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Jind News: संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिले मासूम शर्मा, सियासी चर्चाएं तेज
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जुलाना। हरियाणवी गायकी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुके कलाकार मासूम शर्मा की आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात के बाद जुलाना की सियासत में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मुलाकात भले ही अभी राजनीतिक रूप से किसी घोषणा का संकेत नहीं देती, लेकिन संघ के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनकी तस्वीर और मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में संभावनाओं को जरूर हवा दे दी है। चर्चा है कि इस मुलाकात की पहल मासूम शर्मा के बड़े भाई विकास ब्राह्मणवास की ओर से हुई।
मासूम शर्मा लंबे समय से हरियाणवी संगीत में सक्रिय हैं और उनके गीतों ने उन्हें प्रदेश में अलग पहचान दिलाई है। ऐसे में संघ प्रमुख से मुलाकात को केवल सामाजिक या शिष्टाचार भेंट मानने वाले भी हैं, जबकि राजनीतिक हलकों में इसे भविष्य की संभावित राजनीतिक भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मासूम शर्मा की ओर से अभी तक राजनीति में आने या किसी दल से जुड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हरियाणवी गीत-संगीत को लेकर पहले भी सामाजिक और राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं। इसलिए गायन की लोकप्रियता और संघ के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क का यह मेल राजनीतिक चर्चाओं का नया आधार बन गया है।
बाक्स
जुलाना में बदल सकते हैं सियासी समीकरण
मासूम शर्मा की संघ नेतृत्व से मुलाकात को जुलाना की राजनीति के नजरिये से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहलवान विनेश फोगाट को जुलाना से मैदान में उतारकर भाजपा के स्थापित राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दी थी। ऐसे में भविष्य में यदि मासूम शर्मा राजनीति में उतरते हैं तो वह भाजपा के लिए जुलाना में एक अलग तरह का विकल्प बन सकते हैं। उनकी पहचान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि हरियाणवी संस्कृति और गायकी से जुड़ी हुई है। यही लोकप्रियता उन्हें पारंपरिक नेताओं से अलग आधार दे सकती है।
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फिलहाल यह तस्वीर भविष्य की संभावनाओं का संकेत भर है, लेकिन यदि मासूम शर्मा सक्रिय राजनीति में आते हैं तो जुलाना में सियासी मुकाबले का रंग और समीकरण दोनों बदल सकते हैं। अब नजर इस बात पर है कि यह मुलाकात यहीं तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में इसका कोई राजनीतिक अध्याय भी सामने आता है।
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मासूम शर्मा के गाने बैन हुए थे तो उस समय सरकार में बैठे एक नेता पर भी मासूम शर्मा जमकर बरसे थे। इसमें पक्षपात के आरोप लगाए थे। उन्ळोंने कहा था कि एक साजिश के तहत उनके गाने बैन करवाए जा रहे हैं, जबकि भाजपा के इस नेता के गाने खुद विवादित हैं।
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मासूम शर्मा लंबे समय से हरियाणवी संगीत में सक्रिय हैं और उनके गीतों ने उन्हें प्रदेश में अलग पहचान दिलाई है। ऐसे में संघ प्रमुख से मुलाकात को केवल सामाजिक या शिष्टाचार भेंट मानने वाले भी हैं, जबकि राजनीतिक हलकों में इसे भविष्य की संभावित राजनीतिक भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मासूम शर्मा की ओर से अभी तक राजनीति में आने या किसी दल से जुड़ने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब हरियाणवी गीत-संगीत को लेकर पहले भी सामाजिक और राजनीतिक विवाद सामने आते रहे हैं। इसलिए गायन की लोकप्रियता और संघ के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क का यह मेल राजनीतिक चर्चाओं का नया आधार बन गया है।
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जुलाना में बदल सकते हैं सियासी समीकरण
मासूम शर्मा की संघ नेतृत्व से मुलाकात को जुलाना की राजनीति के नजरिये से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहलवान विनेश फोगाट को जुलाना से मैदान में उतारकर भाजपा के स्थापित राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दी थी। ऐसे में भविष्य में यदि मासूम शर्मा राजनीति में उतरते हैं तो वह भाजपा के लिए जुलाना में एक अलग तरह का विकल्प बन सकते हैं। उनकी पहचान केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि हरियाणवी संस्कृति और गायकी से जुड़ी हुई है। यही लोकप्रियता उन्हें पारंपरिक नेताओं से अलग आधार दे सकती है।
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फिलहाल यह तस्वीर भविष्य की संभावनाओं का संकेत भर है, लेकिन यदि मासूम शर्मा सक्रिय राजनीति में आते हैं तो जुलाना में सियासी मुकाबले का रंग और समीकरण दोनों बदल सकते हैं। अब नजर इस बात पर है कि यह मुलाकात यहीं तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में इसका कोई राजनीतिक अध्याय भी सामने आता है।
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मासूम शर्मा के गाने बैन हुए थे तो उस समय सरकार में बैठे एक नेता पर भी मासूम शर्मा जमकर बरसे थे। इसमें पक्षपात के आरोप लगाए थे। उन्ळोंने कहा था कि एक साजिश के तहत उनके गाने बैन करवाए जा रहे हैं, जबकि भाजपा के इस नेता के गाने खुद विवादित हैं।