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Jind News: लखनऊ कोचिंग सेंटर में आगजनी से नहीं जागा प्रशासन, बिना फायर एनओसी चल रहे 200 संस्थान
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जींद। लखनऊ कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद भी प्रशासन नहीं जागा। जिले में 200 से ज्यादा शिक्षण संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं। केवल होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों की बात करें तो 140 में से सिर्फ 17 के पास ही फायर एनओसी है जबकि 123 प्रतिष्ठान बिना अनुमति के काम कर रहे हैं।
शहर की 30 से अधिक कॉलोनियों और पॉश इलाकों में कोचिंग सेंटर, अस्पताल, बैंक्वेट हॉल और रेस्टोरेंट रिहायशी इमारतों में चल रहे हैं। इनमें से अधिकतर जगहों पर आग से बचाव के उपकरण, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और सुरक्षित निकासी व्यवस्था नहीं है।
इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कभी बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई। सबसे अधिक खतरा पुराने भवनों में संचालित प्रतिष्ठानों में है। तंग गलियों और बाजारों में बने कई होटल और ढाबों के पास पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं है।
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सड़क पर खड़े वाहनों के कारण आग लगने जैसी स्थिति में दमकल वाहनों और एंबुलेंस के पहुंचने में देरी हो सकती है। कई बहुमंजिला इमारतों में संचालित रेस्टोरेंट और संस्थानों में स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और फायर हाइड्रेंट जैसी अनिवार्य सुविधाएं भी नहीं हैं।
कई कोचिंग सेंटरों में आपातकालीन निकास या इमरजेंसी विंडो तक नहीं
कई कोचिंग सेंटर और संस्थान दो या तीन मंजिला इमारतों में चल रहे हैं जहां सिर्फ एक ही रास्ता है और आपातकालीन निकास या इमरजेंसी विंडो तक नहीं है। यहां करीब 10 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं। नियमों के अनुसार, 15 मीटर से ऊंचे भवन, 500 वर्ग मीटर से बड़े व्यावसायिक परिसर, होटल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल के लिए फायर एनओसी जरूरी है। नियम तोड़ने वालों पर सीलिंग और जुर्माने का प्रावधान भी है।
बाक्स
जिन प्रतिष्ठानों के पास एनओसी नहीं है या जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है उनकी जांच की जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -रामेश्वर फायर स्टेशन अधिकारी
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शहर की 30 से अधिक कॉलोनियों और पॉश इलाकों में कोचिंग सेंटर, अस्पताल, बैंक्वेट हॉल और रेस्टोरेंट रिहायशी इमारतों में चल रहे हैं। इनमें से अधिकतर जगहों पर आग से बचाव के उपकरण, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और सुरक्षित निकासी व्यवस्था नहीं है।
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इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कभी बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई। सबसे अधिक खतरा पुराने भवनों में संचालित प्रतिष्ठानों में है। तंग गलियों और बाजारों में बने कई होटल और ढाबों के पास पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं है।
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सड़क पर खड़े वाहनों के कारण आग लगने जैसी स्थिति में दमकल वाहनों और एंबुलेंस के पहुंचने में देरी हो सकती है। कई बहुमंजिला इमारतों में संचालित रेस्टोरेंट और संस्थानों में स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और फायर हाइड्रेंट जैसी अनिवार्य सुविधाएं भी नहीं हैं।
कई कोचिंग सेंटरों में आपातकालीन निकास या इमरजेंसी विंडो तक नहीं
कई कोचिंग सेंटर और संस्थान दो या तीन मंजिला इमारतों में चल रहे हैं जहां सिर्फ एक ही रास्ता है और आपातकालीन निकास या इमरजेंसी विंडो तक नहीं है। यहां करीब 10 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ाई करते हैं। नियमों के अनुसार, 15 मीटर से ऊंचे भवन, 500 वर्ग मीटर से बड़े व्यावसायिक परिसर, होटल, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल के लिए फायर एनओसी जरूरी है। नियम तोड़ने वालों पर सीलिंग और जुर्माने का प्रावधान भी है।
बाक्स
जिन प्रतिष्ठानों के पास एनओसी नहीं है या जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है उनकी जांच की जा रही है। नियमों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -रामेश्वर फायर स्टेशन अधिकारी