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Jind News: बेटी के दूसरे गोल्ड पर छलके मां के आंसू, बोलीं-गर्व से चौड़ी हुई छाती

Thu, 01 Oct 2026 12:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2026 12:24 AM IST
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Mother moved to tears by daughter's second gold; says her chest swells with pride.
30जेएनडी33: नीरू ढांडा।
संवाद न्यूज एजेंसी
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जींद। संगतपुरा गांव की बेटी नीरू ढांडा के एशियन गेम्स में दूसरा स्वर्ण जीतने पर मां सुदेश देवी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया और मां ने भावुक होकर कहा कि छाती गर्व से चौड़ी हो गई। ये दुख के नहीं, खुशी के आंसू हैं।
उन्होंने कहा, पिछले तीन दिनों से खुशी के कारण ठीक से भूख भी नहीं लगी। एशियाई खेलों के लिए रवाना होने से पहले नीरू ने घर के देसी घी का चूरमा और ताजा मक्खन खाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने जींद बस स्टैंड से बस के जरिये चूरमा दिल्ली एयरपोर्ट तक पहुंचाया जहां से नीरू को मिला।
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मां सुदेश देवी ने कहा कि बेटी ने परिवार और गांव का नाम रोशन किया है। बेटियों को जितना मौका मिलेगा, उतना ही वे निखरेंगी। उन्होंने अन्य अभिभावकों से भी बेटियों को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की।
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खाली डिब्बों पर निशाना साधने से एशियाई स्वर्ण तक पहुंची जींद के बेटी नीरू
नीरू के पास कभी अपनी शूटिंग गन खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। अभ्यास के लिए खाली डिब्बों को निशाना बनाकर हाथ साधना पड़ा। परिवार की आर्थिक तंगी ऐसी थी कि बेटी के खेल और डाइट का खर्च निकालने के लिए मां ने पशुओं का दूध तक बेचा। इन्हीं संघर्षों के बीच संगतपुरा की बेटी नीरू ढांडा ने निशानेबाजी को अपना जुनून बनाया और अब एशियन गेम्स में लगातार दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। बुधवार को नीरू ढांडा और किनान चेनाई की जोड़ी ने मिक्स्ड टीम ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। 34 अंक हासिल कर नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। इससे एक दिन पहले मंगलवार को नीरू ने महिला ट्रैप की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। 26 वर्षीय नीरू अब भारतीय सेना की आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में नायब सूबेदार हैं।

भाई लक्ष्य को पदक जीतते देख जागा शूटिंग का जुनून
नीरू ने 19 वर्ष की उम्र में निशानेबाजी शुरू की। इससे पहले वह कबड्डी खेलती थीं। वर्ष 2018 के एशियाई खेलों में रिश्ते के भाई लक्ष्य श्योराण को पदक जीतते देखकर उनके मन में भी शूटिंग को लेकर जुनून पैदा हुआ। शुरुआत में उन्होंने लक्ष्य की बंदूक से अभ्यास किया और बाद में मध्य प्रदेश शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण लिया। लक्ष्य श्योराण और उनके पिता सोमबीर पहलवान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और अभ्यास के लिए बंदूक उपलब्ध कराने के साथ शुरुआती मार्गदर्शन दिया। नीरू ने मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। जुलाई 2026 में लोनाटो में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप में महिला ट्रैप का स्वर्ण जीतकर नीरू यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं।


खेती और पशुपालन से बेटी के सपने को दिया सहारा
नीरू के माता-पिता खेती और पशुपालन का काम करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद मां ने पशुओं का दूध बेचकर बेटी के खेल और डाइट का खर्च उठाया। संघर्षों के बीच परिवार ने नीरू के सपने को टूटने नहीं दिया। आज बेटी की दोहरी स्वर्णिम सफलता उनके उसी संघर्ष का परिणाम है। मां कहती हैं कि पहले स्वर्ण पदक की खुशी अभी कम भी नहीं हुई थी कि बेटी ने दूसरा गोल्ड जीत लिया। अब भूख-प्यास का भी ध्यान नहीं रहा बेटी की कामयाबी ही उनके लिए सबसे बड़ा सुख बन गई है।

30जेएनडी33: नीरू ढांडा।

30जेएनडी33: नीरू ढांडा।

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