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प्रभु तक पहुंचने के लिए मातृ भाव सर्वाधिक सरल : आचार्य पवन शर्मा
Wed, 17 Apr 2024 08:32 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Wed, 17 Apr 2024 08:32 PM IST
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जींद। आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि परमात्मा न स्त्री है, न पुरूष है। जैसा जिसका भाव हो, उसे वह वैसा ही दिखता है। इसलिए जिस भी भाव से उनका भजन करोगे, उसी स्वरूप में उनकी प्राप्ति हो जाएगी। आचार्य पवन शर्मा माता वैष्णवी धाम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि प्रभु तक पहुंचने के लिए मातृ भाव सर्वाधिक सरल है। पुत्र चोर हो, व्यभिचारी अथवा जुआरी हो, अवज्ञाकारी हो, मां को कष्ट देने वाला हो, बुरे से बुरा हो, किन्तु माता का स्नेह पुत्र के लिये किसी काल में भी कम नहीं होता। पुत्र कुपुत्र हो सकता है किंतु माता कभी भी कुमाता नहीं हो सकती। और हमारी मां पराम्बा तो माताओं की भी माता है। एक बार सच्चे हृदय से पूर्ण आद्रता के साथ उन्हें पुकार कर तो देखो, वे आए बिना रूकेंगी नहीं। इस अवसर पर रोहित आहुजा, सुरेश कोचर, सोमनाथ लखीना, कार्तिकेय शर्मा, अश्विनी वधवा, सूरज नागपाल, तिलक जुनेजा मौजूद रहे।
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आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि प्रभु तक पहुंचने के लिए मातृ भाव सर्वाधिक सरल है। पुत्र चोर हो, व्यभिचारी अथवा जुआरी हो, अवज्ञाकारी हो, मां को कष्ट देने वाला हो, बुरे से बुरा हो, किन्तु माता का स्नेह पुत्र के लिये किसी काल में भी कम नहीं होता। पुत्र कुपुत्र हो सकता है किंतु माता कभी भी कुमाता नहीं हो सकती। और हमारी मां पराम्बा तो माताओं की भी माता है। एक बार सच्चे हृदय से पूर्ण आद्रता के साथ उन्हें पुकार कर तो देखो, वे आए बिना रूकेंगी नहीं। इस अवसर पर रोहित आहुजा, सुरेश कोचर, सोमनाथ लखीना, कार्तिकेय शर्मा, अश्विनी वधवा, सूरज नागपाल, तिलक जुनेजा मौजूद रहे।
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