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Jind News: फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किया जागरूक
Sat, 14 Sep 2024 01:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 14 Sep 2024 01:43 AM IST
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13जेएनडी22: जागरूकता कार्यक्रम में मौजूद किसान। संवाद
सफीदों। बसीनी और बडौद गांव के किसानों को कृषि विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जागरूक किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी डाॅ. सुशील कुमार ने की।
डाॅ. सुशील कुमार ने कहा कि पहले किसानों को फसल अवशेष का प्रबंधन करने में बड़ी परेशानी होती थी। फसल का अवशेष खेत में जलाने से न केवल जमीन को नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई योजनाएं चलाई हैं। विभाग के इस कदम से फसल अवशेष प्रबंधन को बल मिला है। फसल अवशेष का प्रयोग अब बिजली उत्पादन और प्लाईबोर्ड बनाने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसानों को विभिन्न प्रकार के कृषि उपकरणों को अनुदान राशि पर उपलब्ध करवाया जाता है।
उन्होंने किसानों को बताया कि धान के अवशेष व पराली जलाने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध जीवाश्म, नाइट्रोजन, फास्फोरस व अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। इस अवसर पर कृषि पर्यवेक्षक गौरव कुमार ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र जैसे एसएमएस, सुपर सीडर, स्ट्रा बेलर, एमबी प्लाऊ व अन्य यंत्रों के प्रयोग के बारे में बताया।
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डाॅ. सुशील कुमार ने कहा कि पहले किसानों को फसल अवशेष का प्रबंधन करने में बड़ी परेशानी होती थी। फसल का अवशेष खेत में जलाने से न केवल जमीन को नुकसान होता है, बल्कि पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई योजनाएं चलाई हैं। विभाग के इस कदम से फसल अवशेष प्रबंधन को बल मिला है। फसल अवशेष का प्रयोग अब बिजली उत्पादन और प्लाईबोर्ड बनाने का काम किया जाता है। उन्होंने कहा कि किसानों को विभिन्न प्रकार के कृषि उपकरणों को अनुदान राशि पर उपलब्ध करवाया जाता है।
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उन्होंने किसानों को बताया कि धान के अवशेष व पराली जलाने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध जीवाश्म, नाइट्रोजन, फास्फोरस व अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। इस अवसर पर कृषि पर्यवेक्षक गौरव कुमार ने किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र जैसे एसएमएस, सुपर सीडर, स्ट्रा बेलर, एमबी प्लाऊ व अन्य यंत्रों के प्रयोग के बारे में बताया।
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