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Jind News: साढ़े तीन साल पहले खरीदी जमीन नहीं हुई जाट धर्मार्थ सभा के नाम
Thu, 29 Feb 2024 12:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 29 Feb 2024 12:04 AM IST
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28जेएनडी21 : जाट धर्मार्थ सभा द्वारा संचालित जाट धर्मशाला का फाइल फोटो। संवाद
जींद। जाट धर्मार्थ सभा ने साढ़े 3 साल पहले रोहतक रोड पर कोचिंग सेंटर के लिए एक करोड़ रुपये में जो जमीन खरीदी थी, वह आज तक संस्था के नाम नहीं हो पाई है। अब संस्था पर प्रशासक की नियुक्ति हो चुकी है, इसलिए अब यह जमीन संस्था के नाम करवाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।
जाट धर्मार्थ सभा ने लगभग दो हजार गज जमीन चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के पीछे खरीदी थी। यह जमीन जिस समय खरीदी गई, उस समय जाट धर्मार्थ सभा के प्रधान वजीर सिंह सहारण थे। उस समय यह जमीन संस्था के नाम नहीं हो पाई, क्योंकि इसमें तकनीकी कमियां सामने आ रही थीं। उसके बाद देवव्रत ढांडा ने संस्था के प्रधान की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने भी जमीन नाम करवाने के प्रयास किए, पर नहीं हो पाई।
कोचिंग सेंटर खोलने की थी योजना
जाट धर्मार्थ सभा ने यह जमीन कोचिंग सेंटर खोलने के लिए ली थी। एक तो जमीन का काफी दूर होना तथा दूसरा संस्था के नाम जमीन नहीं होना अपने आप में सवालिया निशान खड़ा करता है। संस्था का मकसद था कि यहां पर बच्चों को कोचिंग दी जाएगी और समाज के बच्चे आगे बढ़ेंगे, लेकिन यहां कोचिंग सेंटर बनना तो दूर आज तक यह जमीन ही संस्था की नहीं हुई है।
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जमीन के बारे में पता किया जा रहा है। जो जमीन संस्था ने खरीदी थी, वह साझी खेवट और खातों की है। पहले खेवट और खाते राजस्व रिकॉर्ड में अलग करवाए जाएंगे। जल्द ही जमीन संस्था के नाम होगी और जिस मकसद के लिए जमीन ली गई थी, उसे पूरा किया जाएगा। -डॉ. कुलदीप राणा, प्रशासक, जाट धर्मार्थ सभा।
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जाट धर्मार्थ सभा ने लगभग दो हजार गज जमीन चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय के पीछे खरीदी थी। यह जमीन जिस समय खरीदी गई, उस समय जाट धर्मार्थ सभा के प्रधान वजीर सिंह सहारण थे। उस समय यह जमीन संस्था के नाम नहीं हो पाई, क्योंकि इसमें तकनीकी कमियां सामने आ रही थीं। उसके बाद देवव्रत ढांडा ने संस्था के प्रधान की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने भी जमीन नाम करवाने के प्रयास किए, पर नहीं हो पाई।
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कोचिंग सेंटर खोलने की थी योजना
जाट धर्मार्थ सभा ने यह जमीन कोचिंग सेंटर खोलने के लिए ली थी। एक तो जमीन का काफी दूर होना तथा दूसरा संस्था के नाम जमीन नहीं होना अपने आप में सवालिया निशान खड़ा करता है। संस्था का मकसद था कि यहां पर बच्चों को कोचिंग दी जाएगी और समाज के बच्चे आगे बढ़ेंगे, लेकिन यहां कोचिंग सेंटर बनना तो दूर आज तक यह जमीन ही संस्था की नहीं हुई है।
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जमीन के बारे में पता किया जा रहा है। जो जमीन संस्था ने खरीदी थी, वह साझी खेवट और खातों की है। पहले खेवट और खाते राजस्व रिकॉर्ड में अलग करवाए जाएंगे। जल्द ही जमीन संस्था के नाम होगी और जिस मकसद के लिए जमीन ली गई थी, उसे पूरा किया जाएगा। -डॉ. कुलदीप राणा, प्रशासक, जाट धर्मार्थ सभा।

28जेएनडी21 : जाट धर्मार्थ सभा द्वारा संचालित जाट धर्मशाला का फाइल फोटो। संवाद