-अलग बीमारियों की जांच और इलाज के दौरान एमआरआई की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में यह सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर किया जाता है। एमआरआई सुविधा शुरू होने से मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगी फीस देने से राहत मिलेगी। साथ ही दूसरे जिलों में रेफर होने के कारण होने वाली परेशानी और अतिरिक्त खर्च भी कम होगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल में लगातार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे में एमआरआई सुविधा शुरू होना जिले के मरीजों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
एमआरआई क्या है और यह क्यों की जाती है?
एमआरआई यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग एक आधुनिक जांच तकनीक है जिसमें शरीर के अंदरूनी अंगों और ऊतकों की विस्तृत तस्वीरें ली जाती हैं। इससे मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, नसों, जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर के कई अन्य हिस्सों से जुड़ी बीमारियों की पहचान में मदद मिलती है। सिर में चोट, ब्रेन स्ट्रोक, ट्यूमर, रीढ़ की हड्डी की समस्या, नसों से जुड़ी बीमारी और जोड़ों की गंभीर चोटों की जांच में एमआरआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वर्जन
अस्पताल प्रशासन की ओर से एमआरआई मशीन को सखी केंद्र व उसके साथ लगते कमरों में स्थापित करने के लिए जगह उपलब्ध कराई गई है। मुख्यालय से जगह की रिपोर्ट मांगी गई थी। इसे तैयार कर भेज दिया गया है। अब मशीन को शिफ्ट करने और सुविधा शुरू करने की आगामी प्रक्रिया मुख्यालय के स्तर पर पूरी की जाएगी। -डॉ. सुमन कोहली, सीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।
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अब अस्पताल में एमआरआई सुविधा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। एमआरआई सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को जांच के लिए रोहतक, हिसार और खानपुर मेडिकल कॉलेज सहित अन्य जिलों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
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अभी गंभीर बीमारियों और चिकित्सकों की सलाह पर एमआरआई जांच की जरूरत पड़ने पर मरीजों को दूसरे जिलों में रेफर किया जाता है। कई मरीज निजी अस्पतालों में जांच करवाने के लिए मजबूर होते हैं, जहां एमआरआई की फीस काफी अधिक होती है। इसके अलावा दूसरे शहरों में आने-जाने, रहने और उपचार से जुड़े अतिरिक्त खर्च का बोझ भी मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ता है।
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नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन होती है 1800 मरीजों की ओपीडी
नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन करीब 1800 मरीजों की ओपीडी होती है। बड़ी संख्या में मरीजों को अलग-अलग बीमारियों की जांच और इलाज के दौरान एमआरआई की जरूरत पड़ती है। अस्पताल में यह सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर किया जाता है। एमआरआई सुविधा शुरू होने से मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगी फीस देने से राहत मिलेगी। साथ ही दूसरे जिलों में रेफर होने के कारण होने वाली परेशानी और अतिरिक्त खर्च भी कम होगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से नागरिक अस्पताल में लगातार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे में एमआरआई सुविधा शुरू होना जिले के मरीजों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।
एमआरआई क्या है और यह क्यों की जाती है?
एमआरआई यानी मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग एक आधुनिक जांच तकनीक है जिसमें शरीर के अंदरूनी अंगों और ऊतकों की विस्तृत तस्वीरें ली जाती हैं। इससे मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, नसों, जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर के कई अन्य हिस्सों से जुड़ी बीमारियों की पहचान में मदद मिलती है। सिर में चोट, ब्रेन स्ट्रोक, ट्यूमर, रीढ़ की हड्डी की समस्या, नसों से जुड़ी बीमारी और जोड़ों की गंभीर चोटों की जांच में एमआरआई महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वर्जन
अस्पताल प्रशासन की ओर से एमआरआई मशीन को सखी केंद्र व उसके साथ लगते कमरों में स्थापित करने के लिए जगह उपलब्ध कराई गई है। मुख्यालय से जगह की रिपोर्ट मांगी गई थी। इसे तैयार कर भेज दिया गया है। अब मशीन को शिफ्ट करने और सुविधा शुरू करने की आगामी प्रक्रिया मुख्यालय के स्तर पर पूरी की जाएगी। -डॉ. सुमन कोहली, सीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।