प्रदेश में गठबंधन की नहीं, बल्कि भाजपा की सरकार है, जिसके आगे जजपा ने सर्मपण किया है। प्रदेश के लोगों ने जजपा को भाजपा के विरोध में वोट दिया था, लेकिन जजपा ने भाजपा में जाकर लोगों के साथ विश्वासघात किया है। घर-घर शराब के ठेके खोल कर प्रदेश में नशे को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह बात पूर्व सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोगों को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि बजट ने स्पष्ट कर दिया कि जजपा ने भाजपा को समर्थन नहीं दिया बल्कि समर्पण किया है। जजपा के घोषणा पत्र को भाजपा की सरकार ने फाड़ कर रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। हरियाणा की गठबंधन सरकार को भ्रष्टाचार में भी सदाचार दिखाई देता है। सरकार के समर्थक विधायक सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पूरे प्रदेश में लूट मची हुई है और सरकार किसी भी तरह की जांच को तैयार नहीं है। अगर निष्पक्ष जांच हो जाए तो ये स्पष्ट हो जाएगा कि प्रदेश पर तीन गुना कर्ज क्यों बढ़ता जा रहा है। उन्होंने प्रदेश के बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि भाजपा-जजपा गठबंधन राज में प्रदेश 1,98,700 करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गया है। एक नवंबर 1966 से लेकर 2013-14 तक हरियाणा में नौ मुख्यमंत्री बने और सभी के कार्यकाल का कर्ज मिलाकर कुल कर्ज 61 हजार करोड़ का था। अकेले मुख्यमंत्री ने सभी नौ मुख्यमंत्रियों का रिकॉर्ड तोड़कर छह साल में इस कर्ज को 1,98,700 करोड़ पर पहुंचा दिया। इस अवसर पर रोहित दलाल, प्रोफेसर विरेंद्र, सुभाष देशवाल, होशियार सिंह दलाल, सुरेश गोयत, जगदीश, सत्तु ढांडा, बलराम कटवाल, दजबीर और सुनील मौजूद रहे।