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दस साल से न्यूनतम वेतन रिवाइज नहीं हुआ : रमेश चंद्र
Sat, 21 Jun 2025 12:06 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 21 Jun 2025 12:06 AM IST
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20जेएनडी18-मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए सीटू यूनियन के सदस्य। संवाद
जीद। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन हरियाणा के आह्वान पर न्यूनतम वेतन रिवाइज करके 26 हजार रुपये लागू करने की मांग को लेकर सीटू जिला कमेटी के कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय परिसर के बाहर गोहाना रोड पर प्रदर्शन करते हुए बीडीपीओ सुरेंद्र को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
जिला उप प्रधान रमेश चंद्र और जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा कि हरियाणा में भाजपा सरकार ने पिछले दस साल से न्यूनतम वेतन रिवाइज नहीं किया है, जबकि नियम के हिसाब से हर पांच साल में न्यूनतम वेतन को रिवाइज किया जाना चाहिए।
न्यूनतम वेतन रिवाइज करने में हो रही देरी के खिलाफ मजदूरों में व्याप्त रोष है। इसलिए मजदूर, कच्चे कर्मचारी, मनरेगा, भट्ठा मजदूर व स्कीम वर्कर्स ने सरकार के नाम ज्ञापन भेजा।
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मजदूर नेताओं ने कहा कि न्यूनतम वेतन रिवाइज नहीं करके पिछले 10 साल से प्रदेश के मजदूरों को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि 2014 और 2020 में न्यूनतम वेतन रिवाइज किया जाता ओर अब पुन 2025 में यह रिवाइज किया जाए तो प्रदेश में 28-30 हजार वेतन बनता है। जबकि श्रमिक संगठनों की 26 हजार रुपये की मांग को भी सरकार नहीं मान रही।
जबकि पिछले दस वर्षों में महंगाई बढ़ी है। इस अवसर पर संदीप जाजवान, सुरेश करसोला, जोगिंद्र, बिट्टू, दीनदयाल, राजबाला, रोशनी, अनीता, सुशीला, कमलेश, रेखा, गुलाब, ईश्वर, रामेश्वर भारद्वाज, बलदेव और पवन भी मौजूद रहे।
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जिला उप प्रधान रमेश चंद्र और जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा कि हरियाणा में भाजपा सरकार ने पिछले दस साल से न्यूनतम वेतन रिवाइज नहीं किया है, जबकि नियम के हिसाब से हर पांच साल में न्यूनतम वेतन को रिवाइज किया जाना चाहिए।
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न्यूनतम वेतन रिवाइज करने में हो रही देरी के खिलाफ मजदूरों में व्याप्त रोष है। इसलिए मजदूर, कच्चे कर्मचारी, मनरेगा, भट्ठा मजदूर व स्कीम वर्कर्स ने सरकार के नाम ज्ञापन भेजा।
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मजदूर नेताओं ने कहा कि न्यूनतम वेतन रिवाइज नहीं करके पिछले 10 साल से प्रदेश के मजदूरों को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि 2014 और 2020 में न्यूनतम वेतन रिवाइज किया जाता ओर अब पुन 2025 में यह रिवाइज किया जाए तो प्रदेश में 28-30 हजार वेतन बनता है। जबकि श्रमिक संगठनों की 26 हजार रुपये की मांग को भी सरकार नहीं मान रही।
जबकि पिछले दस वर्षों में महंगाई बढ़ी है। इस अवसर पर संदीप जाजवान, सुरेश करसोला, जोगिंद्र, बिट्टू, दीनदयाल, राजबाला, रोशनी, अनीता, सुशीला, कमलेश, रेखा, गुलाब, ईश्वर, रामेश्वर भारद्वाज, बलदेव और पवन भी मौजूद रहे।