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स्कूल और कॉलेज जाना जरूरी, बसों पर लटककर सफर करना मजबूरी

Wed, 22 Dec 2021 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 22 Dec 2021 12:03 AM IST
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It is necessary to go to school and college, it is a compulsion to travel by hanging on buses
बस स्टैंड परिसर से निकलती बस के दरवाजों पर लटककर सफर करते विद्यार्थी। - फोटो : Jind
जींद। बसों की कमी के चलते यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी विद्यार्थियों को स्कूल और कॉलेज जाने में होती है। ग्रामीण रूट पर बसों की कमी के चलते उन्हें बसों के दरवाजों पर लटककर सफर करना पड़ता है। ऐसे में विद्यार्थियों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है।
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रोडवेज डिपो में पिछले एक साल के दौरान आठ बसें कंडम हो चुकी हैं। वहीं 15 बसों की समय सीमा बढ़ाने के लिए मुख्यालय रिपोर्ट भेजी गई है। इस दौरान डिपो में किलोमीटर स्कीम वाली 15 बसें शामिल हुई हैं, लेकिन यात्रियों की संख्या के हिसाब से डिपो में बसों की संख्या कम से कम 200 होनी चाहिए। इस समय डिपो में 162 रोडवेज बसें ऑन रूट हैं, जिसमें किलोमीटर स्कीम वाली 35 बसें शामिल हैं। वहीं डिपो में 110 प्राइवेट बसें भी हैं। जिले की आबादी 13 से 14 लाख है, जिसमें से हर रोज 15 से 16 हजार यात्री रोडवेज की बसों में सफर करते हैं। ऐेसे में यात्रियों की संख्या के हिसाब से बसों की संख्या कम है। वहीं नए साल में डिपो को 40 नई बसें मिलने की संभावना है।
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कई बार खड़े होकर करना पड़ता है सफर
ग्रामीण रूट पर बसों की संख्या काफी कम है। दोपहर दो बजे के बाद जब शिक्षण संस्थानों की छुट्टी होती है तो बस स्टैंड परिसर में विद्यार्थियों की संख्या काफी ज्यादा होती है। ऐसे में कई बार घर जाने के लिए बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ता है। छात्राओं की सुविधा के लिए चाहिए कि ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या बढ़ाई जाए।
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- रीना, छात्रा।
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ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या सीमित
ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या सीमित है। सुबह गांव से शहर आने व शाम के समय शहर से गांव जाने के लिए ग्रामीण रूटों पर बसों की व्यवस्था है। दिन में ग्रामीण रूटों पर बसों का परिचालन नहीं होता। ऐसे में विद्यार्थियों के साथ-साथ जो यात्री गांव से शहर नौकरी करने आते हैं, उन्हें भी निर्धारित बसों में ही आना-जाना पड़ता है। लंबे रूटों की तरह ग्रामीण रूटों पर भी हर दस से 15 मिनट में बस चलनी चाहिए।
- प्रिया, छात्रा।
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दरवाजों पर लटक कर करना पड़ता है सफर
ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या काफी कम है। बसों की कमी के कारण विद्यार्थियों को दरवाजों पर लटक कर सफर करना पड़ता है। ऐसे में विद्यार्थियाें के चोटिल होने का डर बना रहता है। ज्यादातर ग्रामीण रूटों पर सुबह व शाम के समय ही बसें चलती हैं जो यात्रियों को सुबह गांव से शहर ले आती है और शाम के समय शहर से गांव वापस ले जाती है। दिनभर में ग्रामीण रूटों पर बस कम होने के कारण परेशानी होती है।

- अक्षय, विद्यार्थी।
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पर्याप्त संख्या में चल रही बसें
सभी रूटों पर पर्याप्त संख्या में बसें चल रही हैं। रोडवेज यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा देने के लिए प्रयासरत है। ग्रामीण रूटों पर चलने वाले विद्यार्थियों को चाहिए कि अगर एक बस में यात्री पूरे हो जाते हैं तो वह दूसरी बस में चले जाएं। खिड़कियों पर लटककर यात्रा करने से चोटिल होने का डर बना रहता है। रोडवेज चालक व परिचालक कई बार विद्यार्थियों को खिड़कियों पर लटक कर यात्रा नहीं करने के लिए भी कहते रहते हैं।
- गुलाब सिंह दूहन, रोडवेज जीएम जींद डिपो।
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