{"_id":"6701b5f08537ed688d0b2114","slug":"lord-parshuram-became-angry-after-seeing-the-bow-broken-jind-news-c-199-1-jnd1001-124003-2024-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: धनुष टूटा देख क्रोधित हुए भगवान परशुराम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: धनुष टूटा देख क्रोधित हुए भगवान परशुराम
Sun, 06 Oct 2024 03:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 06 Oct 2024 03:26 AM IST
विज्ञापन
नरवाना। पुरानी अनाज मंडी में श्रीरामा भारतीय कला केंद्र द्वारा रामलीला के मंचन के चौथे दिन परशुराम-लक्ष्मण संवाद, राम सीता विवाह की लीला का मंचन हुआ।
रामलीला मंचन के चौथे दिन मुख्यातिथि पूर्व मंडी प्रधान जयदेव बंसल, समाजसेवी रमेश गर्ग व अश्वनी आर्य रहे। रामलीला में मंच पर आरती के बाद पहला दृश्य में जनक दरबार दिखाया गया। इसमें भगवान परशुराम पहुंच जाते हैं और टूटे धनुष को देखकर आग बबूला हो जाते हैं। परशुराम और लक्ष्मण के बीच कड़ा संवाद होता है। परशुराम लक्ष्मण के ऊपर फरसे से वार करने का प्रयास करते हैं, तभी विश्वामित्र उन्हें रोक देते हैं। बाद में भगवान परशुराम को मनाने के बाद सीता विवाह की लीला का मंचन किया गया।
उसके बाद दशरथ दरबार में राम को राज्यभिषेक करने का ऐलान कर देता है। किसी तरह से बात मंथरा के कानों तक पहुंच जाती है और वह जाकर रानी कैकई कान भर देती है। लीला में राजा दशरथ से दो वर एक तो राम की जगह भरत को राज्यभिषेक होना व दूसरा राम को 14 वर्षों के लिए वनों में भेजने का वर मांग बैठती है। यह सुनकर महाराजा दशरथ बेहोश हो जाते हैं। महल में भगवान राम के पहुंचने के बाद इनके बेहोश होने का कारण पूछते हैं और रानी कैकई सारा वृतांत बता देती है। रामलीला के मंचन में राम की भूमिका अमन वर्मा, लक्ष्मण की भूमिका रामप्रकाश, दशरथ की भूमिका कुलदीप वर्मा, परशुराम की रामनिवास जैन, जनक की भूमिका राजेश बाता, कैकई की हरीश गुप्ता व मंथरा की राकेश सेतिया ने निभाई। इस अवसर प्रधान भारतभूषण गर्ग, डाॅ. एसके सिंगला, खजांची बाता, कुलदीप बडनपुर, अचल मित्तल रामकुमार गर्ग, वेद अरोड़ा व संजय रोहिल्ला मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
रामलीला मंचन के चौथे दिन मुख्यातिथि पूर्व मंडी प्रधान जयदेव बंसल, समाजसेवी रमेश गर्ग व अश्वनी आर्य रहे। रामलीला में मंच पर आरती के बाद पहला दृश्य में जनक दरबार दिखाया गया। इसमें भगवान परशुराम पहुंच जाते हैं और टूटे धनुष को देखकर आग बबूला हो जाते हैं। परशुराम और लक्ष्मण के बीच कड़ा संवाद होता है। परशुराम लक्ष्मण के ऊपर फरसे से वार करने का प्रयास करते हैं, तभी विश्वामित्र उन्हें रोक देते हैं। बाद में भगवान परशुराम को मनाने के बाद सीता विवाह की लीला का मंचन किया गया।
विज्ञापन
उसके बाद दशरथ दरबार में राम को राज्यभिषेक करने का ऐलान कर देता है। किसी तरह से बात मंथरा के कानों तक पहुंच जाती है और वह जाकर रानी कैकई कान भर देती है। लीला में राजा दशरथ से दो वर एक तो राम की जगह भरत को राज्यभिषेक होना व दूसरा राम को 14 वर्षों के लिए वनों में भेजने का वर मांग बैठती है। यह सुनकर महाराजा दशरथ बेहोश हो जाते हैं। महल में भगवान राम के पहुंचने के बाद इनके बेहोश होने का कारण पूछते हैं और रानी कैकई सारा वृतांत बता देती है। रामलीला के मंचन में राम की भूमिका अमन वर्मा, लक्ष्मण की भूमिका रामप्रकाश, दशरथ की भूमिका कुलदीप वर्मा, परशुराम की रामनिवास जैन, जनक की भूमिका राजेश बाता, कैकई की हरीश गुप्ता व मंथरा की राकेश सेतिया ने निभाई। इस अवसर प्रधान भारतभूषण गर्ग, डाॅ. एसके सिंगला, खजांची बाता, कुलदीप बडनपुर, अचल मित्तल रामकुमार गर्ग, वेद अरोड़ा व संजय रोहिल्ला मौजूद थे।
विज्ञापन