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Jind News: बीमा कंपनी ने घायल को नहीं दिया पूरा खर्च, जुर्माना
Sat, 03 Feb 2024 12:36 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 03 Feb 2024 12:36 AM IST
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जींद। अर्बन एस्टेट निवासी नीरज मित्तल को एलआईसी ने पूरे इलाज का खर्च नहीं दिया। जिला उपभोक्ता आयोग ने एलआईसी को दोषी करार देते हुए पूरा खर्च नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा उपभोक्ता को परेशान करने पर एलआईसी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
नीरज मित्तल ने बताया कि उसने एलआईसी से अपने परिवार की हेल्थ पॉलिसी ले रखी थी। पांच फरवरी 2017 को वह सड़क हादसे में घायल हो गया था। इसमें उसके कंधे की हड्डी टूट गई। जींद के चिकित्सकों ने उसे मेदांता अस्पताल गुरुग्राम रेफर कर दिया। उसके इलाज पर दो लाख 25 हजार रुपये खर्च हो गए। उसने बीमा पॉलिसी ले रखी थी। उसका प्रीमियम समय पर भरता था। इस सारे खर्चे के बिल एलआईसी ऑफिस में फरवरी 2017 में जमा करवा दिए। मार्च में बीमा कंपनी ने क्लेम के नाम पर मात्र उसे 47 हजार रुपये दिए। बाकी पैसे देने से मना कर दिया। जब बीमा कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया तो उसने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। 2021 में उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई शुरू की। बीमा कंपनी कोई भी ऐसा तथ्य अदालत में पेश नहीं कर पाई, जिससे यह साबित हो कि नीरज कुमार का क्लेम जो दिया गया है, वहीं मिलना चाहिए। उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन न्यायाधीश एके सरदार ने बीमा कंपनी को दोषी करार देते हुए मार्च 2017 से नौ प्रतिशत ब्याज समेत बची हुई क्लेम राशि देने के आदेश दिए। इसके अलावा उपभोक्ता को परेशान करने के लिए एलआईसी को 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो उपभोक्ता को मिलेगा।
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नीरज मित्तल ने बताया कि उसने एलआईसी से अपने परिवार की हेल्थ पॉलिसी ले रखी थी। पांच फरवरी 2017 को वह सड़क हादसे में घायल हो गया था। इसमें उसके कंधे की हड्डी टूट गई। जींद के चिकित्सकों ने उसे मेदांता अस्पताल गुरुग्राम रेफर कर दिया। उसके इलाज पर दो लाख 25 हजार रुपये खर्च हो गए। उसने बीमा पॉलिसी ले रखी थी। उसका प्रीमियम समय पर भरता था। इस सारे खर्चे के बिल एलआईसी ऑफिस में फरवरी 2017 में जमा करवा दिए। मार्च में बीमा कंपनी ने क्लेम के नाम पर मात्र उसे 47 हजार रुपये दिए। बाकी पैसे देने से मना कर दिया। जब बीमा कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया तो उसने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। 2021 में उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई शुरू की। बीमा कंपनी कोई भी ऐसा तथ्य अदालत में पेश नहीं कर पाई, जिससे यह साबित हो कि नीरज कुमार का क्लेम जो दिया गया है, वहीं मिलना चाहिए। उपभोक्ता आयोग के चेयरमैन न्यायाधीश एके सरदार ने बीमा कंपनी को दोषी करार देते हुए मार्च 2017 से नौ प्रतिशत ब्याज समेत बची हुई क्लेम राशि देने के आदेश दिए। इसके अलावा उपभोक्ता को परेशान करने के लिए एलआईसी को 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो उपभोक्ता को मिलेगा।
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रेवाड़ी। फार्म हाउस में पक्षी को पकड़ते काशीराम । संवाद

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