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Jind News: धारूहेड़ा में बंदरों का आतंक, महिलाओं और बच्चों में दहशत का माहौल
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कस्बा में घूम रहा बंदर। संवाद
धारूहेड़ा। कस्बे में इन दिनों बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नंदरामपुर बांस रोड और सोहना रोड के सैनीपुरा मोहल्ले में बंदरों के झुंड के हमलों से लोग भयभीत हैं।
आए दिन किसी न किसी काॅलोनी में बंदरों के उत्पात की खबर मिल रही है। रविवार को बांस रोड स्थित कॉलोनी में एक महिला को बंदर ने काट लिया जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
रामप्रसाद सैनी ने बताया कि न तो नगरपालिका और न ही वन विभाग के अधिकारी या कर्मचारी बंदरों के आतंक से लोगों को राहत दिलाने में कोई दिलचस्पी दिखा रहे हैं। स्थिति यह है कि भूप बिहार कॉलोनी में भी बंदरों ने एक महिला पर हमला कर घायल कर दिया।
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वहीं सैनी कॉलोनी सोहना रोड पर बंदरों ने मकानों की पानी की टंकियां और ढक्कन तोड़ डाले। लोगों का कहना है कि बंदर टंकी के ढक्कन को मुंह से काट देते हैं जिससे पानी बह जाता है और घरवालों को अगले दिन इसका पता चलता है। बार-बार टंकी और पाइपलाइन ठीक करवाने में हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं।
बताया कि ठंड के मौसम में गृहिणियां धूप लेने के लिए छतों पर जाती हैं लेकिन अब बंदरों के डर से वे वहां भी चैन से नहीं बैठ पातीं। अचानक झुंड के झपटने से बच्चों और बुजुर्गों में डर बना रहता है।
लोगों का कहना है कि नगर में न तो बंदर पकड़ने की व्यवस्था है और न ही सरकारी अस्पतालों में बंदर या कुत्ते के काटने का इंजेक्शन उपलब्ध है। कई बार लोगों को इलाज के लिए भिवाड़ी तक जाना पड़ता है जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।मांग की है कि जल्द से जल्द बंदरों के आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाई जाए।
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आए दिन किसी न किसी काॅलोनी में बंदरों के उत्पात की खबर मिल रही है। रविवार को बांस रोड स्थित कॉलोनी में एक महिला को बंदर ने काट लिया जिससे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
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रामप्रसाद सैनी ने बताया कि न तो नगरपालिका और न ही वन विभाग के अधिकारी या कर्मचारी बंदरों के आतंक से लोगों को राहत दिलाने में कोई दिलचस्पी दिखा रहे हैं। स्थिति यह है कि भूप बिहार कॉलोनी में भी बंदरों ने एक महिला पर हमला कर घायल कर दिया।
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वहीं सैनी कॉलोनी सोहना रोड पर बंदरों ने मकानों की पानी की टंकियां और ढक्कन तोड़ डाले। लोगों का कहना है कि बंदर टंकी के ढक्कन को मुंह से काट देते हैं जिससे पानी बह जाता है और घरवालों को अगले दिन इसका पता चलता है। बार-बार टंकी और पाइपलाइन ठीक करवाने में हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं।
बताया कि ठंड के मौसम में गृहिणियां धूप लेने के लिए छतों पर जाती हैं लेकिन अब बंदरों के डर से वे वहां भी चैन से नहीं बैठ पातीं। अचानक झुंड के झपटने से बच्चों और बुजुर्गों में डर बना रहता है।
लोगों का कहना है कि नगर में न तो बंदर पकड़ने की व्यवस्था है और न ही सरकारी अस्पतालों में बंदर या कुत्ते के काटने का इंजेक्शन उपलब्ध है। कई बार लोगों को इलाज के लिए भिवाड़ी तक जाना पड़ता है जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।मांग की है कि जल्द से जल्द बंदरों के आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाई जाए।