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मेडिटेशन से मन में आते हैं सकारात्मक विचार : नरेश
Sat, 21 Feb 2026 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 21 Feb 2026 11:51 PM IST
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21जेएनडी10-हिंदू कन्या महाविद्यालय में मुख्य वक्ता डॉ. नरेश जागलान को सम्मानित करते हुए स्टाफ।
जींद। हिंदू कन्या महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा समिति द्वारा स्वस्थ मस्तिष्क के लिए ध्यान विषय पर शनिवार को कार्यशाला हुई। शुभारंभ प्राचार्य डॉ. पूनम मोर ने किया।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता रिहैबिलिटेशन काउंसिलिंग ऑफ इंडिया नई दिल्ली के मनोवैज्ञानिक डॉ. नरेश जागलान रहे। उन्होंने कहा कि मेडिटेशन से सकारात्मक विचार, क्षमा, करुणा जैसे गुणों का विकास होता है। मेडिटेशन भारतीय संस्कृति में शुरू से ही लोकप्रिय रहा है। मेडिटेशन उन सभी के लिए लाभदायक होता है जिनका मन अशांत होता है और जो अपने कार्य को ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं।
इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह नकारात्मक विचारों को दूर करता है और इससे सकारात्मक विचार व्यक्ति के मस्तिष्क में आते हैं। नोडल अधिकारी डाॅ. पिंकी ने छात्राओं को बताया कि जो सुबह उठ कर मेडिटेशन करते हैं वह ताजगी से भर जाते हैं। प्राचार्य डाॅ. पूनम मोर ने कहा कि मेडिटेशन मन, आत्मा और शरीर को शुद्ध बनाता है।
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इसे करने से हमारा मस्तिष्क पहले से अधिक तेजी से काम करने लगता है। इससे पढ़ाई में मन लगता है और याददाश्त बढ़ती है। जिन छात्राओं का ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहता है, उनका स्वभाव भी अच्छा रहता है तथा मन और विचारों में सकारात्मक बनी रहती है। इस दौरान डॉ. मीना, डाॅ. ज्योति जागलान मौजूद रही।
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कार्यशाला के मुख्य वक्ता रिहैबिलिटेशन काउंसिलिंग ऑफ इंडिया नई दिल्ली के मनोवैज्ञानिक डॉ. नरेश जागलान रहे। उन्होंने कहा कि मेडिटेशन से सकारात्मक विचार, क्षमा, करुणा जैसे गुणों का विकास होता है। मेडिटेशन भारतीय संस्कृति में शुरू से ही लोकप्रिय रहा है। मेडिटेशन उन सभी के लिए लाभदायक होता है जिनका मन अशांत होता है और जो अपने कार्य को ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं।
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इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह नकारात्मक विचारों को दूर करता है और इससे सकारात्मक विचार व्यक्ति के मस्तिष्क में आते हैं। नोडल अधिकारी डाॅ. पिंकी ने छात्राओं को बताया कि जो सुबह उठ कर मेडिटेशन करते हैं वह ताजगी से भर जाते हैं। प्राचार्य डाॅ. पूनम मोर ने कहा कि मेडिटेशन मन, आत्मा और शरीर को शुद्ध बनाता है।
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इसे करने से हमारा मस्तिष्क पहले से अधिक तेजी से काम करने लगता है। इससे पढ़ाई में मन लगता है और याददाश्त बढ़ती है। जिन छात्राओं का ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहता है, उनका स्वभाव भी अच्छा रहता है तथा मन और विचारों में सकारात्मक बनी रहती है। इस दौरान डॉ. मीना, डाॅ. ज्योति जागलान मौजूद रही।