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हम पराली जलाएंगे, तुम केस करके दिखाओ

Tue, 18 Oct 2016 12:51 AM IST
jind
jind Updated Tue, 18 Oct 2016 12:51 AM IST
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lodge fir, we will burn parali, jind
एसडीएम से बहस करते भाकियू नेता। - फोटो : bureau
 पराली जलाने को लेकर प्रशासन और किसान आमने सामने आ गए हैं। किसानों ने प्रशासन को खुली चुनौती दी है कि हम ज्ञापन सौंपकर पराली जलाएंगे और देखते हैं प्रशासन किसानों पर कैसे मुकदमा दर्ज करता है। इस बात पर किसान यूनियन खुलकर किसानों के साथ आ गई है। सोमवार को लघु सचिवालय पर प्रदर्शन कर रहे किसान यूनियन के नेताओं की इस मुद्दे पर एसडीएम सतबीर सिंह कुंडू के साथ बहस भी हो गई। यूनियन के नेताओं ने कहा, अगर किसानों पर लगाया जुर्माना प्रशासन वापस नहीं लेता तो किसान यूनियन धरना देगी। वहीं सोमवार को प्रदर्शन कर रहे किसानों को नसीहत देने पहुंचे एसडीएम ने किसानों से जैसे ही पराली नहीं जलाने की बात कही, किसान भड़क गए। किसानों ने प्रशासन से ही जवाब मांगा कि अगर पराली को नहीं जलाएंगे तो उसे कहा पर लेकर जाएं। किसानों ने कहा कि प्रशासन अगर खेतों से पराली उठाने की व्यवस्था करता है तो किसान उसका सहयोग करेंगे। प्रशासन खेतों से पराली उठाने की व्यवस्था करने की बजाए नोटिस देकर जुर्माना किया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि सरकार ने पराली की व्यवस्था करने की बजाए किसानों पर सीधे ही काला कानून थोप कर उन्हें प्रताड़ित कर रही है। पहले से किसान बीमारी से फसल खराब होने से परेशान है, ऊपर से प्रशासन लगातार किसानों को पराली जलाने पर जुर्माना व मुकदमा दर्ज करने की धमकी दे रहा है।
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 इस दौरान भाकियू नेताओं ने चेताया कि इस काले कानून के विरोध में किसान आंदोलन करेंगे और प्रशासन को स्थान व समय देकर खेतों में किसान पराली जाएंगे और उसके बाद प्रशासन किसानों पर जुर्माना व मुकदमा दर्ज करके दिखाए। किसानों की दो टूक सुनकर एसडीएम सतबीर सिंह कुंडू ने प्रदूषण बोर्ड व सरकार के आदेशों का हवाला दिया, लेकिन किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपनी खेतों की पराली को जलाने के लिए मजबूर हैं। अगर किसान पराली को नहीं जलाएगा तो गेहूं की फसल की बिजाई कैसे कर सकता है।
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जीरो ड्रिल का कृषि विभाग का फार्मूला फेल
किसानों के भड़कने पर एसडीएम सतबीर सिंह कुंडू ने किसानों से आह्वान किया कि वह जीरो ड्रिल पद्धति को अपनाकर गेहूं की बिजाई कर सकते हैं, इससे पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होगा। इस पर भाकियू नेता रामफल कंडेला ने कहा कि कृषि विभाग की जीरो ड्रिल पद्धति पूरी तरह से फेल है, क्योंकि धान की कटाई के बाद बचे विशेष को तो किसान खेतों में जुताई  कर देते हैं, लेकिन धान की झड़ाई के बाद बचने वाली पराली खेतों में रहने के बाद जुताई नहीं हो सकती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार में बड़े अधिकारियों ने अपनी नौकरी बचाने के लिए कानून बना दिया, लेकिन किसानों की पराली कहा पर जाएगी इसकी व्यवस्था अब तक नहीं की।
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प्रशासन को स्थान व समय देकर खेतों में जलाएंगे पराली
भारतीय किसान यूनियन के उपप्रधान बिल्लू खांडा ने एसडीएम सतबीर सिंह कुंडू के सामने ही चेताया कि सरकार व प्रशासन के इस काले कानून का किसान डटकर मुकाबला करेंगे। प्रशासन प्रतिदिन किसानों को जुर्माना व मुकदमें दर्ज कर रहा है, जोकि किसानों के साथ अत्याचार है। किसान प्रशासन को पहले ही स्थान व समय देकर अपने खेतों में पराली को जलाएंगे। उसके बाद देखते है कि प्रशासन किस तरीके से किसानों पर जुर्माना व मुकदमा दर्ज कतरता है। प्रशासन किसानों की खेतों की पराली को उठाने के लिए कोई व्यवस्था तो कर नहीं रहा, उल्टे ही किसानों पर पराली जलाने पर जुर्माना व मामले दर्ज किए जा रहे हैं। जिसे भारतीय किसान यूनियन किसी भी सूरत में सहन नहीं करेगी।

176 किसानों को जारी किए नोटिस
जिले में प्रतिबंध के बावजूद धान की पराली जलाने पर 176 किसानों को नोटिस जारी करके जुर्माना भरने के आदेश दिए हैं। इसमें जींद उपमंडल के 16 किसानों को नोटिस जारी कर जुर्माना राशि भरने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जुर्माना राशि न भरने की सूरत में धान की फसलों के अवशेष जलाने वाले किसानों एवं काश्तकारों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। एसडीएम सतबीर सिंह कुंडू ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धान की पराली जलाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में किसी भी सूरत में धान की पराली को जलाने नहीं दिया जाएगा। धान की पराली जलाने की कोई भी घटना घटित न हो इसके लिए प्रशासन द्वारा व्यापक कार्य योजना तैयार कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि जिला एवं उपमंडल स्तर पर कमेटियों का गठन हो चुका हैं। जो पराली जलाने वाले किसानों पर नजर बनाए हुए हैं।

 क्या है जुर्माने का प्रावधान
राज्य सरकार द्वारा पराली जलाने पर जुर्माने तथा सजा दोनों का प्रावधान किया गया हैं। दो एकड़ तक धान की पराली जलाने पर 2500 रुपये, पांच एकड़ तक पराली जलाने पर 5000 रुपये और इससे अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर 15000 रुपये का जुर्माना किया जाएगा। यह जुर्माना पहली बार पराली जलाने पर होगा। इसके बाद भी अगर कोई व्यक्ति पराली जलाने का काम करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
- सतबीर सिंह कुंडू, एसडीएम जींद।

 
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