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Jind News: चंद्रयान-3 में योगदान से चमका करसोला, युवाओं को मिली नई प्रेरणा
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11 जुलाना 01: करसोला गांव का प्राथमिक स्कूल जहां पर यह सभी पढ़े और कामयाब हुए।
जुलाना। गांव करसोला के लोगों ने मेहनत, प्रतिभा और लगन के दम पर देश-दुनिया में अलग पहचान बनाई है। कोई देश के अंतरिक्ष अभियान में योगदान देकर गांव का नाम रोशन कर रहा है तो कोई उद्योग, व्यापार, शिक्षा और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
खास बात यह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने के बावजूद करसोला के लोगों का अपनी जन्मभूमि से जुड़ाव आज भी पहले जैसा ही मजबूत बना हुआ है। गांव के मूल निवासी जसमेर लाठर ने भारत के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 मिशन में उपयोग किए गए विशेष नट-बोल्ट के निर्माण और आपूर्ति से जुड़कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चंद्रयान-3 की सफलता के साथ ही करसोला का नाम भी गौरव के साथ चर्चा में आया। ग्रामीणों का कहना है कि जसमेर लाठर की उपलब्धि ने गांव के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दी है।
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करसोला के अनेक युवा आज इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और जर्मनी सहित कई देशों में रोजगार और व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं। विदेशों में रहने वाले ग्रामीण समय-समय पर गांव लौटते हैं और सामाजिक, धार्मिक तथा विकास कार्यों में सहयोग देकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
देश के भीतर भी करसोला के लोगों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। दिल्ली, बेंगलुरु, वडोदरा, गाजियाबाद समेत विभिन्न शहरों में गांव के लोग उद्योग, व्यापार, शिक्षा और अन्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं। दूर रहने के बावजूद वे गांव के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं और विकास कार्यों के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि करसोला की सबसे बड़ी पहचान यहां के लोगों का अपनी जड़ों से जुड़ाव है। वे जहां भी जाते हैं, अपनी कार्यशैली और मेहनत से सम्मान अर्जित करते हैं, लेकिन अपनी जन्मभूमि को कभी नहीं भूलते।
यही वजह है कि देश और विदेश में फैले करसोला के लोग आज भी गांव के सामाजिक सरोकारों और विकास की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। अपनी उपलब्धियों, मेहनत और सामाजिक प्रतिबद्धता के कारण करसोला आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि प्रतिभा, परिश्रम और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है। सभी ने प्राथमिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है।
बाक्स
चंद्रयान-3 जैसे ऐतिहासिक मिशन से जुड़ना उनके लिए गर्व की बात है। मैं जहां भी रहूं पहचान करसोला गांव से ही है और गांव का नाम देशभर में ऊंचा होते देख मुझे खुशी मिलती है। -जसमेर लाठर।
बाक्स
रोजगार और व्यवसाय के कारण मैं वर्षों से गुजरात में रह रहा हूं लेकिन मन आज भी गांव में बसता है। गांव के विकास और सामाजिक कार्यों से वे लगातार जुड़ा रहता हूं और अवसर मिलने पर गांव जरूर आता हूं। -सुरेन्द्र सिंह लाठर।
बाक्स
करसोला की मिट्टी ने मुझे जीवन के संस्कार दिए हैं। गांव से दूर रहने के बावजूद मेरा लगाव कभी कम नहीं हुआ। गांव की प्रगति और नई पीढ़ी की उपलब्धियां हमेशा गर्व का अनुभव कराती हैं। -राजकिशन शर्मा,पूर्व गृह मंत्रालय कर्मचारी
बाक्स
कई परिवारों के सदस्य बाहर रह रहे हैं लेकिन सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी बनी रहती है। यह गांव की एकता और संस्कारों का परिचायक है। - संदीप लाठर, ग्रामीण।
