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Jind News: शहर में बंदरों का आतंक...जुलाई में 190 लोग पहुंचे अस्पताल, अब पकड़े जाएंगे झुंड

Wed, 22 Jul 2026 11:52 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 11:52 PM IST
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Monkey terror in the city... 190 people were hospitalized in July, now the gangs will be caught.
22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।
जींद। शहर में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। बंदरों के हमले और काटने की घटनाओं के चलते जुलाई माह में अब तक 190 लोग इलाज के लिए अस्पताल पहुंच चुके हैं। शहर की गलियों, बाजारों और घरों की छतों पर बंदरों के झुंड घूम रहे हैं। कई बार बंदर अचानक लोगों पर हमला कर देते हैं। इससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में डर का माहौल बना हुआ है।
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बंदरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए नगर परिषद ने फिर बंदर पकड़ने का टेंडर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। छह माह पहले बंदर पकड़ने का टेंडर समाप्त हो चुका हैं। इसके बाद शहर में बंदरों की समस्या लगातार बढ़ती गई। अब नगर परिषद दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू करने जा रही है।
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नागरिक अस्पताल में बंदरों का सबसे अधिक आतंक
जींद के नागरिक अस्पताल परिसर में भी बंदरों की संख्या काफी बढ़ गई है। बंदर अस्पताल के कमरों और कार्यालयों तक पहुंच जाते हैं। कुछ दिन पहले बंदरों ने एक कमरे में घुसकर अस्पताल का रिकॉर्ड नष्ट कर दिया था। इस दौरान कंप्यूटर सहित अन्य सामान को भी नुकसान पहुंचाया गया था। अस्पताल परिसर में बंदरों की समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ हरियाणा प्रशासन को 43 बार पत्र लिखकर बंदरों को पकड़ने की मांग कर चुका है।
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10 हजार से अधिक मकानों पर लगे बंदर जाल
शहर की पॉश कॉलोनियों में बंदरों से बचाव के लिए लोग अपने घरों की छतों और बालकनी पर जाल लगवा रहे हैं। शहर में अब तक 10 हजार से अधिक मकानों पर बंदर जाल लगाए जा चुके हैं। लोगों का कहना है कि बंदरों के झुंड छतों पर पहुंचकर पानी की टंकियों, कपड़ों और अन्य सामान को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार बंदर रसोई और कमरों तक भी पहुंच जाते हैं। मजबूरी में लोगों को हजारों रुपये खर्च कर जाल लगवाने पड़ रहे हैं।
वर्जन
अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में बंदरों का खुलेआम घूमना चिंता का विषय है। कई बार बंदर मरीजों और कर्मचारियों के हाथ से सामान छीन लेते हैं। अस्पताल में पहले भी बंदरों के कारण कई परेशानियां सामने आ चुकी हैं। - राममेहर वर्मा, प्रदेशाध्यक्ष, स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ हरियाणा
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लोग बोले - बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए
बंदरों के झुंड दिनभर गलियों और घरों की छतों पर घूमते रहते हैं। कई बार बंदर अचानक हमला कर देते हैं। डर के कारण बच्चों को अकेले छत पर नहीं भेजते। नगर परिषद को जल्द से जल्द बंदरों को पकड़ना चाहिए - देवांशी बंसल
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बंदरों से बचाव के लिए घर की छत और बालकनी पर जाल लगवाना पड़ा है। यह लोगों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ है। प्रशासन को बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए। -राजकुमार गोयल
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अस्पताल, कॉलेज, सरकारी संस्थानों और कॉलोनियों में हर जगह बंदरों की समस्या बनी हुई है। लोगों को घरों से बाहर निकलने में भी डर लगता है। प्रशासन को गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। -कुलदीप मल्होत्रा



अधिकारी का वर्जन
बंदरों को पकड़ने के लिए जुलाई में ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके बाद अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ा जाएगा ताकि शहरवासियों को इस समस्या से राहत मिल सके। लोगों को बंदरों के कारण मकानों में कैद नहीं होना पड़े। -सुशील भुक्कल, ईओ नगर परिषद जींद।
फोटो कैप्शन
22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।
22जेएनडी18: देवांशी बंसल।
22जेएनडी19: कुलदीप मल्होत्रा।
22जेएनडी20: राममेहर वर्मा।
22जेएनडी21, 22, नागरिक अस्पताल के पार्क व भवन के लेंटर पर बैठे बंदर। संवाद

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

22जेएनडी17: राजकुमार गोयल।

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