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अदालत के आदेश पर भी कब्जा मुक्त नहीं हो सका जींद

Sun, 15 Jan 2017 12:07 AM IST
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jind Updated Sun, 15 Jan 2017 12:07 AM IST
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रेलवे जंक्शन का प्रवेश द्वार, यहां नगर परिषद ने करीब दस फुट अतिक्रमण हटाने की निशानदेही की है। - फोटो : bureau

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अदालत के आदेश पर करीब एक साल पहले शुरू हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान में प्रशासन की सफलता और असफलता का ग्राफ बराबर है। तांगा चौक से नगर परिषद कार्यालय तक तो अधिकतर अतिक्रमण हटा दिया गया है, लेकिन इसके अलावा कहीं भी अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हटाया जा सका है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होनी है और इससे दस दिन पहले तक जिला प्रशासन को हाईकोर्ट में जवाब देना है। हालांकि नगर परिषद अतिक्रमण हटाने का दावा कर रहा है, लेकिन इस मामले को अदालत तक लेकर जाने वाली अन्ना टीम इससे इत्तफाक नहीं रखती।
पुराने शहर के साथ-साथ अधिकतर बाजारों और हाउसिंग बोर्ड, अर्बन एस्टेट जैसी कॉलोनियों में भी पक्के अतिक्रमण का बोलबाला है। बाजारों में जहां तीन से पांच फुट तक का अतिक्रमण है, वहीं अर्बन एस्टेट व हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पांच-आठ फुट तक सरकारी जमीन पर लोगों ने कब्जा किया हुआ है। कई जगह तो वाहन निकलने तक की जगह नहीं है। ऐसे में राहगीरों को काफी परेशानी हो रही है। इस मामले को लेकर अन्ना टीम ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। करीब एक साल पहले हुई सुनवाई में नगर परिषद ने अतिक्रमण हटाने के लिए समय मांगा। इस पर अदालत ने 27 जनवरी की तारीख तय करते हुए दस दिन पहले तक अतिक्रमण हटाने की रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए थे।
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यह है अतिक्रमण की स्थिति
मेन बाजार में अतिक्रमण हटने के बाद गली दोनों ओर से करीब दो-दो फुट तक चौड़ी हो गई है। वहीं पंजाबी बाजार में भी करीब 80 प्रतिशत तक अतिक्रमण हटा दिया गया है। यहां कुछ दुकानदारों ने अदालत से स्टे लिया है। अतिक्रमण हटने के बावजूद नगर परिषद ने नाली पीछे नहीं की है। पुरानी अनाज मंडी और काठ मंडी में कुछ लोगों ने स्टे लिया तो नगर परिषद का अभियान बीच में ही रुक गया। नई सब्जी मंडी में भी दुकानों के आगे करीब 30 फुट तक अतिक्रमण है। हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अतिक्रमण का आलम यह है कि सीवरेज लाइन ही घरों के अंदर आ गई। इसके चलते जन स्वास्थ्य विभाग को यहां दूसरी लाइन डालनी पड़ी। नगर परिषद ने रोहतक रोड, पुरानी सब्जी मंडी, शिव कॉलोनी, बैंड मार्केट, अग्रवाल मार्केट, आरा रोड सहित कई जगह अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया, लेकिन यह पूरा नहीं हो पाया है। अनौपचारिक रूप से नगर परिषद के अधिकारी भी स्वीकार रहे हैं कि अभी तक करीब 60 प्रतिशत अतिक्रमण ही हटा है।
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अधिकारियों को व्यक्तिगत बनाएंगे पार्टी
अदालत ने एक साल का समय दिया था, जो अतिक्रमण हटाने के लिए काफी था। शुरुआत में काफी अतिक्रमण हटाया भी गया, लेकिन इसके बाद अधिकारियों ने मामला ढीला छोड़ दिया। जहां अतिक्रमण हटना जरूरी था, उन प्वांट्स पर भी नहीं हटा है। इन सभी जगहों की फोटोग्राफी और दस्तावेज तैयार किए गए हैं जो अदालत में पेश किए जाएंगे। इसके आधार पर अब अन्ना टीम अधिकारियों को नाम से व्यक्तिगत अदालत में पार्टी बनाएगी। यह अदालत की अवमानना है।

हितेश हिंदुस्तानी, अन्ना टीम।

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी एसके चौहान से दो टूक
सवाल: पिछले एक साल से चल रहे अभियान में कितना अतिक्रमण हटा है?
जवाब: अधिकतर अतिक्रमण हटा दिया गया है। कुछ लोगों ने अदालत से स्टे लिया है, कुछ को एकदम से हटना संभव नहीं है।
सवाल: पंजाबी बाजार में अतिक्रमण हटने के बावजूद नालियां पीछे नहीं की जा रही हैं?
जवाब: इसके लिए टेंडर लगाए गए हैं, काम अलाट होते ही इसे करवा दिया जाएगा।
सवाल: अदालत द्वारा दी गई समय सीमा समाप्त हो रही है। नगर परिषद का क्या पक्ष रहेगा?
जवाब: नगर परिषद ने अपना जवाब माननीय अदालत के लिए तैयार कर लिया है। अदालत व अन्ना टीम दोनों को संतुष्ट कर दिया जाएगा। अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी है।

 
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