जींद: नौ साथियों की जान बचाकर खुद शहीद हुए असवीर सिंह, गांव में राजकीय सम्मान के साथ किया अंतिम संस्कार
सिक्किम में पेट्रोलिंग के दौरान गाड़ी खाई में गिरने से सुदकैन गांव निवासी जवान असवीर सिंह शहीद हुआ था। उनकी अंतिम सम्मान यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नौ साथियों की जान बचा खुद शहीद हुए हरियाणा के जींद जिले के सुदकैन कलां गांव निवासी हवलदार असवीर सिंह का सोमवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना से आए जवानों ने उन्हें सलामी दी। असवीर 31 दिसंबर को सिक्किम में भारत-चीन सीमा के पास पेट्रोलिंग के दौरान गाड़ी खाई में गिरने से शहीद हो गए थे।
शहीद के चाचा राधा कृष्ण ने बताया कि पेट्रोलिंग से लौटते समय रास्ता संकरा था और चालक नया होने के कारण गाड़ी आगे ले जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। तभी असवीर ने चालक और बाकी नौ साथियों को नीचे उतारते हुए खुद गाड़ी को निकालने की बात कही। असवीर एरिया से परिचित थे। वह अपने साथियों की जान जोखिम में नहीं डालना चाहते थे।
उन्होंने साथियों को कहा था, मैं गाड़ी निकालता हूं, आप सभी पीछे-पीछे पैदल आओ। असवीर आगे बढ़े तो गाड़ी खाई में जा गिरी। असवीर सिंह के सिर में चोट आने की वजह से वे शहीद हो गए। परिवार के इकलौते बेटे थे। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटे, एक बेटी व माता-पिता को छोड़ गए हैं। असवीर सिंह 19 साल से आर्म्ड कोर -7 कैवलियन में कार्यरत थे। परिवार नरवाना कस्बे के सुभाष नगर में रहता है। लेकिन अंतिम संस्कार पैतृक गांव में ही किया गया।
मां बोली अमर हो गया बेटा
बेटे के शहीद हो जाने के बाद शहीद असवीर की मां कलमेश भी अंतिम यात्रा में शामिल हुई। उन्होंने असवीर सिंह अमर रहे के नारे भी लगाए। भावुक अवस्था में कमलेश ने कहा कि असवीर उनका इकलौता बेटा था। जो देश की सेवा करते करते वीरगति को प्राप्त हो गया। असवीर को 12 वर्ष व नौ वर्ष के दो बेटे व पांच वर्ष की एक बेटी है। शहीद के पिता बहादुर सिंह व मां कमलेश ने कहा कि वे अपने पोते-पोती को भी देश की सेवा के लिए अग्रसर करेंगे। माता पिता ने कहा कि असवीर की शहादत पर हमारा सिर गर्व से ऊंचा किया है।
अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए साथियों की मदद करते रहे असवीर
असवीर सिंह का शव लेकर पहुंचे सैनिकों ने बताया कि जिस वाहन से असवीर सिंह पेट्रोलिंग से लौट रहे थे, उसमें कई लोग सवार थे। यह गाड़ी खाई में गिरने पर हवलदार असबीर ने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए वाहन में सवार अपने बाकी सैनिक साथियों को सुरक्षित बाहर निकाला, लेकिन दुर्भाग्यवश असवीर की जान नहीं बच सकी।