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टीबी का इलाज संभव, इलाज मुफ्त, रखें सावधानी
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Fri, 24 Mar 2017 11:55 PM IST
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टीबी की जानकारी देते चिकित्सक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खरकरामजी गांव स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विश्व क्षय रोग पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया मौजूद रहे। इस मौके पर उप सिविल सर्जन डॉ. मंजुला, डॉ. राजेश भोला, डॉ. नीरज, डॉ. प्रदीप व गांव की सरपंच कविता भी उपस्थित रहे।
चिकित्सकों ने कहा कि सावधानी बरतकर टीबी से बचा जा सकता है। टीबी का इलाज संभव है और इसका इलाज मुफ्त मिलता है।
सिविल सर्जन डा. संजय दहिया ने कहा कि ट्यूबरक्लोसिस एक संक्रामक रोग होता है, जो बैक्टीरिया की वजह से होता है। यह बैक्टीरिया शरीर के सभी अंगों में प्रवेश कर जाता है। हालांकि ये ज्यादातर फेफड़ों में ही पाया जाता है। लेकिन इसके अलावा आंतों, मस्तिष्क, हड्डियों, जोड़ों, गुर्दे, त्वचा तथा हृदय भी टीबी से ग्रसित हो सकते हैं। टीबी बैक्टीरिया सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचकर कई गुना बढ़ जाता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि भारत में टीबी के फैलने का एक मुख्य कारण बीमारी के लिए लोगों का सचेत न होना है।
टीबी के लक्षण
डॉ. राजेश भोला ने टीबी के लक्षणों के बारे में बताया कि दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार (जो खासतौर पर शाम को बढ़ती है), छाती में तेज दर्द, वजन का अचानक घटना, भूख में कमी आना, बलगम के साथ खून का आना, बहुत ज्यादा फेफड़ों का इंफेक्शन होना, सांस लेने में तकलीफ होना है। उन्होंने कहा कि विश्व क्षय रोग दिवस के माध्यम से हमें टीबी जैसी समस्या के विषय में और इससे बचने के उपायों के विषय में बात करने में मदद मिलती है।
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चिकित्सकों ने कहा कि सावधानी बरतकर टीबी से बचा जा सकता है। टीबी का इलाज संभव है और इसका इलाज मुफ्त मिलता है।
सिविल सर्जन डा. संजय दहिया ने कहा कि ट्यूबरक्लोसिस एक संक्रामक रोग होता है, जो बैक्टीरिया की वजह से होता है। यह बैक्टीरिया शरीर के सभी अंगों में प्रवेश कर जाता है। हालांकि ये ज्यादातर फेफड़ों में ही पाया जाता है। लेकिन इसके अलावा आंतों, मस्तिष्क, हड्डियों, जोड़ों, गुर्दे, त्वचा तथा हृदय भी टीबी से ग्रसित हो सकते हैं। टीबी बैक्टीरिया सांस के माध्यम से फेफड़ों तक पहुंचकर कई गुना बढ़ जाता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि भारत में टीबी के फैलने का एक मुख्य कारण बीमारी के लिए लोगों का सचेत न होना है।
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टीबी के लक्षण
डॉ. राजेश भोला ने टीबी के लक्षणों के बारे में बताया कि दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार (जो खासतौर पर शाम को बढ़ती है), छाती में तेज दर्द, वजन का अचानक घटना, भूख में कमी आना, बलगम के साथ खून का आना, बहुत ज्यादा फेफड़ों का इंफेक्शन होना, सांस लेने में तकलीफ होना है। उन्होंने कहा कि विश्व क्षय रोग दिवस के माध्यम से हमें टीबी जैसी समस्या के विषय में और इससे बचने के उपायों के विषय में बात करने में मदद मिलती है।
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