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सौहार्द की मिसाल: नफरत की आग ने रिश्तों में बना दी थी खाई, तीन माह रातभर पहरा देकर बचाए थे मुस्लिम भाई

Mon, 15 Aug 2022 02:26 AM IST
भूपेंद्र सिंह सतीश जागलान, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा)
सतीश जागलान, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 15 Aug 2022 02:26 AM IST
सार

विभाजन के दिनों में जलालपुर कलां ने सौहार्द की मिसाल पेश की थी। आपसी प्यार और प्रेम के प्रतीक काफी लोगों ने मुस्लिम समाज के लोगों को अपने घरों के अंदर छिपाकर बचाया था। 99 वर्षीय बिरखेराम बोले कि आज भी वो दिन याद करके रूह कांप उठती है।

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In the days of partition, Jalalpur Kalan of Jind had set an example of harmony
जलालपुर कलां निवासी बिरखेराम हुक्का गुड़गुड़ाते हुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

आजादी से पहले ही भारत और पाकिस्तान में लगभग विभाजन तय हो गया था। मुस्लिम समाज के लोग पाकिस्तान तथा हिंदू समाज के लोग भारत आने लगे थे। पाकिस्तान से आजादी के दिन 1947 को लाशों से भरी ट्रेन आई थी। इस ट्रेन के आने के बाद भारत में मुस्लिम समाज के लोगों को मारना शुरू कर दिया था। आपसी प्यार और प्रेम के प्रतीक काफी लोगों ने मुस्लिम समाज के लोगों को अपने घरों के अंदर छिपाकर बचाया था।

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जींद में आसपास के लगभग दस गांवों में सबसे बड़े गांव जलालपुर कलां निवासी 99 वर्षीय बिरखेराम बताते हैं कि आजादी के समय वह 24 वर्ष के थे। आजादी से पहले ही देश का विभाजन शुरू हो गया था। मुस्लिम समुदाय के लोग पाकिस्तान जाने लगे थे तो हिंदू समुदाय के लोग पाकिस्तान से भारत आने लग गए थे।
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लगभग एक सप्ताह तक सब कुछ शांत रहा लेकिन आजादी के दिन ही 1947 को पाकिस्तान से एक ट्रेन लाखों की भरकर आई। इसके बाद भारत में भी आग लग गई और हिंदू समाज के लोग मुस्लिम समाज के लोगों को मारने लग गए। शहरों के साथ-साथ गांवों में भी यह आग फैलनी शुरू हो गई। गांवों में मुस्लिम व हिंदुओं का आपसी प्यार-प्रेम बहुत अधिक था।
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जींद के गांवों में मुस्लिम समुदाय की संख्या बहुत कम थी। इस कारण वह भय के मारे इधर-उधर छिप रहे थे। गांव जलालपुर गांव के लोग गांव में इकट्ठे हुए तथा गांव में 15-20 के आसपास मुस्लिम समुदाय की आबादी को बचाने का संकल्प लिया। सभी मुस्लिम समाज के लोगों को हिंदू समाज के लोगों ने अपने-अपने घरों में छिपा लिया। 


दूसरे गांव के लोग करते थे हमला
बिखरेराम बताते हैं कि लोग अपने ही गांव के मुस्लिम समाज के लोगों की हत्या नहीं करते थे बल्कि दूसरे गांवों के लोग ऐसा करके नफरत की आग भड़काते थे। जलालपुर कलां गांव के लोगों ने मुस्लिम समाज के लोगों को अपने घरों में छिपाकर उनका पहरा देना शुरू कर दिया। काफी गांवों के लोगों ने जलालपुर कलां पर हमला किया लेकिन ग्रामीणों ने किसी मुस्लिम समाज के लोगों को कुछ नहीं होने दिया। बिरखेराम ने बताया कि तीन महीने तक लगातार दिनरात पहरा देने के बाद जब शांति व्यवस्था बनने पर उनको घरों से निकाला गया। आज तक जलालपुर कलां गांव में हिंदू व मुस्लिम आपस में प्यार प्रेम से रहते हैं।

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