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मिड डे मील वर्कर्स यूनियन लंबे समय से बेहतर वेतन, स्थाई नौकरी और पेंशन की करती आ रही मांग : सुरेखा
Mon, 31 Mar 2025 12:48 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 31 Mar 2025 12:48 AM IST
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30जेएनडी26-पंजाबी धर्मशाला में आयोजित सम्मेलन में भाग लेती मिड डे मील वर्कर्स। स्रोत यूनियन
जींद। पंजाबी धर्मशाला में मिड डे मील वर्कर्स यूनियन हरियाणा का 5वां राज्य स्तरीय सम्मेलन हुआ। अधिवेशन की अध्यक्षता किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष फूल सिंह श्योकंद और संचालन संदीप जाजवान ने किया। अधिवेशन को मिड डे मील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष हिम्मी देवी और सीटू की राज्य अध्यक्ष सुरेखा ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि हरियाणा में मिड डे मील वर्कर्स यूनियन लंबे समय से अपने लिए बेहतर वेतन, स्थाई नौकरी, पेंशन और अन्य सुविधाओं की मांग करती रही है। यूनियन मिड डे मील वर्करों के न्यूनतम वेतन की लगातार मांग करती आ रही है। लंबे समय से उन्हें मात्र 6000 रुपये महीना मिल रहा है। वह भी 12 महीनों की बजाए दस महीने मिलता है। इनको न एक्सीडेंट क्लेम मिलता और न ही रिटायरमेंट के बाद कोई बेनिफिट मिलता है। जुलाई 2022 में मासिक मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। यूनियन 12 महीने के वेतन की मांग करती है। इसके अलावा मिड डे मील वर्करों को अक्सर अपर्याप्त संसाधनों के साथ काम करना पड़ता है। कई बार उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है ताकि बच्चों को समय पर भोजन मिल सके। कार्य का बोझ भी अधिक होता है, क्योंकि एक वर्कर को बड़ी संख्या में बच्चों के लिए भोजन तैयार करना पड़ता है। वहीं सहायकों की संख्या सीमित होती है। इन वर्करों को स्थाई कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। इस कारण उन्हें पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, ईएसआई या पीएफ जैसे लाभ नहीं मिलते। आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड और सेवानिवृत्ति लाभ भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। यूनियन आने वाले समय में मिड डे मील वर्करों की मांगों के समाधान के लिए राज्य सम्मेलन में ठोस योजना बनाएगी। इस अवसर पर सर्व कर्मचारी संघ जिला प्रधान संजीव ढांडा, मंदीप नेहरा, अनूप, रामबीर, सीटू जिला अध्यक्ष सतबीर खरल, उपाध्यक्ष सुरेश करसोला, अध्यापक नेता मास्टर रोहताश, नौजवान सभा के राज्य सचिव नरेश दनौदा भी मौजूद रहे।
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वक्ताओं ने कहा कि हरियाणा में मिड डे मील वर्कर्स यूनियन लंबे समय से अपने लिए बेहतर वेतन, स्थाई नौकरी, पेंशन और अन्य सुविधाओं की मांग करती रही है। यूनियन मिड डे मील वर्करों के न्यूनतम वेतन की लगातार मांग करती आ रही है। लंबे समय से उन्हें मात्र 6000 रुपये महीना मिल रहा है। वह भी 12 महीनों की बजाए दस महीने मिलता है। इनको न एक्सीडेंट क्लेम मिलता और न ही रिटायरमेंट के बाद कोई बेनिफिट मिलता है। जुलाई 2022 में मासिक मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। यूनियन 12 महीने के वेतन की मांग करती है। इसके अलावा मिड डे मील वर्करों को अक्सर अपर्याप्त संसाधनों के साथ काम करना पड़ता है। कई बार उन्हें अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है ताकि बच्चों को समय पर भोजन मिल सके। कार्य का बोझ भी अधिक होता है, क्योंकि एक वर्कर को बड़ी संख्या में बच्चों के लिए भोजन तैयार करना पड़ता है। वहीं सहायकों की संख्या सीमित होती है। इन वर्करों को स्थाई कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। इस कारण उन्हें पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, ईएसआई या पीएफ जैसे लाभ नहीं मिलते। आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड और सेवानिवृत्ति लाभ भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है। यूनियन आने वाले समय में मिड डे मील वर्करों की मांगों के समाधान के लिए राज्य सम्मेलन में ठोस योजना बनाएगी। इस अवसर पर सर्व कर्मचारी संघ जिला प्रधान संजीव ढांडा, मंदीप नेहरा, अनूप, रामबीर, सीटू जिला अध्यक्ष सतबीर खरल, उपाध्यक्ष सुरेश करसोला, अध्यापक नेता मास्टर रोहताश, नौजवान सभा के राज्य सचिव नरेश दनौदा भी मौजूद रहे।
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