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सरकार और प्रशासन की बेरुखी से हांफ रहा जींद का औद्योगिक क्षेत्र
अमर उजाला ब्यूरो जींद।
Updated Thu, 04 May 2017 12:22 AM IST
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गंदे पानी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर के उद्योगों को संजीवनी देने के लिए 35 साल पहले हांसी रोड पर बना औद्योगिक क्षेत्र अब प्रशासन और सरकार की लापरवाही से खुद ही हांफने लगा है। 25 साल में यहां चल रही 20 इकाइयां बंद हो चुकी हैं और जो चल रही हैं, वे भी बंद होने के कगार पर हैं। इससे जींद का उद्योग और यहां के उद्योगपति दोनों ही परेशानी में हैं।
1982 में औद्योगिक क्षेत्र बनने के बाद 1992 में यहां करीब 35 इकाइयां चल रही थी। फिलहाल 15 उद्योग बचे हैं। वहीं शहर में औद्योगिक क्षेत्र कुल 28 एकड़ में बना है, जिसमें कुल 78 प्लॉट हैं। इन पर 48 व्यक्तिओं का मालिकाना हक है। उद्यमी उद्योगों की दुर्गति के लिए एचएसआईआईडीसी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उद्यमियों के अनुसार कलेक्टर रेट भी अधिक वसूले जा रहे हैं, जबकि सरकारी फीस 5,500 रुपये है। एचएसआईआईडीसी 18000 हजार रुपये स्टांप फीस वसूल कर रहा है। इससे कोई भी नया उद्योगपति यहां उद्योग स्थापित करने से परहेज करता है। एचएसआईआईडीसी का कार्य तो बस मेंटेनेंस चार्ज वसूल करने तक ही सीमित रह गया है, उसे उद्यमियों को हो रही परेशानी से जैसे कोई लेना-देना ही नहीं है।
बिजली और निकासी की समस्या का नहीं कोई हल
औद्योगिक इकाई की सबसे बड़ी समस्या बिजली और गंदे पानी की है। निगम द्वारा पूरे 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने का प्रावधान है, लेकिन बमुश्किल 10 से 12 घंटे भी बिजली नहीं मिलती। इसकी मुख्य वजह औद्योगिक इकाई को दी जाने वाली सप्लाई के साथ कई गांवों तथा कालोनियों को निगम ने जोड़ा है। इस वजह से ओवरलोड होने व अन्य आने वाली तकनीकी खराबियों की वजह से आए दिन कई घंटो बिजली गुल रहती है। इकाई की बिजली सप्लाई के साथ गांवों व कालोनियों की सप्लाई क्यों जोड़ी गई है, इसका जवाब निगम के अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार इस लाइन से कई वर्षों से गांवों में बिजली सप्लाई दी जा रही है। इसके अलावा इकाई का पानी बाहर निकालने का एचएसआईआईडीसी अब तक कोई हल नहीं निकाल पाई है। उद्यमियों के अनुसार माह में एकाध बार ही सीनियर मैनेजर जींद शाखा के कार्यालय में आते हैं।
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अब तक बंद हुए मुख्य उद्योग
जींद क्षेत्र में एक बार बड़े उद्योग स्थापित होना शुरू हो गया था, लेकिन सुविधा नहीं मिलने के कारण यहां से उद्योगपतियों ने यहां से जाना शुरू कर दिया। यहां पर जूतों की फैक्टरी, कपड़ा मिल, सर्जिकल कॉटन मिल, धागा मिल, पंखा फैक्टरी बंद हो चुकी है। फैक्टरी बंद होने से सैकड़ों लोगों का रोजगार भी खत्म हो गया है।
डीएलसीसी से होगा समाधान
डीसी विनय सिंह ने बताया कि औद्योगिक स्थापित करने के लिए जिलास्तर पर डीएलसीसी और डीएलपीजी कमेटी का गठन किया है। कमेटी का काम किसी प्रकार की उद्योगपति को कोई समस्या है, तो उस समस्या का समाधान किया जाएगा।
मूलभूत सुविधा का आभाव
यहां औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ग्रीन बेल्ट व सड़कों की हालात काफी खराब है। इससे सारा दिन बदबू आती रहती है। औद्योगिक क्षेत्र की लगभग सभी सड़क गड्ढों में तबदील हो चुकी है। -सुधीर गर्ग, प्रधान औद्योगिक ईकाई।
बिजली व पानी निकासी की है बड़ी समस्या
औद्योगिक क्षेत्र बिजली व निकासी की बड़ी समस्या है। बरसात के समय तो यहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं होता। यही हालत बिजली का है। औद्योगिक बिजली फीडर से गांव और कॉलोनियों को जोड़ रखा है, जिसके पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल पाती। -प्यारे लाल सिंगला, उद्योगपति।
औद्योगिक क्षेत्र में सुविधा कम मिलती है, जबकि चार्ज उसी तरीके वसूले जा रहे है। इसके कारण इस क्षेत्र में उद्योग चलाना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण पुराने भी छोड़ने पर मजबूर है। सरकार को चाहिए कि औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए। अगर यहां पर उद्योग स्थापित होंगे, तो लोगों को रोजगार मिलेंगे। -सुशील कुमार, उद्योगपति