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खास बात यह है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचने के बावजूद करसोला के लोगों का अपनी जन्मभूमि से जुड़ाव आज भी पहले जैसा ही मजबूत बना हुआ है। गांव के मूल निवासी जसमेर लाठर ने भारत के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 मिशन में उपयोग किए गए विशेष नट-बोल्ट के निर्माण और आपूर्ति से जुड़कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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चंद्रयान-3 की सफलता के साथ ही करसोला का नाम भी गौरव के साथ चर्चा में आया। ग्रामीणों का कहना है कि जसमेर लाठर की उपलब्धि ने गांव के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा दी है।
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करसोला के अनेक युवा आज इंग्लैंड, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और जर्मनी सहित कई देशों में रोजगार और व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं। विदेशों में रहने वाले ग्रामीण समय-समय पर गांव लौटते हैं और सामाजिक, धार्मिक तथा विकास कार्यों में सहयोग देकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।
देश के भीतर भी करसोला के लोगों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। दिल्ली, बेंगलुरु, वडोदरा, गाजियाबाद समेत विभिन्न शहरों में गांव के लोग उद्योग, व्यापार, शिक्षा और अन्य सेवाओं से जुड़े हुए हैं। दूर रहने के बावजूद वे गांव के सुख-दुख में सहभागी बनते हैं और विकास कार्यों के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि करसोला की सबसे बड़ी पहचान यहां के लोगों का अपनी जड़ों से जुड़ाव है। वे जहां भी जाते हैं, अपनी कार्यशैली और मेहनत से सम्मान अर्जित करते हैं, लेकिन अपनी जन्मभूमि को कभी नहीं भूलते।
यही वजह है कि देश और विदेश में फैले करसोला के लोग आज भी गांव के सामाजिक सरोकारों और विकास की गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। अपनी उपलब्धियों, मेहनत और सामाजिक प्रतिबद्धता के कारण करसोला आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि प्रतिभा, परिश्रम और अपनी संस्कृति से जुड़े रहने की प्रेरणादायक मिसाल बन चुका है। सभी ने प्राथमिक स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है।
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चंद्रयान-3 जैसे ऐतिहासिक मिशन से जुड़ना उनके लिए गर्व की बात है। मैं जहां भी रहूं पहचान करसोला गांव से ही है और गांव का नाम देशभर में ऊंचा होते देख मुझे खुशी मिलती है। -जसमेर लाठर।
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रोजगार और व्यवसाय के कारण मैं वर्षों से गुजरात में रह रहा हूं लेकिन मन आज भी गांव में बसता है। गांव के विकास और सामाजिक कार्यों से वे लगातार जुड़ा रहता हूं और अवसर मिलने पर गांव जरूर आता हूं। -सुरेन्द्र सिंह लाठर।
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करसोला की मिट्टी ने मुझे जीवन के संस्कार दिए हैं। गांव से दूर रहने के बावजूद मेरा लगाव कभी कम नहीं हुआ। गांव की प्रगति और नई पीढ़ी की उपलब्धियां हमेशा गर्व का अनुभव कराती हैं। -राजकिशन शर्मा,पूर्व गृह मंत्रालय कर्मचारी
बाक्स
कई परिवारों के सदस्य बाहर रह रहे हैं लेकिन सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी बनी रहती है। यह गांव की एकता और संस्कारों का परिचायक है। - संदीप लाठर, ग्रामीण।

11 जुलाना 01: करसोला गांव का प्राथमिक स्कूल जहां पर यह सभी पढ़े और कामयाब हुए।

11 जुलाना 01: करसोला गांव का प्राथमिक स्कूल जहां पर यह सभी पढ़े और कामयाब हुए।

11 जुलाना 01: करसोला गांव का प्राथमिक स्कूल जहां पर यह सभी पढ़े और कामयाब हुए।

11 जुलाना 01: करसोला गांव का प्राथमिक स्कूल जहां पर यह सभी पढ़े और कामयाब हुए।