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बाजार की लड़ाई में चाइनीज सामान को मात दे रहे हमारे दीये
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Sun, 16 Oct 2016 12:05 AM IST
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मिट्टी से निर्मित दीये खरीदती महिला।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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देशभर में चाइनीज सामान के खिलाफ चल रही मुहिम से जींद भी अछूता नहीं है। इस मुहिम का यहां भी व्यापक असर देखने को मिला है। इसी के चलते पिछले वर्ष की तुलना में चाइनीज सामान की तरफ लोगों का काफी कम रुझान देखने को मिल रहा है। चाइनीज सामान की बिक्री कम होने से इस बार मिट्टी के दीयों का बाजार गुलजार है। लोग भी मिट्टी के दीयों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। कुम्हारों ने भी मौके की नजाकत को देखते हुए इस बार मिट्टी से निर्मित कई तरह के शानदार आइटम बाजार में उतारे हैं। कुम्हारों का मानना है कि चाइनीज के विरोध में देश में चली इस मुहिम से इस बार सही मायने में उनकी दीपावली अच्छी मनेगी। यही वजह है कि म्हारै कुम्हारों के चेहरों पर उम्मीद की खुशी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक दीये बना रहे हैं।
अभी तक पिछड़ रहे थे म्हारे कुम्हार
गौरतलब है कि बाजार में बढ़ते चाइनीज आइटमों के चलते कुम्हारों का कामधंधा बुरी तरह से चौपट हो गया था। चाइनीज की मार के चलते हर वर्ष उनकी दिवाली फीकी रहती थी और मिट्टी से निर्मित दीयों से लोगों का मोह भंग होने लगा था, लेकिन इस बार चाइनीज सामान के खिलाफ देशभर में चल रही मुहिम से एक बार फिर से कुम्हारों के दिन बोहर गए हैं। इस बार लोगों ने चाइनीज आइटमों का बहिष्कार कर स्वदेशी आइटमों की तरफ रुझान किया है। इससे मिट्टी से निर्मित दीये व दूसरी आइटमों की बिक्री में काफी वृद्धि हुई है। इससे चाइनीज के बाजार पर बुरी मार पड़ी है।
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मॉर्डन पद्धति का लिया सहारा
कुम्हार बुद्धराम व राजेंद्र ने बताया कि अपने रोजगार को बढ़ाने के लिए उन्होंने मॉर्डन पद्धति का सहारा लिया है। इस बार मार्केट में दीयों वाली थाली की खास मांग है। इसकी कीमत 50 रुपये है। इसके अलावा 20 से 300 रुपये तक की रंग-बिरंगी मूर्तियां, 20 से 200 रुपये तक के नए-नए डिजाइनों के स्टैंड वाले दीए, 30 रुपये की हटड़ी व 50 रुपये के 100 साधारण दीये मार्केट में हैं। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत दीयों की मांग बढ़ी है।
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