औद्योगिक क्षेत्र के सुधार के लिए एस्टीमेट बनाकर सरकार के पास भेजा गया है। जल्द ही इससे मंजूरी मिल जाएगी। बिजली की समस्या के समाधान के लिए अलग से औद्योगिक क्षेत्र के लिए फीडर का निर्माण किया गया है, जो जल्द ही चालू होने वाला है। इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की समस्या नहीं रहेगी। -कृष्ण कुमार, मैनेजर, औद्योगिक इकाई।
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1982 में औद्योगिक क्षेत्र बनने के बाद 1992 में यहां करीब 35 इकाइयां चल रही थी। फिलहाल 15 उद्योग बचे हैं। वहीं शहर में औद्योगिक क्षेत्र कुल 28 एकड़ में बना है, जिसमें कुल 78 प्लॉट हैं। इन पर 48 व्यक्तिओं का मालिकाना हक है। उद्यमी उद्योगों की दुर्गति के लिए एचएसआईआईडीसी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उद्यमियों के अनुसार कलेक्टर रेट भी अधिक वसूले जा रहे हैं, जबकि सरकारी फीस 5,500 रुपये है। एचएसआईआईडीसी 18000 हजार रुपये स्टांप फीस वसूल कर रहा है। इससे कोई भी नया उद्योगपति यहां उद्योग स्थापित करने से परहेज करता है। एचएसआईआईडीसी का कार्य तो बस मेंटेनेंस चार्ज वसूल करने तक ही सीमित रह गया है, उसे उद्यमियों को हो रही परेशानी से जैसे कोई लेना-देना ही नहीं है।
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बिजली और निकासी की समस्या का नहीं कोई हल
औद्योगिक इकाई की सबसे बड़ी समस्या बिजली और गंदे पानी की है। निगम द्वारा पूरे 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने का प्रावधान है, लेकिन बमुश्किल 10 से 12 घंटे भी बिजली नहीं मिलती। इसकी मुख्य वजह औद्योगिक इकाई को दी जाने वाली सप्लाई के साथ कई गांवों तथा कालोनियों को निगम ने जोड़ा है। इस वजह से ओवरलोड होने व अन्य आने वाली तकनीकी खराबियों की वजह से आए दिन कई घंटो बिजली गुल रहती है। इकाई की बिजली सप्लाई के साथ गांवों व कालोनियों की सप्लाई क्यों जोड़ी गई है, इसका जवाब निगम के अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों के अनुसार इस लाइन से कई वर्षों से गांवों में बिजली सप्लाई दी जा रही है। इसके अलावा इकाई का पानी बाहर निकालने का एचएसआईआईडीसी अब तक कोई हल नहीं निकाल पाई है। उद्यमियों के अनुसार माह में एकाध बार ही सीनियर मैनेजर जींद शाखा के कार्यालय में आते हैं।
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अब तक बंद हुए मुख्य उद्योग
जींद क्षेत्र में एक बार बड़े उद्योग स्थापित होना शुरू हो गया था, लेकिन सुविधा नहीं मिलने के कारण यहां से उद्योगपतियों ने यहां से जाना शुरू कर दिया। यहां पर जूतों की फैक्टरी, कपड़ा मिल, सर्जिकल कॉटन मिल, धागा मिल, पंखा फैक्टरी बंद हो चुकी है। फैक्टरी बंद होने से सैकड़ों लोगों का रोजगार भी खत्म हो गया है।
डीएलसीसी से होगा समाधान
डीसी विनय सिंह ने बताया कि औद्योगिक स्थापित करने के लिए जिलास्तर पर डीएलसीसी और डीएलपीजी कमेटी का गठन किया है। कमेटी का काम किसी प्रकार की उद्योगपति को कोई समस्या है, तो उस समस्या का समाधान किया जाएगा।
मूलभूत सुविधा का आभाव
यहां औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ग्रीन बेल्ट व सड़कों की हालात काफी खराब है। इससे सारा दिन बदबू आती रहती है। औद्योगिक क्षेत्र की लगभग सभी सड़क गड्ढों में तबदील हो चुकी है। -सुधीर गर्ग, प्रधान औद्योगिक ईकाई।
बिजली व पानी निकासी की है बड़ी समस्या
औद्योगिक क्षेत्र बिजली व निकासी की बड़ी समस्या है। बरसात के समय तो यहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं होता। यही हालत बिजली का है। औद्योगिक बिजली फीडर से गांव और कॉलोनियों को जोड़ रखा है, जिसके पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिल पाती। -प्यारे लाल सिंगला, उद्योगपति।
औद्योगिक क्षेत्र में सुविधा कम मिलती है, जबकि चार्ज उसी तरीके वसूले जा रहे है। इसके कारण इस क्षेत्र में उद्योग चलाना मुश्किल हो जाता है। इसके कारण पुराने भी छोड़ने पर मजबूर है। सरकार को चाहिए कि औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए। अगर यहां पर उद्योग स्थापित होंगे, तो लोगों को रोजगार मिलेंगे। -सुशील कुमार, उद्योगपति
औद्योगिक क्षेत्र के सुधार के लिए एस्टीमेट बनाकर सरकार के पास भेजा गया है। जल्द ही इससे मंजूरी मिल जाएगी। बिजली की समस्या के समाधान के लिए अलग से औद्योगिक क्षेत्र के लिए फीडर का निर्माण किया गया है, जो जल्द ही चालू होने वाला है। इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र में बिजली की समस्या नहीं रहेगी। -कृष्ण कुमार, मैनेजर, औद्योगिक इकाई।